मध्यप्रदेश के बेतूल ज़िले के एक गांव में अफवाहों की वजह से एक निर्माणाधीन स्कूल भवन पर बुलडोज़र चल गया. दरअसल, भैंसदेही तहसील के धाबा गांव में अब्दुल नईम नामक शख्स एक स्कूल भवन का निर्माण करवा रहा था, ग्रामीणों के बीच यह अफ़वाह फैल गई कि यह गैरकानूनी मदरसा है, इस कारण प्रशासन ने अवैध निर्माण बताते हुए भवन के एक हिस्से पर बुलडोज़र चला दिया.

नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, धाबा गांव की आबादी 2,000 है और पूरे गांव में केवल 3 मुस्लिम परिवार हैं. अब्दुल नईम अपनी निजी भूमि पर करीब 20 लाख की लागत से स्कूल भवन निर्माण करा रहा था. लेकिन गांव में अचानक से यह अफवाह फैली कि इसमें गैरकानूनी मदरसा चल रहा है और बुलडोज़र चल गया. अब्दुल नईम का कहना है कि अभी तो बिल्डिंग तैयार नहीं हुई है तो संचालन का सवाल ही नहीं है.

अब्दुल नईम ने मीडिया को बताया कि अवैध गतिविधि चलने का अफ़वाह बिल्कुल निराधार है. इस अफवाह के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी आए थे जिन्हें सभी डॉक्यूमेंट दिखाने के बाद अधिकारियों ने सभी डॉक्यूमेंट को उचित बताते हुए नईम को ग्राम पंचायत से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) को लेने कहा था.

जब अब्दुल नईम ने 10 जनवरी को पंचायत भवन जाकर अनापत्ति प्रमाण पत्र के संबंध में संपर्क किया तो कथित तौर पर सचिव ने अब्दुल नईम को 2 दिन बाद में आने के लिए कहा.

अब्दुल नईम के कथनानुसार, इसके अगले दिन 11 जनवरी को ग्राम पंचायत सचिव ने शाम को आकर अब्दुल नईम से कहा, “आप अपना भवन स्वयं तोड़ लें वरना हम तोड़ देंगे, ऊपर से बहुत दबाव हैं.”

अब्दुल नईम ने दावा किया कि उसने 30 दिसंबर 2025 को ज़मीनी से लेकर आवश्यक सभी दस्तावेजों को शिक्षा विभाग में स्कूल संचालन के अनुमति के लिए जमा कर चुका है.

ग्राम पंचायत ने दिया NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र)

गांव में स्कूल तोड़ने के आदेश से ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ती गई और उस आदेश का विरोध भी किया जाने लगा. इसी बीच 12 जनवरी को ग्राम पंचायत ने आनन-फानन में NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी कर दिया.

गांव की सरपंच रामरती बाई कंगाले ने एनडीटीवी को बताया कि पहले नईम ने इजाजत नहीं ली थी. 12 तारीख को उन्होंने अनुमति दे दी थी. वहां मदरसा चलने की कोई शिकायत उन्हें कभी नहीं मिली.

हालांकि, 12 जनवरी को NOC मिलने के बाद भी भवन तोड़ने का आदेश वापस नहीं लिया गया. 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) को अब्दुल नईम, स्थानीय कांग्रेस नेता व जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) कार्यकर्ताओं समेत धाबा के ग्रामीण, बैतूल कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जिन्हें कथित तौर पर पुलिस ने रोक दिया और उन्हें घंटों बाद छोड़ा गया. इसी बीच जब अब्दुल नईम और ग्रामीण कलेक्टर को ज्ञापन दे रहे थे तो दूसरी ओर कथित रूप से एसडीएम साहब निर्माणाधीन भवन के एक हिस्से को तोड़ रहे थे.

पंचायत से NOC लेकर ज्ञापन देने पहुंचे अब्दुल नईम और कांग्रेस नेता हेमंत वागद्रे, कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी से मिलकर गुजारिश की कि सारे कागजात पूरे हैं. इस पर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा, “शिक्षा जैसी पवित्र चीज को यह अवैध तरीके से यूज़ करना चाहते हैं.”

कांग्रेस नेता हेमंत वागद्रे अवैध वाली बातों पर स्पष्टीकरण देते हुए कलेक्टर को ग्राम पंचायत से NOC मिलने की बात बताते हैं और कहते हैं कि अब कोई आपत्ति ही नहीं है लेकिन हमें आपसे मिलने से भी रोका जा रहा था. इन सभी बातों को दरकिनार कर अब्दुल नईम को स्वयं से भवन तोड़ने को कहा जाता है.

अवैध बताकर की गई प्रशासनिक कार्रवाई

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के हवाले से बेतूल ज़िला प्रशासन ने बताया कि औपचारिकताओं का पालन न करने के कारण एक इमारत के अवैध हिस्से को ध्वस्त कर दिया है साथ ही प्रशासन ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि इमारत में मदरसा या स्कूल चलने की अफवाहों के कारण यह कार्रवाई की गई. उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अजीत मरावी के नेतृत्व में एक टीम ने मंगलवार को भैंसदेही तहसील के धाबा गांव में लोहे की चादरों से बने भवन के शेड को ध्वस्त किया.

कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने 14 जनवरी को पीटीआई को बताया, “पंचायत से अनिवार्य NOC प्राप्त न करने के कारण भवन का निर्माण पूरी तरह से अवैध है. ग्राम पंचायत ने पंचायत राज अधिनियम के तहत ढांचे को ध्वस्त करने के लिए तीन नोटिस जारी किए थे और एक औपचारिक आदेश पारित किया था. यदि इतनी बड़ी संरचना का नि“र्माण किया जा रहा है, तो नियमों का पालन करना आवश्यक है. साथ ही बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक सहायता का अनुरोध किया गया था और वह प्रदान की गई, इसके अलावा अवैध गतिविधियों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा.”

आगे कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि पंचायत ने 11 जनवरी को भवन ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया था. हालांकि, ग्रामीणों के विरोध के बीच, सरपंच ने जल्दबाजी में भवन के लिए एनओसी जारी कर दी. उन्होंने कहा कि NOC सरपंच द्वारा लिखी गई थी, जो स्वीकार्य नहीं है, NOC पर सचिव के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, क्योंकि वही पंचायत के कार्यकारी हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इमारत से न तो कोई स्कूल और न ही कोई मदरसा संचालित हो रहा था और यह कार्रवाई निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन न करने के कारण की गई है.

झूठी अफवाहों के बीच 

जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) कार्यकर्ता रमेश उर्फ ​​सोनू पांसे ने ऑल्ट न्यूज़ के साथ बातचीत में गैरकानूनी मदरसे जैसी गतिविधियों की अफवाहों को खारिज करते हुए बताया कि धाबा गांव के ग्रामवासी चाहते हैं कि उनके बच्चों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले. इसलिए स्कूल का निर्माण सभी के सहमति से हो रहा था, अब तो भवन निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र भी मिल गया है.

साथ ही कहा कि अगर भवन पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाती है तो स्थानीय निवासी और जय आदिवासी युवा शक्ति सभी मिलकर आंदोलन करेंगे.

अब्दुल नईम ने मीडिया से बात करते हुए प्रशासन से विनती करते हुए नज़र आए. उन्होंने निर्माणाधीन स्कूल को नहीं तोड़ने की विनती की.आगे अब्दुल नईम ने यहाँ तक कहा कि अगर उनसे किसी को तकलीफ़ है तो वे भवन और गाँव, समिति सब छोड़कर कहीं और चले जाएँगे लेकिन उनकी जोड़-जोड़ कर बनाई गई भवन को ना तोड़ा जाए.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में स्कूल शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड डेटा के हवाले से बताया गया है कि मध्य प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक के लिए 83,249 सरकारी विद्यालय हैं. इनमें से 211 स्कूलों के पास कोई इमारत नहीं है. कई स्कूल पेड़ों के नीचे चल रही हैं तो कई खुले आसमान के नीचे. 1,900 स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय नहीं हैं, तो वहीं 1,700 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं हैं. स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़े यह साफ़ दिखाते हैं कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था पहले से ही संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है. ऐसे में एक ग्रामीण इलाके में निजी पहल से बनने वाले स्कूल को संरक्षण देने के बजाय तोड़ना नीतिगत प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.

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