दंगा भड़काने और पत्थर मारने के लिए नहीं बल्कि पीड़ितों की मदद के लिए दिए जा रहे थे पैसे

24 सितम्बर, 2020 को एक ट्विटर यूज़र ने शाहीन बाग का बताकर एक वीडियो शेयर किया है. ये वीडियो उस लिस्ट के बाद शेयर किया जा रहा है जो कि टाइम मैगज़ीन द्वारा रिलीज़ की गयी है और जिसमें दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों को शामिल किया गया है. इस लिस्ट में 82 वर्षीय बिल्किस भी शामिल हैं जो कि शाहीन बाग़ में चल रहे ऐंटी सीएए प्रदर्शनों में एक बड़ा नाम बनकर उभरी थीं. इस सन्दर्भ में ये वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया गया कि शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वाली महिलाएं पैसे लेकर ऐसा कर रही थीं.

फ़रवरी में वायरल हुआ था ये वीडियो

एक वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हुआ है. इसके साथ दावा किया गया कि दंगा भड़काने और पत्थर मारने के लिए पैसे बांटे गए हैं, इसका सबूत ये वीडियो है. वीडियो में महिलाओं की भीड़ है और एक आदमी एक-एक कर के सभी के हाथ में नोट जैसी कुछ चीज़ दे रहा है. ‘We Support Narendra Modi’ नाम के एक फ़ेसबुक ग्रुप में पोस्ट किए गए इस वीडियो को 64 हज़ार से ज़्यादा शेयर मिले हैं. अमित बजाज ने इसे पोस्ट करते हुए लिखा है, “ये रहा सबुत दंगा भडकाने,पत्थर मारणे के लिये दिये गये पैसे.” वीडियो के कमेंट सेक्शन में कई लोगों ने लिखा है कि इन प्रदर्शनकारियों को मार देना चाहिए. और कइयों ने मुस्लिम समुदाय पर निशाना साधते हुए बहुत ही ख़राब भाषा का इस्तेमाल किया है.

‘एशियानेट’ ने वायरल वीडियो के आधार पर आर्टिकल लिख दिया कि शाहीनबाग में लाइन लगाकर प्रदर्शनकारी महिलाओं को पैसे बांटे जा रहे हैं.

कई लोगों ने इसे शाहीन बाग का बताकर शेयर किया है. इनमें तारिक़ फ़तह और भाजपा दिल्ली के सचिव कुलजीत सिंह चहल भी शामिल हैं.

ये वीडियो इसी दावे के साथ फ़ेसबुक पर वायरल है. कई लोगों ने दावा किया है कि शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को पांच-पांच सौ रुपये दिए जा रहे हैं. वीडियो को शेयर करने वाले ने लिखा है – “शाहीन बाग़ से ये लाइव है.”

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि एक फ़ेसबुक यूज़र चन्द्र मोहन वायरल वीडियो में दिख रही जगह पर गए और उन्होंने वहां से सोशल मीडिया दावों को ख़ारिज करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया. वीडियो में चन्द्र मोहन कह रहे हैं, “28 फ़रवरी का दिन था, इस जगह को बाबू नगर, ए ब्लॉक, गली नंबर 9 के नाम से जाना जाता है. शिव विहार से बहुत से लोग, जो दंगो से प्रभावित हुए थे, यहां आए हुए थे. उनमें से बहुत से लोग अब यहीं रह रहे हैं क्योंकि इन लोगों का अपना घर बर्बाद हो चुका है. यहां के स्थानीय लोगों ने इन पीड़ित लोगों के लिए अपने घरों के दरवाज़े खोल दिए हैं.”

 

Remember the video circulated claiming people were paid money to go to Shaheen Bagh protest. Well I’m conclusively proving it as a lie, by shooting from the same location and with the person who gave the money and explaining for what reason, with corroborative video evidences. So watch it share it and please stop sharing fake news. Thanks a lot.

Posted by Chandra Mohan on Monday, 2 March 2020

इस वीडियो में चन्द्र मोहन वायरल वीडियो में दिख रहे एक व्यक्ति का परिचय भी कराते हैं. इनका नाम शहज़ाद मलिक है. “ये वही हैं, जिन्हें आपने वीडियो में कैश बांटते हुए देखा है. मलिक यहीं हैं. हमने उन्हें वही कपड़े पहनने को कहा है जो वीडियो में दिख रहे हैं. ताकि आप समझें कि हम सच बता रहे हैं आपको.” चन्द्र मोहन कहते हैं कि मलिक ने पीड़ितों को राशन भी बांटा और क्यूंकि पीड़ितों की संख्या काफ़ी ज़्यादा थी इसलिए राशन ख़त्म हो गया. चन्द्र मोहन कहते हैं, “इस आदमी का दिल बहुत बड़ा है. इसने 70 हजार रुपये बांटे हैं. 500 रूपये करके सभी पीड़ितों को दिया है. ऐसे लोग जिन्हें अच्छाई नहीं दिखती है और कुछ अच्छा नहीं कर सकते, वही झूठ फैलाते हैं.”

ऑल्ट न्यूज़ ने चन्द्र मोहन के वीडियो में दिख रहे लोकेशन की वायरल वीडियो से तुलना की. दोनों वीडियो में दिख रही समानता को नीचे अलग-अलग रंगों से दिखाया गया है.

  • लाल: दीवार में दिख रहा छेद
  • हरा: दीवार और गली के बीच दिख रहा नाला
  • नीला: नाले के ऊपर दिख रहा प्लेटफार्म

दोनों वीडियो में कचरे के ढेर के पास एक टूटा हुआ हेलमेट दिख रहा है.

ऑल्ट न्यूज़ के साथ बातचीत के दौरान चन्द्र मोहन ने कहा, “मैं चेन्नई से सामाजिक और राजनितिक कार्यकर्ता हूं. 5 दिन पहले मैं दिल्ली आया ताकि कुछ राहत और बचाव कार्य कर सकूं. मैं ट्रेड यूनियन के कुछ युवाओं से मिला जो ये काम कर रहे हैं. इसके बाद मैं इन लोगों के साथ ही मुस्तफ़ाबाद में शिफ्ट हो गया, जो शिव विहार के बगल में ही है. शिव विहार, जो सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है. ऐसे लोग जिनका घर खाक़ हो चुका है, वो यहां आए हैं. हमने एक राहत बेस बनाया. मैंने कल पहली बार ये वीडियो देखा. फिर आस-पास के लोगों से इस बारे में पूछा. उनमें से एक ने कहा कि वो उस आदमी को जानता है, जिसने पैसे बांटे हैं. क्यूंकी ये वही इलाका था जहां हमने राहत बेस बनाया, इसीलिए हमारे लिए इस वीडियो को डीबंक करना ज़्यादा मुश्किल नहीं था.”

चन्द्र मोहन ने कहा कि शहज़ाद मलिक, जिसे पैसे बांटते हुए देखा गया, उनके पास इस राहत कार्य का वीडियो भी है. नीचे वायरल वीडियो का ही अगला हिस्सा है, जहां महिलाएं पैसे लेने के लिए एक लाइन में खड़ी हैं. वीडियो के बैकग्राउंड में एक महिला को शहज़ाद को पुकारते हुए सुना जा सकता है. और जो पैसे बांट रहा है उसे ये कहते हुए सुना जा सकता है, “जिन्हें ज़रुरत है वही लोग आएं.”

राशन बांटे जाने का वीडियो भी नीचे देखा जा सकता है.

ऑल्ट न्यूज़ ने शहज़ाद मलिक से भी बात की. नीचे की तस्वीर में लाल रंग से उन्हें हाईलाइट किया गया है. मलिक ने हमें बताया – “मैं बिज़नेस करता हूं. कार पॉलिश का बिज़नेस है मेरा. यहां जो मुसलमानों के घरों में आग लगी थी, जिनका घर जलकर राख हो गया है… राशन कहीं से आया था, बाहर से, एक गाड़ी के अंदर… तो वो राशन हमने बांट दिया. इसके बाद 100-150 औरतें भी थीं जिनके पास कुछ भी नहीं था खाने-पीने का, दवाई, दूध वैगरह. बच्चे भी थे. तो उनका मुझसे देखा नहीं गया. तो मैं अपने घर से जाकर पैसे ले के आया. और सबको 500-500 रुपये दे दिए. किसी ने वीडियो शूट करके उसको गलत फैला दिया कि 500 रुपये जो दिए हैं, ये शाहीन बाग़ की औरतों को दिए हैं. ये वीडियो 28 तारीख की है. दंगे 24-25-26 को हुए थे और मदद 28 तारीख को की थी हमने. वो वीडियो 30 सेकंड की काटी है लेकिन मेरा जो वीडियो है, वो 3 मिनट का है. और बाद में मैंने ये भी बोला है कि जिन व्यक्ति को ज़रूरत हो वही लेना. लेकिन ये काट दिया गया.”

CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों को पैसे दिए जाने की गलत जानकारी बार-बार फैलाई जा रही है. इस बार दिल्ली की हिंसा में पीड़ित लोगों को मदद पहुंचाने का वीडियो झूठे दावे से फैलाया गया. कुछ दिन पहले अमित मालवीय ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया था कि शाहीन बाग़ की औरतों को प्रदर्शन के लिए 500 रुपये मिलते हैं. इस दावे को ऑल्ट न्यूज़ और न्यूज़लॉन्ड्री ने मिलकर ख़ारिज किया था.

[अपडेट: इस आर्टिकल को 24 सितम्बर को अपडेट किया गया.]
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