कई दशकों से, भारत के टेलीविज़न न्यूज़ इकोसिस्टम में ‘एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल‘ (ANI) का लगभग एकाधिकार रहा है. सैकड़ों करोड़ रुपये के कारोबार वाली ये एजेंसी देश-विदेश के न्यूज़ चैनलों को वीडियो फ़ुटेज और साउंड बाइट्स सप्लाई करती है. इसके रिपोर्टर लगभग हर जगह मौजूद रहते हैं जिससे अक्सर कई मौकों पर ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए ANI ही एकमात्र विज़ुअल्स सोर्स बन जाती है.
फिर भी, 20 जुलाई को जब दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हज़ारों छात्रों पर बेरहमी से कार्रवाई की, तो ANI ने इस पर लगभग चुप्पी साध ली. ANI के आउटपुट के विश्लेषण से पता चलता है कि उस दिन न्यूज़ एजेंसी द्वारा शेयर की गई 404 X पोस्ट में से एक पोस्ट में भी प्रदर्शनकारियों के घायल होने का ज़िक्र नहीं था.
एडिटर-इन-चीफ़ स्मिता प्रकाश के नेतृत्व वाली ANI को लंबे समय से सरकार के नैरेटिव को दोहराने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है. पहले भी उस पर “सरकार के लिए खुले तौर पर प्रोपेगैंडा तैयार करने” का आरोप भी लगता रहा है. देश की राजधानी में छात्रों पर हुए हमले पर एजेंसी की पूरी चुप्पी से इन आलोचनाओं को और बल मिलने की संभावना है.

दिल्ली में 20 जुलाई का दिन
शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर एक महीने से ज़्यादा समय तक लगातार विरोध-प्रदर्शन करने के बाद, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया था.
अधिकारियों ने इसके जवाब में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए. इलाके में धारा 163 लागू कर दी गई जिसके तहत पांच या उससे ज़्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक थी. 5 हज़ार से ज़्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए और संसद के पास के पांच दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए. जब प्रदर्शनकारियों ने पाबंदियों को नज़रअंदाज़ करते हुए संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की तो दिल्ली पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
दोपहर तक, कनॉट प्लेस, पटेल चौक, रायसीना रोड, संसद के बाहर, इंडिया गेट, अशोक रोड और एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर हुई झड़पों के वीडियो सोशल मीडिया पर छा गए.
तस्वीरें चौंकाने वाली थीं: पेलेट (छर्रे) लगने से घायल प्रदर्शनकारी, कीलें लगी लाठियां, आंसू गैस के गोले, कथित तौर पर नाबालिगों के साथ मारपीट और पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना. शाम ढलने तक, मध्य दिल्ली के कुछ हिस्से किसी युद्ध क्षेत्र जैसे लगने लगे थे.
घायलों की संख्या और चोटों की गंभीरता का पता अगली सुबह चला, जब ‘द इंडियन एक्सप्रेस‘ ने रिपोर्ट दी कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में CJP के 100 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों का इलाज किया गया; कई मरीज़ों को टांके लगवाने, टिटनेस का इंजेक्शन लगवाने और घाव पर पट्टी बंधवाने की ज़रूरत पड़ी.
वीडियो के तौर पर बहुत सारे सबूत होने के बावजूद, दिल्ली पुलिस ने ज़रूरत से ज़्यादा बल इस्तेमाल करने की बात से इनकार किया. X पर एक पोस्ट में पुलिस ने दावा किया कि “ऐसी कोई घटना नहीं हुई है” और लोगों से अपील की कि वो “किसी भी अफ़वाह पर यकीन न करें.” ये खंडन तब आया जब फ़ुटेज में सादे कपड़ों में कुछ लोगों को वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ लाठियां चलाते हुए देखा गया; इनमें से कई लोगों ने नेम बैज भी नहीं पहने थे.
20 जुलाई को ANI के ट्वीट्स का विश्लेषण
ऑल्ट न्यूज़ ने 20 जुलाई को सुबह 7 बजे से रात 11 बजकर 59 मिनट के बीच ANI के सभी X पोस्ट का विश्लेषण किया. इस समय-सीमा में किए गए 404 पोस्ट में से 218 (54%) में राष्ट्रीय समाचार, मौसम, अपराध, राजनीति और अन्य मामलों को कवर किया गया था. बाकी 186 (46%) पोस्ट में से 180 का संबंध दिल्ली से था. ये पोस्ट दिल्ली में हो रही घटनाओं पर थे — जैसे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन, छात्रों का मार्च, मॉनसून सत्र की शुरुआत से जुड़ी जानकारी वगैरह. 6 पोस्ट भारत के अन्य हिस्सों में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बारे में थे. पूरा डेटासेट यहां देखा जा सकता है.

दिल्ली से आई 180 न्यूज़ अपडेट्स में से 102 पोस्ट (56.66%) NEET के मुद्दे या विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी थीं. इनमें दिन भर जंतर-मंतर पर हुई हलचल और इस मामले पर संसद में राजनीतिक नेताओं के बयान शामिल थे. बाकी 78 पोस्ट (43.33%) दिल्ली से जुड़ी दूसरी ख़बरों पर थीं — जैसे राम मंदिर दान में चोरी, जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने पर बयान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पनामा के विदेश मंत्री से मुलाकात वगैरह.

NEET और विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी 102 पोस्ट में से 41 में जंतर-मंतर और ‘चलो संसद’ मार्च की घटनाओं की जानकारी दी गई थी, और 67 में राजनीतिक नेताओं के बयान शामिल थे. इनमें से किसी भी पोस्ट में छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस और RAF की कार्रवाई या प्रदर्शनकारियों के घायल होने का ज़िक्र तक नहीं था.

ANI ने क्या रिपोर्ट किया (और क्या नहीं)?
ऊपर दिए गए विश्लेषण से पता चलता है कि ANI ने विरोध-प्रदर्शन से सीधे जुड़े 41 पोस्ट पब्लिश किए. इसकी कवरेज की समीक्षा करने पर एक स्पष्ट पैटर्न सामने आता है.
सुबह की रिपोर्टिंग मुख्य रूप से सुरक्षा इंतज़ामों पर केंद्रित थी: रैपिड एक्शन फ़ोर्स की तैनाती, संसद के पास मेट्रो स्टेशनों को बंद करना, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, सोनम वांगचुक की सेहत के बारे में अपडेट, और उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को कानूनी चुनौती देना जिसमें उन्हें सफ़दरजंग अस्पताल से कहीं और शिफ्ट करने से इनकार कर दिया गया था.
अशांति का पहला संकेत सुबह 10 बजकर 20 मिनट मिला, जब ANI ने रिपोर्ट किया कि प्रदर्शनकारियों की “RPF कर्मियों के साथ झड़प” हुई और पुलिस ने “भीड़ को काबू करने के लिए लाठियों का इस्तेमाल किया.” सुबह 10 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट के बीच, इसने CJP के प्रवक्ता सौरव दास और पुलिस के डिप्टी कमिश्नर के बीच हुई बैठक के बारे में भी रिपोर्ट किया.
लेकिन जैसे-जैसे टकराव बढ़ा — चश्मदीदों, मौके पर मौजूद पत्रकारों और ऑनलाइन वायरल कई वीडियोज़ में बड़े पैमाने पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की बात सामने आई — ANI की कवरेज थम गई. दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 18 मिनट के बीच लगभग डेढ़ घंटे का अंतराल रहा जब सड़कों पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी कोई पोस्ट नहीं की गई. जब एजेंसी ने दोबारा पोस्ट करना शुरू किया तो उसने बस इतना बताया कि प्रदर्शनकारी “बिखर गए” (dispersed), लेकिन उन घटनाओं का कोई ज़िक्र नहीं किया जिनकी वजह से वो बिखरे थे.
इसी दौरान, यानी 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 18 मिनट के बीच, CJP के ऑफ़िशियल X हैंडल ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने के कई वीडियो पोस्ट किए. (यहां, यहां और यहां देखें)
दिन के दौरान, ANI ने दिल्ली पुलिस के दो ‘फ़ैक्ट चेक’ भी प्रमुखता से दिखाए जिनमें उन दावों को खारिज किया गया था कि CJP नेता अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था और 12 साल की एक लड़की व दर्जनों लोगों के साथ मारपीट की गई थी.
जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, ANI की कवरेज का फ़ोकस लगभग पूरी तरह से पुलिसकर्मियों को लगी चोट पर केंद्रित हो गया. दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर, उसने ख़बर दी कि एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गया है. रात 11 बजकर 38 मिनट तक, एजेंसी ने डिटेल आंकड़े जारी किए जिनमें बताया गया कि 118 से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं; साथ ही रैंक-वार ब्योरा भी दिया गया. घायल छात्रों की संख्या का कोई ज़िक्र नहीं था.
During today’s violent protests, more than 118 police personnel from Delhi Police and Central Police Forces, including Special Commissioner, Joint Commissioner, Additional Commissioner, and Deputy Commissioner rank officers deployed on duty, sustained injuries.
Delhi Police… pic.twitter.com/DF5re1OtK2
— ANI (@ANI) July 20, 2026
ANI ने प्रदर्शनकारियों की वजह से हुए कथित नुकसान को दिखाने वाली कम से कम 7 पोस्ट भी पब्लिश कीं. “पुलिस और CJP प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद के हालात” कैप्शन वाली एक पोस्ट में एजेंसी ने पुलिस की क्षतिग्रस्त गाड़ियां और सड़क पर बिखरा मलबा दिखाया. इस दौरान, उसने प्रदर्शनकारियों को लगी चोटों या उन पर किए गए बल प्रयोग का कोई ज़िक्र नहीं किया.
#WATCH | Delhi | Aftermath of the clash between police and CJP protestors; visuals from Hanuman Mandir Road pic.twitter.com/qrrXt3BTFs
— ANI (@ANI) July 20, 2026
ANI की दो पोस्ट में प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस के जवानों पर पत्थर फेंकते हुए दिखाने की कोशिश की गई.
#WATCH | Delhi: Protesters pelt stones at Delhi Police personnel at Feroz Shah Road.#CJPProtest pic.twitter.com/CSCibKGpfT
— ANI (@ANI) July 20, 2026
दिन के दौरान पुलिसकर्मियों के कथित तौर पर पत्थर फेंकने का वीडियो भी वायरल हुआ. लेकिन ANI ने इसे कवर नहीं किया.
Why are the Police pelting stones at protesters? Was the brutal lathi charge not enough?
Shocking visuals coming from Delhi pic.twitter.com/8QF2SyG7gP
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) July 20, 2026
ऑल्ट न्यूज़ समेत कई मीडिया आउटलेट्स ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों ने युवाओं पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया. घायलों में से एक की आंख भी जा सकती है. 28 जुलाई तक, ANI ने 20 जुलाई को पैलेट गन के इस्तेमाल या उससे हुई चोटों के बारे में कोई भी रिपोर्ट नहीं दी. सिवाय विपक्ष के नेताओं के बयानों के. उन्होंने राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को ज़रूर कवर किया जिसमें पैलेट गन का शिकार हुआ एक व्यक्ति मौजूद था. लेकिन उन्होंने प्रोजेक्टाइल एक्शन गन (PAGs) के इस्तेमाल पर कोई भी ओरिजिनल रिपोर्ट नहीं दी.

बहरहाल, ANI ने दोपहर 3 बजे से घायल पुलिसकर्मियों की कई तस्वीरें शेयर कीं.

दिन भर ANI ने संसद से रिपोर्टिंग करने और अलग-अलग मुद्दों पर कई राजनीतिक नेताओं के बयान पोस्ट करने पर ध्यान दिया. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, SP सांसद डिंपल यादव, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा समेत कई नेताओं ने इस विरोध प्रदर्शन के बारे में बात की. उन्होंने सरकार पर असहमति की आवाज़ दबाने का आरोप लगाते हुए इसकी निंदा की.

हेमा मालिनी जैसे बीजेपी सांसदों ने कहा कि किसी भी समस्या पर ठीक से बातचीत होनी चाहिए और “इस तरह विरोध करने से कुछ हासिल नहीं होगा.”
राजधानी के बाहर से भी अपडेट्स आए जिनमें दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर ऊंझा जीरा और सौंफ को GI टैग मिलने की ख़बरें शामिल थीं जिससे “गुजरात की ग्लोबल मसाला पहचान मज़बूत हुई.”
Unjha Cumin and Fennel receive GI Tag, strengthening Gujarat’s global spice identity pic.twitter.com/pMOMA6llQC
— ANI (@ANI) July 20, 2026
दोपहर 12 बजकर 55 मिनट पर, ANI ने ओडिशा के पुरी में सालाना रथ यात्रा के पांचवें दिन भक्तों के इकट्ठा होने के बारे में पोस्ट किया. वो “देवी महालक्ष्मी की शुभ हेरा पंचमी रस्म देखने और श्री गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन के दर्शन करने” के लिए वहां जुटे थे.
#WATCH | Puri, Odisha: Devotees gather on the fifth day of the annual Rath Yatra to witness the auspicious Hera Panchami ritual of Goddess Mahalaxmi and have darshan of Lord Jagannath, Lord Balabhadra, Devi Subhadra and Sudarshan at Sri Gundicha Temple. pic.twitter.com/Tg2XEWdgep
— ANI (@ANI) July 20, 2026
दोपहर 3 बजकर 9 मिनट पर, उन्होंने बिहार सरकार द्वारा ‘सोमनाथ तीर्थ यात्रा योजना’ के तहत ‘सोमनाथ यात्रा’ शुरू किए जाने की ख़बर दी। इसका मकसद “भक्तों के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तीर्थयात्रा को आसान बनाना” था.
#WATCH | Bihar Government launches ‘Somnath Yatra’ under the Somnath Teerth Yatra Scheme. The initiative, spearheaded by the Department of Art, Culture & Youth, aims to facilitate devotees’ pilgrimage to the Somnath Temple in Gujarat.
Bihar Chief Minister Samrat Choudhary will… pic.twitter.com/nwhBAqBtuI
— ANI (@ANI) July 20, 2026
ये पोस्ट तब सामने आईं जब सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई के वीडियोज़ छाए हुए थे. ANI ने इस पर रिपोर्ट करने से को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया.
उस दिन की कवरेज एक बड़ा सवाल खड़ा करती है: एडिटोरियल फ़ैसला कहां खत्म होता है और नैरेटिव बनाने का काम कहां शुरू होता है? चूंकी ये एजेंसी टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ज़्यादातर फ़ुटेज सप्लाई करती है, इसलिए इसकी अनदेखी भी उतनी ही अहम हो सकती है जितनी इसकी रिपोर्टिंग. सालों में हुए सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक के दौरान पुलिस की ज्यादती के आरोपों को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ करके, देश की प्रमुख वीडियो न्यूज़ एजेंसी ने ये तय करने की कोशिश की कि मेनस्ट्रीम के दर्शक क्या देखें और क्या न देखें.





