प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का काम चल रहा है, जिसकी आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने 2023 में रखी थी. इसी बीच एक मढ़ी (ऊंचा चबूतरा) पर बुलडोजर चलाए जाने का वीडियो सामने आया, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया. और लोगों ने सरकार पर रीडेवलपमेंट के नाम पर वहाँ लगी प्राचीन मूर्तियों को नष्ट करने के आरोप लगाए.

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने 5 तस्वीरों के एक कोलाज का स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमें एक मंदिर के आसपास मलबा गिर है और नंदी की मूर्ति दिख रही है. एक तस्वीर में कुछ टूटे हुए शिवलिंग दिखाई देते हैं. एक अन्य तस्वीर में मंदिर के ऊपर विशालकाय पेड़ गिरा हुआ है. एक तस्वीर में चबूतरे पर बुलडोज़र की मौजूदगी है, एक तस्वीर में देवी अहिल्‍याबाई होलकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त दिखाई देती है. इसे शेयर करते हुए संजय सिंह ने लिखा कि ये महमूद गज़नवी का नहीं नरेंद्र मोदी का राज है, जहाँ हमारे पौराणिक मंदिरों को तोड़ा जा रहा है. उन्होंने कहा कि ये काशी के मणिकर्णिका घाट पर विनाश का दृश्य है.

कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने भी इसी 5 तस्वीरों का कोलाज सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और लिखा कि बनारस के मणिकर्णिका घाट पर यह विध्वंस महमूद गजनवी के असली अनुयायी मोदी ने किया.

संदीप देव, अमित, महाराष्ट्र यूथ कांग्रेसलुटियंस मीडियाप्रभाकर नारायणराव पेशवासंजीव अवस्थीजसविंदर कौर उस लिस्ट में शामिल हैं जिन्होंने नंदी की मूर्ति वाली तस्वीर शेयर करते हुए ऐसा ही दावा किया है.

फ़ैक्ट-चेक

तस्वीर 1
ये तस्वीर लाइव हिंदुस्तान की वेबसाइट पर 29 अप्रैल 2021 को प्रकाशित एक आर्टिकल में मौजूद है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र स्थित अक्षयवट हनुमान मंदिर के पास अति प्राचीन अक्षयवट वृक्ष बुधवार को जड़ से उखड़ कर गिर गया था. इसी अक्षयवट के नाम पर अक्षयवट हनुमान मंदिर का नाम पड़ा था. मंदिर की देखरेख करने वाले महंत के परिवार ने आरोप लगाया था कि प्रशासन की लापरवाही से अक्षयवट वृक्ष गिर गया.

तस्वीर 2

ये तस्वीर 24 अक्टूबर 2021 को शिवम मिश्रा नाम के यूजर द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किया गया था. जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा था कि काशी विश्वनाथ परिसर में मौजूद इस मंदिर को कुछ ही दिनों में ‘ध्वस्त’ किया जा सकता है.

शिवम मिश्रा ने इसी मंदिर की तस्वीर 2021 में दूसरे एंगल से भी ट्वीट किया था जिसमें मंदिर के आसपास मलबा कम है, लेकिन स्थिति वैसी ही है.

द फ़ैक्टमिथ्स के फ़ैक्ट-चेकर ने 19 जनवरी को मंदिर की हालिया स्थिति की तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा कि ये मंदिर अभी सही सलामत है.

ध्यान दें कि ये तस्वीर 2021 से ऑनलाइन मौजूद है लेकिन इसे न्यूज़ 18 ने हाल ही में AI तस्वीर बता दिया.

तस्वीर 3

ये तस्वीर अमर उजाला की वेबसाइट पर 20 दिसंबर 2018 को प्रकाशित एक आर्टिकल में मौजूद है. रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी के रोहित नगर विस्तार क्षेत्र में एक प्लाट पर डाले गए मलवे में सवा सौ से ज्यादा खंडित शिवलिंग मिले थे, जिसके बाद संत नेता और स्थानीय लोगों ने वहां पहुंचकर विरोध किया था. प्रशासन ने मलवे में मिले 126 शिवलिंगों को एकत्र करके थाने में रखवा दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, आशंका यह जताई जा रही थी कि यह मलबा मंदिर कॉरिडोर के लिए चल रहे ध्वस्तीकरण से निकला था जिसे किसी ठेकेदार ने फेंक दिया था, लेकिन मंदिर प्रशासन ने इसका कॉरिडोर का मलवा होने से इंकार कर दिया था.

कुल मिलाकर, इतना साफ हो जाता है कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने जो 5 तस्वीरों का कोलाज सोशल मीडिया पर शेयर किया है, उसमें 3 तस्वीरें पुरानी हैं,और उनका वर्तमान में नमणिकर्णिका घाट सौन्दर्य परिजेक्ट से कोई संबंध नहीं है. लेकिन ये भी गौर करने वाली बात है कि ये AI तस्वीर नहीं है.

 

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