चेतावनी: इस रिपोर्ट में दी गई जानकारियां परेशान करने वाली हो सकती हैं.

“यहां रहकर तुम कमाते हो, खाते हो और “जय भवानी” नहीं बोलोगे?… तुम बांग्लादेशी हो, हम तुम्हें मार डालेंगे.”

30 दिसंबर, 2025 को बिहार के मधुबनी ज़िले के चकदह गांव में एक राजमिस्त्री को बांग्लादेशी नागरिक होने का झूठा आरोप लगाकर पीटा गया. पीड़ित की पहचान नुरशेद आलम के रूप में हुई, जो बिहार के सुपौल ज़िले के बीरपुर थानाक्षेत्र का रहने वाला है. वो मधुबनी के चकदह गांव में मजदूरी करता था.

घटना के वीडियो में दिखता है कि भीड़ ने नुरशेद आलम को घेर रखा है और एक आदमी उस पर बेरहमी से हमला कर रहा है. हमलावर उसे गालियां दे रहा है और बार-बार लात मार रहा है और पीड़ित के चेहरे पर स्मार्टफोन से भी हमला कर रहा है, जिससे उसका चेहरा लहूलुहान हो चुका है. हमलावर कहता है कि तुम कटु*वा (मुसलमानों के लिए अपमानजनक शब्द) हो, तुम गायों को काटते हो. लड़कों ने दावा किया कि नुरशेद के फोन में बांग्लादेश और पाकिस्तान के कॉन्टैक्ट नंबर थे. हालांकि, वीडियो में नुरशेद इस दावे से इनकार करते हुए आग्रह करता है कि उसका फोन और भी लोगों को दिखाया जाए. हमलावर उसकी बात नहीं सुनता और बार-बार उस पर हमला करते हुए कहता है कि यहां रहकर तुम कमाते हो, खाते हो और “जय भवानी” नहीं बोलोगे?

वायरल वीडियो को संज्ञान में लेते हुए मधुबनी एसपी योगेन्द्र कुमार ने 2 जनवरी को एक बयान जारी कर कहा, “सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो हम लोगों को प्राप्त हुआ था जिसमें कि एक आदमी को कुछ दो-तीन लड़के बांग्लादेशी समझ के उसके साथ मारपीट कर रहे थे. इस वीडियो को बहुत ही सीरियसली लेते हुए मधुबनी पुलिस की सोशल मीडिया सेल ने तुरंत उसने इसकी जांच की, जिसमें पता चला कि ये मामला राजनगर थाना क्षेत्र में आने वाले चकदह से जुड़ा हुआ मामला है. तुरंत SHO और SDPO मौके स्थल पर पहुँचे थे और उन्होंने जब पता किया तो पाया कि पीड़ित व्यक्ति है, यह सुपौल जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है और राज मिस्त्री का काम करता है. इसके मोबाइल फ़ोन भी चेक किए गए तो कोई ऐसी आपत्तिजनक चीज़ नहीं मिली है.”

एसपी योगेन्द्र कुमार ने बताया कि जो दोनों लड़के उसके साथ मारपीट कर रहे थे, ये भी राजनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं. इन दोनों की पहचान हो गई है और इन लोगों पे पुलिस ने तुरंत अटेम्प्ट टू मर्डर की धाराओं में केस दर्ज कर दिया है. दोनों की गिरफ़्तारी के लिए विशेष टीम गठित हो गई है, बहुत जल्दी इन दोनों की गिरफ़्तारी की जाएगी.

स्थानीय मीडिया को दिए एक बयान में, नुरशेद आलम ने इस हिंसा के बारे में विस्तार से बताया कि वह एक स्थानीय दुकान पर कुछ सामान लेने गया था तो एक लड़के ने उसपर कुछ खास नारे लगाने के लिए दबाव डाला, जिनमें “जय भारत माता की,” “जय ​​हिंद,” “जय ​​सीता राम,” और “जय राम” जैसे नारे शामिल थे. इसपर नुरशेद ने जवाब दिया कि वह “जय भारत” और “जय भारत माता” का नारा लगा सकता है, लेकिन दूसरे नारे नहीं. लड़के ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया.

नुरशेद ने आगे कहा, “फिर वह मेरे रूम पर आया और मुझे धमकी दी. अगले दिन जब मैं लंच करके वापस काम पर लौट रहा था, तो 2-3 लड़के एक दुकान पर थे, उन्होंने मुझे पकड़ लिया और कहा कि तुम बांग्लादेशी हो, हम तुम्हें मार डालेंगे. इसके बाद उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया और मारते हुए 2-3 किलोमीटर तक घुमाया. मेरे नाक और मुंह से खून बह रहा था, किसी ने मुझे बचाने की कोशिश नहीं की. आखिर में, उन्होंने कहा कि हम तुम्हें काली मंदिर में बलि चढ़ाएंगे. उन्होंने मुझे मंदिर के गेट से वापस कर दिया और फिर मुझे एक खाली जगह पर ले गए और बेरहमी से पीटा. उन्होंने मुझे लात मारी और मेरे मोबाइल फोन से मेरे चेहरे पर हमला किया.

सुपौल में इस मामले को देख रहे सोशल वर्कर ज़ियाउल हक ने द हिंदुस्तान गजट को बताया कि हमले के समय आलम के साथ चार और मज़दूर मौजूद थे. लेकिन वे भागने में कामयाब रहे. जब वे कुछ लोगों के साथ उसे बचाने लौटे, तो उन्होंने नुरशेद आलम को बेहोश पाया. बाद में पुलिस मौके पर पहुंची, उसके सिर पर बार-बार मारा गया था. उसका चेहरा और हाथ सूजा हुआ था.

द क्विंट से बात करते हुए नुरशेद के चचेरे भाई नसीम ने बताया, “जब हमें हमले की खबर मिली, तो हम सुपौल से मधुबनी गए. वहाँ के सरकारी अस्पताल में फर्स्ट एड के बाद, उसे शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन ले जाया गया. फिर उसे इलाज के लिए पूर्णिया ले जाया गया. पूर्णिया में एक प्राइवेट डॉक्टर ने उसका इलाज किया, जिसमें लगभग 11 हज़ार रूपये का खर्च आया. अब उसे इलाज के लिए नेपाल के बिराटनगर ले जाया गया है. नुरशेद एक राजमिस्त्री है, उसे मधुबनी में एक सरकारी नाला बनाने का काम मिला था और वह उस काम के लिए सुपौल में रह रहा था. उसकी लंबी दाढ़ी है, जिसकी वजह से उसे निशाना बनाया गया.”

पीड़ित के भतीजे, महबूब आलम ने द क्विंट को बताया कि अब तक इलाज पर 20-25 हज़ार रूपये खर्च हो चुके हैं. परिवार के पास मेडिकल केयर पर और खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं. उन लोगों से कोई दुश्मनी नहीं थी, फिर भी उस पर हमला किया गया.

मधुबनी पुलिस ने 5 जनवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि बांग्लादेशी होने के निराधार और भ्रामक आरोप लगाकर मारपीट किये जाने के मामले में पुलिस ने विशेष टीम गठित कर लगातार छापेमारी की. वीडियो में पीड़ित के साथ मारपीट करता दिख रहा मुख्य अभियुक्त समेत 3 आरोपी कैलाश मुखिया, शिव कुमार और लेख नारायण को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

नुरशेद आलम पर हमला कोई अकेली घटना नहीं है. 2025 के दिसंबर महीने में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के एक मुस्लिम प्रवासी मज़दूर को ओडिशा के संबलपुर में ‘बांग्लादेशी’ होने का आरोप लगाकर भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. 2025 के दिसंबर में ही केरल के पलक्कड़ ज़िले में चोरी के शक में छत्तीसगढ़ के एक दलित व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इस घटना के वीडियो में आरोपियों ने पीड़ित से पूछा कि क्या वह बांग्लादेशी है?

इसी तरह, 2024 में दिल्ली, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर मुसलमानों और बंगाली बोलने वाले प्रवासी मज़दूरों पर “बांग्लादेशी” होने का झूठा आरोप लगाकर हमला किया गया, जिसे ऑल्ट न्यूज़ ने डॉक्यूमेंट किया था.

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