बीते दिनों तालिबान ने अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया जिसके बाद वहां की स्थिति भयावह है. लोग देश छोड़कर भागने पर मजबूर हैं. इस दौरान एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है. तस्वीर में बुर्क़ा पहनी तीन महिलाओं के आगे एक आदमी चल रहा है. इस आदमी के हाथ में एक ज़ंजीर है जिसे तीनों महिलाओं के पैरों को बांधा गया है. दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीर हाल की है.

TV9 भारतवर्ष के ऐंकर शुभांकर मिश्रा ने इस तस्वीर के साथ एक और तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा, “ये कैसे शुरू हुआ बनाम ये कैसा चल रहा है, 1960-70 के दशक के दौरान अफ़गानिस्तान यूरोपीय संस्कृति और एशियाई नैतिकता का एक आदर्श मिश्रण था”. (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

इसके कुछ घंटे बाद शुभांकर मिश्रा ने इन्हीं दो तस्वीरों का एक कोलाज़ ट्वीट किया जिसमें ऊपर की तस्वीर पर 1960 लिखा था जबकि नीचे वाली तस्वीर यानी पैरों में जंजीर बंधी महिलाओं की तस्वीर पर 2021 लिखा था. (आर्काइव लिंक)

एक और ट्विटर यूज़र ने ये तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि भगवान महिलाओं और बच्चों की रक्षा करें क्योंकि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था नाकाम हो गई है. ट्विटर पर ये तस्वीर वायरल है.

This slideshow requires JavaScript.

फ़ेसबुक पर भी ये तस्वीर शेयर की गई है. (लिंक 1, लिंक 2)

This slideshow requires JavaScript.

फ़ैक्ट-चेक

देखने से ही इस तस्वीर पर थोड़ा संदेह हुआ. गौर करें कि तस्वीर में बेड़ियों की परछाई थोड़ी अजीब दिखती है. तस्वीर में दिख रहे आदमी और उसके पीछे चलने वाली महिला के बीच बेड़ियों की परछाई साफ़ नज़र आती है. वहीं, पीछे चल रही दोनों महिलाओं के बीच बेड़ियों की परछाई गायब है. फिर दूसरी और तीसरी महिला के बीच बेड़ियों की परछाई दिखती है.

इसके चलते, ऑल्ट न्यूज़ ने की-वर्ड्स के साथ तस्वीर का रिवर्स इमेज सर्च किया. परिणाम स्वरुप हमें एबीपी न्यूज़ के बंगाली संस्करण एबीपी आनंदा का 2017 का एक आर्टिकल मिला. आर्टिकल में शामिल तस्वीर में कोई बेड़ियां नहीं थी. 

2017 के मॉडर्न डिप्लोमेसी के एक आर्टिकल में भी ये तस्वीर शेयर की गई थी. लेकिन इसमें भी किसी प्रकार की बेड़ियां नहीं थी.

आगे, सर्च करने पर हमें साल 2011 और 2012 में के कुछ ब्लॉग्स मिलें जिसमें बिना बेड़ियों वाली असली तस्वीर शेयर की गई थी. [लिंक 1 (आर्काइव लिंक), लिंक 2 (आर्काइव लिंक), लिंक 3 (2012 आर्काइव लिंक), लिंक 4 (2016 आर्काइव लिंक)]

इंटरनेट आर्काइव लाइब्रेरी में सर्च करने पर ऑल्ट न्यूज़ को एक ब्लॉग का आर्काइव लिंक मिला. मई 2011 के इस ब्लॉग में मूल तस्वीर शेयर की गई थी. यानी, ये तस्वीर कम से कम 10 साल पुरानी है.

इन सभी ब्लॉग्स में एक ही बात लिखी गयी है या यूं कहें तो बिल्कुल शब्द दर शब्द कॉपी-पेस्ट की गई है. इसमें अमेरिकी पत्रकार बार्बरा वल्थर्स का अफ़गानी महिला से बातचीत का ज़िक्र था. जिसमें बार्बरा अफ़गानी महिला से अपने पति के पीछे चलने का कारण पूछा. इसके जवाब में अफ़गानी महिला ने कहा, “लैंड माइंस”.

2017 में अभिजीत अय्यर मित्रा ने व्हाट्सऐप के हवाले से इसी कहानी को ट्विटर पर शेयर किया था. यानी, ये किस्सा भारत में भी शेयर किया गया था. (आर्काइव लिंक)

अमेरिकी फ़ैक्ट-चेक एजेंसी स्नोप्स ने 2014 में बार्बरा वल्थर्स की रिपोर्ट वाली कहानी की जांच की थी. और पाया था कि ये बस एक व्यंग्य है जो अलग-अलग संस्करण में 2001 से इंटरनेट पर शेयर की गयी है. 

 

कुल मिलाकर, 10 साल पुरानी एक तस्वीर को एडिट कर इसे 2021 का बताकर शेयर किया गया.


उन्नाव में मस्जिद और मुसलमानों के घर गिराने की बात फ़र्ज़ी निकली, सिंचाई विभाग ने अतिक्रमण हटाया था :

डोनेट करें!
सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें.

बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.

Tagged:
About the Author

Abhishek is a journalist at Alt News.