20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान पैलेट गन से 10 लोगों के घायल होने का खुलासा हुआ है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन के तहत जवाब मांगा था जिसके जवाब में यह खुलासा हुआ है कि 20 जुलाई के दिन कम से कम 10 लोगों का इलाज पैलेट, शॉट्स या प्रोजेक्टाइल (यानी छर्रे/गोली जैसी वस्तु) से लगी चोटों के लिए किया गया था.
Very important
Until now, there were reports of 5 people with pellet gun injuries during the Jantar Mantar protests on 20th July.
However, records procured from hospitals show that the confirmed number is AT LEAST DOUBLE i.e. 10 persons.
The break-up is:
👉 Lady Hardinge… pic.twitter.com/qo8MjDKKjj
— Saket Gokhale (@SaketGokhale) August 10, 2026
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) के जवाब के अनुसार, 20 जुलाई को अस्पताल में 9 मरीज ऐसे पहुंचे थे जिनकी चोटों को “pellet/projectile” injury के तौर पर दर्ज किया गया था, वहीं सफदरजंग अस्पताल ने इसी दिन पैलेट इंजरी के एक मामले में इलाज किए जाने की जानकारी दी. यानी दोनों अस्पतालों के रिकॉर्ड में कम से कम 10 लोगों के मामले में पैलेट इंजरी की खबर सामने आई है.
ये जानकारी तब सामने आ रही है जब दिल्ली पुलिस लगातार 20 जुलाई को की गई कार्रवाई के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से लगातार इनकार कर रही है.
दोनों अस्पतालों के जवाबों को एक्स पर शेयर करते हुए साकेत गोखले ने लिखा, ‘‘भारत की राजधानी के बीचोंबीच निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सरकार और पुलिस अब भी इससे जुड़ी जानकारी छिपा रही हैं. मोदी सरकार ने अब तक पैलेट गन से घायल हुए लोगों की पुष्ट संख्या सार्वजनिक क्यों नहीं की है?’
साकेत गोखले के मुताबिक, AIIMS और राम मनोहर लोहिया अस्पताल से उन्हें अभी जवाब नहीं मिला है, इसलिए उपलब्ध जख़्मी लोगों की संख्या को अंतिम या निश्चित आंकड़ा नहीं कहा जा सकता. यानी संभव है कि दूसरे अस्पतालों के रिकॉर्ड सामने आने पर पैलेट से घायल होने वालों लोगों की संख्या बढ़ सकती है.
साथ ही साकेत गोखले ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को अपने निजी माफिया की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा था?
20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर “संसद चलो” मार्च का आह्वान किया था. इस दौरान जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई और पुलिस कार्रवाई में लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के साथ पैलेट गन चलाए जाने के कि घटनाएं भी सामने आए. ऑलत न्यूज़ ने खुद पीड़ितों से बात की और खुलासा किया कि ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पैलेट गन से प्रदर्शनकारी घायल हुए थे.
पैलेट गन से प्रदर्शनकारियों के घायल होने के आरोप सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने 21 जुलाई को इसका खंडन करते हुए कहा था कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया.
🚨 FAKE NEWS ALERT 🚨
Reports claiming that police forces are using pellet guns against peaceful protesters are completely false and misleading.
The public is strongly advised not to share or circulate unverified content. Please verify facts from official sources before posting…
— Delhi Police (@DelhiPolice) July 21, 2026
बाद में PIB Fact Check ने भी दिल्ली पुलिस के इसी दावे के आधार पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट और दावे को “फेक” बताया था.
जबकि द हिंदू की एक रिपोर्ट में बताया गया कि 22 जुलाई को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के एक जनरल डायरी (GD) में दर्ज जानकारी के मुताबिक, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर के पास हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक पुलिस उपायुक्त (DCP) के आदेश पर 55 गैर-विद्युत गोले (non-electrical shells), 15 विद्युत गोले (electrical shells), 5 आंसू गैस के गोले और दंगा रोधी बंदूक से 2 राउंड का इस्तेमाल किया गया था.
हालांकि, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने PTI के हवाले से बताया कि संबंधित पुलिस अधिकारी ने बाद में कथित तौर पर ये दावा किया कि वो उस स्थान पर मौजूद नहीं थे जहां पैलेट गन चलाए गए थे और घटना स्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर थे. यानी, जनरल डायरी (GD) में दर्ज पुलिस अधिकारी के आदेश और संबंधित अधिकारी द्वारा बाद में किए गए इनकार के बीच अंतर साफ-साफ दिखाई देता है.
Alt News की पड़ताल में क्या सामने आया?
इस विवाद के बीच ऑल्ट न्यूज़ ने 20 जुलाई की घटनाओं की स्वतंत्र जांच की और कम से कम तीन ऐसे लोगों की पहचान की जिन्हें पैलेट गन के चलने से चोटें आई थीं, इनमें 25 वर्षीय इरशाद मंसूरी, 19 वर्षीय साहिल लोचब और Outlook के एक पत्रकार शामिल थे. इसके अलावा एक अन्य संभावित पीड़ित की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी.
जांच के दौरान मिले वीडियो में एक RAF जवान को पंप-एक्शन जैसी बंदूक के साथ देखा गया था.
ऑल्ट न्यूज़ ने पहले ही इस जांच के आधार पर सवाल उठाया था कि अगर किसी सुरक्षा बल ने पैलेट गन नहीं चलाई, तो इरशाद, साहिल और Outlook के पत्रकार के शरीर में पैलेट गन के घाव कैसे आए?
पढ़ें : दिल्ली में संसद मार्च के दौरान पैलेट गन चली थी, एक से ज़्यादा पीड़ितों की पहचान
हालिया रिपोर्ट में द हिंदू ने बताया कि पैलेट से घायल होने वालों में 25 वर्षीय कलाकार प्रशांत कुमार सिंह, 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी, 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब और एक पत्रकार शामिल थे.
इन सबके अलावा, वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पैलेट गन से घायल होने वालों दो पीड़ितों, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर नागरिक सभाओं में भीड़ नियंत्रण के लिए धातु से बनी छर्रे (पैलेट) वाली बंदूकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.
कुल मिलाकर, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल से मिले RTI जवाबों में 20 जुलाई को कम से कम 10 लोगों के pellet/projectile से चोटों के इलाज का रिकॉर्ड सामने आया है. ये रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस के उस दावे पर सवाल जरूर उठाते हैं कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ था.





