हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिल्ली स्थित प्रमुख केन्द्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया के नाम से एक कथित नोटिस काफी शेयर किया जा रहा है. इसमें दावा किया गया है कि रमजान के पवित्र महीने के दौरान जामिया मिल्लिया इस्लामिया के परिसर में लड़का-लड़की का एक साथ खड़ा होना सख्त मना है. नोटिस में आगे लिखा है कि यदि कोई जोड़ा साथ खड़ा पाया गया, तो प्रशासन तुरंत उनका निकाह (शादी) करा देगा.

@RVAIDYA2000 हैंडल वाले एक यूज़र ने X पर इस कथित नोटिस को शेयर किया. 24 फ़रवरी को इसे कोट करते हुए रतन शारदा ने मज़ाकिया लहजे में कहा कि यह रमज़ान के महीने के लिए एक खास नियम है. (आर्काइव लिंक)

एक अन्य यूज़र ने इसे शेयर करते हुए शिक्षा मंत्रालय के हैन्डल को टैग किया और लिखा कि ये विश्वविद्यालय है या शादी करवाने की एजेंसी.

 

वैभव नाम के एक यूज़र ने कहा कि अगर यह सच है तो जिसका भी निकाह नहीं हो रहा, वह जामिया प्रशासन से संपर्क कर सकता है. (आर्काइव लिंक)

फैक्ट-चेक

पहली नज़र में ही ये कथित नोटिस संदिग्ध प्रतीत होता है. इसके पीछे कई तकनीकी और तार्किक कारण हैं, जैसे
तारीखों में हेरफेर. नोटिस के ऊपर तारीख 20 फरवरी 2026 लिखा है, जबकि नीचे की ओर डिप्टी रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर के साथ 20 जनवरी 2026 अंकित है.

इसके अलावा, किसी भी आधिकारिक दस्तावेज में इस तरह का विरोधाभास और अलोकतांत्रिक भाषा का प्रयोग नहीं होता. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कोई भी शैक्षणिक संस्थान किसी को जबरन शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकता. यह कानूनी रूप से असंभव और असंवैधानिक है.

रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि शब्दशः ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल पहले पाकिस्तान के बहरिया यूनिवर्सिटी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मॉडर्न लैंग्वेजेज (NUML) के नाम से वायरल एक फ़र्ज़ी नोटिस में हुआ था. बहरिया यूनिवर्सिटी ने भी इसे फ़र्ज़ी बताया है. अगर हम पाकिस्तान में वायरल इन दोनों नोटिसों की बारीकियों पर जाएँ तो इसमें नाम के अलावा, लेटर रेफरेंस नंबर का अंतर है.

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ मॉडर्न लैंग्वेजेज के नोटिस में डाक्यूमेंट नंबर की शुरुआत ML से होती है और बहरिया यूनिवर्सिटी वाले में डाक्यूमेंट नंबर की शुरुआत BU से होती है. वहीं अगर हम जामिया मिलिया इस्लामिया के नाम से वायरल नोटिस को देखें तो उसमें डाक्यूमेंट नंबर की शुरुआत ML से होती है. यानी, जिसने भी इसे बनाया है, उसने पाकिस्तान के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ मॉडर्न लैंग्वेजेज के कथित नोटिफिकेशन से प्रेरणा लेकर इसे बनाया है.

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जामिया मिलिया इस्लामिया का आधिकारिक स्पष्टीकरण

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने 24 फ़रवरी को एक सर्कुलर जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वायरल हो रहा यह नोटिस पूरी तरह फ़र्ज़ी है. विश्वविद्यालय ने पुष्टि की है कि प्रशासन द्वारा ऐसा कोई भी आदेश या अधिसूचना जारी नहीं हुआ है. यह संस्थान की छवि खराब करने के लिए शरारती तत्वों द्वारा किया गया एक दुष्प्रचार है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसको लेकर दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है.

कुल मिलाकर, कई यूज़र्स ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के नाम से एक फ़र्ज़ी नोटिस शेयर किया जिसमें दावा किया गया था कि रमज़ान के महीने में विश्वविद्यालय परिसर में लड़का-लड़की को एक साथ देखने पर प्रशासन तुरंत उनका निकाह (शादी) करा देगा. जामिया ने इसे छवि खराब करने के मकसद से बनाया गया बताया है.

वर्गीकरण करना कठिन
दावा:
जामिया मिलिया इस्लामिया में लड़का-लड़की का एक साथ खड़े दिखे, तो प्रशासन तुरंत उनका निकाह (शादी) करा देगा.

There is insufficient information to make a definitive determination.

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