वायरल हो रहे एक वीडियो में दो व्यक्ति मिलकर एक युवक को लाठी से पीटते हुए सड़कों पर मार्च निकालते हुए दिखते हैं. वीडियो को शेयर करते हुए राइट विंग हैंडल्स सांप्रदायिक दावा कर रहे हैं कि कथित तौर पर मोहम्मद फ़िरोज़ नाम का मुस्लिम युवक गर्ल्स स्कूल के बाहर हिंदू लड़कियों को छेड़ता था इसलिए पुलिस उसकी पिटाई कर रही है.

दावा करने वालों ने ये नहीं बताया कि यह घटना किस जगह, राज्य, ज़िले और स्कूल की है.

राइट विंग एक्स-हैंडल @HindutvaDon_ ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मोहम्मद फ़िरोज़ स्कूल के बाहर लड़कियों को परेशान कर रहा था, पुलिस ने उसे बेल्ट कड़ी सजा दी.”

राइट एक्स हैंडल @SonOfBharat7, @ocjain4, @MithilaWaaala, @RakeshKishore_l, @Bahubali_IND2 समेत कई यूज़र ने भी वीडियो में दिख रहे युवक को मोहम्मद फ़िरोज़ बताते हुए सांप्रदायिक ऐंगल साथ वीडियो शेयर किया.

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ध्यान दें कि ऑल्ट न्यूज़ ने @HindutvaDon_, @SonOfBharat7, @ocjain4, @MithilaWaaala, @RakeshKishore_l नामक इन सभी राइट विंग हैंडल्स को कई मौकों पर सांप्रदायिक और ग़लत जानकारी फैलाते हुए पाया है.

हिंदू-मुस्लिम प्रॉपगेंडा आधारित न्यूज़ चैनल सुदर्शन न्यूज़ उत्तरप्रदेश के इंस्टग्राम और यूट्यूब पर ये वीडियो चलाते हुए इसे उत्तरप्रदेश की घटना बताया. चैनल ने लिखा, “उत्तर प्रदेश में स्कूल के बाहर लड़कियों को परेशान करने वाला मोहम्मद फ़िरोज़ आरोपी को पुलिस ने हिरासत में लिया है और मामले की जांच जारी है.”

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तो वही BJP SWARAJ नामक भाजपा फैनक्लब इंस्टाग्राम पेज ने भी ऐसे ही दावे के साथ वीडियो को गुजरात का बताया.

फैक्ट-चेक

हमने वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए इसके कुछ की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें 15 मार्च 2025 को @HateDetectors नामक एक्स-हैंडल पर वीडियो अपलोडेड मिला. पोस्ट के मुताबिक, “अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में कथित तौर पर यात्रियों पर हमला करने और लाठियों व तलवारों से वाहनों में तोड़फोड़ करने वाले गुंडों की गुजरात पुलिस ने पिटाई की. सोशल मीडिया पर नेटिज़न्स ने सराहना करते हुए कहा कि गुंडों को उनके किए का फल मिल गया.”

इसके अलावा, हमें लाइव मिंट की एक न्यूज़ रिपोर्ट मिली, जिसमें वीडियो के स्क्रीनग्रैब का इस्तेमाल किया गया है. इस ररेपोर्ट के मुताबिक, होली से ठीक एक दिन पहले, एक प्रत्यक्षदर्शी द्वारा फिल्माए गए वीडियो में 20 लोगों की भीड़ को एक SUV के मालिक पर हमला करते और तलवारों और लाठियों से आसपास के अन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाते हुए दिखाया गया था. इसके बाद कार्रवाई करते हुए गुजरात पुलिस ने 14 आरोपियों को गिरफ़्तार किया और सरेआम उनकी पिटाई की. सोशल मीडिया पर इस कार्य के लिए गुजरात पुलिस की सराहना की जाने लगी.

आगे रिपोर्ट में पुलिस उपायुक्त बलदेव देसाई ने कहा, “प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह हिंसा वस्त्राल क्षेत्र में एक व्यावसायिक परिसर के पास एक दुकान खोलने को लेकर दो व्यक्तियों के बीच चल रही प्रतिद्वंद्विता का परिणाम थी. पंकज भावसार को अपने प्रतिद्वंद्वी संग्राम सिकरवार से इस बात की शिकायत थी कि उसने उसे उस क्षेत्र में दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी थी”

की-वर्डस सर्च करने पर हमें गुजरात समाचार की एक रिपोर्ट मिली जो 15 मार्च, 2025 को पब्लिश हुई थी. इस रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने एक नाबालिग सहित 14 आरोपियों अलदीप मौर्य, श्याम कमली, विकास उर्फ ​​बिट्टू परिहार, अशील मकवाना, रोहित उर्फ ​​दुर्लभ सोनवणे, निखिल चौहान, मयूर मराठी, प्रदीप उर्फ ​​मोनू तिवारी, राजवीर सिंह बिहोला, अलकेश यादव, आयुष राजपूत, दिनेश राजपूत और दीपक कुशवाह को गिरफ्तार किया.

आगे रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि कानून का भय पैदा करने के उद्देश्य से, पुलिस ने न केवल आरोपियों को सार्वजनिक रूप से पेश किया, बल्कि उन्हें सार्वजनिक दंड के रूप में सिट-अप्स भी करवाए. ऐसा करके आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया गया. इसके अलावा, सात आरोपियों, श्याम कमली, आशीष मकवाना, रोहित उर्फ ​​दुरलभ सोनावाने, राजवीर सिंह बिहोला, अल्केश यादव और आयुष राजपूत के अवैध रूप से निर्मित मकानों को एएमसी द्वारा ध्वस्त कर दिया गया.

ऑल्ट न्यूज़ ने जब वायरल दावे के संबंध में की वर्ड सर्च किया, तो हमें हालिया कोई भी न्यूज़ रिपोर्ट या विश्वसनीय स्रोत नहीं मिली जो उत्तरप्रदेश या गुजरात में मोहम्मद फ़िरोज़ नामक मुस्लिम युवक द्वारा स्कूल के बाहर हिंदू लड़कियों को छेड़ने की दावे की पुष्टि कर सके.

लेकिन जाँच के दौरान हमें ‘प्रभात खबर‘ की 17 दिसंबर 2024 को प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड, रांची के काेतवाली थाना क्षेत्र के अपर बाज़ार स्थित शिव नारायण मारवाड़ी बालिका प्लस टू विद्यालय की छात्राओं के साथ छेड़खानी मामले के आरोपी फिरोज अली उर्फ सुग्गा (29) को मेन रोड पर परेड कराते हुए पुलिस कोर्ट ले गयी. उसे कोर्ट में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था.

यानी, वायरल वीडियो मार्च 2025 के गुजरात पुलिस की कार्रवाई का है. असल में दुकान खोलने को लेकर हुए विवाद और तोड़फोड़ की घटना की बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से परेड निकाला गया था. और पकड़े गए सभी आरोपी हिंदू समुदाय से ही थे. लेकिन इस वीडियो को राइट विंग हैंडल्स ग़लत सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर कर रहे हैं.

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