राईटविंग विचारक और राजनीतिक कमेंटेटर टी.जी. मोहनदास पर तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस ने 29 जुलाई को उनके यूट्यूब वीडियो में दिए गए विवादित बयानों के लिए मामला दर्ज़ किया है.
एक वीडियो में, केरल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इंटेलेक्चुअल सेल के पूर्व ‘कन्वीनर’ मोहनदास ने कहा कि अगर उनके हाथ में कंट्रोल होता, तो वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को “गोली मार देते.” एक दूसरे वीडियो में, उन्होंने कहा कि वामपंथी और सेक्युलर महिलाओं को रेप करवाना पसंद है.
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना-प्रदर्शन चला जिसमें NEET पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की गई. ये प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ.
मोहनदास ने ये टिप्पणियां 26 जुलाई को अपने यूट्यूब चैनल ‘पत्रिका’ पर पोस्ट किए गए 30 मिनट के एक वीडियो में की थीं. उनके चैनल पर अभी भी मौजूद इस वीडियो में विस्तार से बताया गया है कि वो प्रदर्शनकारियों से कितनी हिंसा के साथ निपटते.
मलयालम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “मैं जंतर-मंतर के आसपास लगभग 4 वर्ग किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगा दूंगा. फिर मैं भीड़ को तितर-बितर होने के लिए तीन बार घोषणा करूंगा. उसके बाद, मैं गोली चला दूंगा. लोग इधर-उधर भागेंगे और अपनी जान बचाने के लिए दौड़ेंगे. कुछ की मौत हो सकती है, कुछ विकलांग हो सकते हैं. चार घंटे के भीतर स्थिति शांत हो जाएगी. फिर मैं शवों को इकट्ठा करके अस्पतालों में ले जाऊंगा.”
एक अलग वीडियो में, उन्होंने कहा कि सेक्युलर महिला प्रदर्शनकारियों को रेप का शिकार होना पसंद है, और इस बारे में कोई शिकायत नहीं होगी. क्योंकि ये महिलाएं (खासकर वामपंथी) रेप का शिकार होना पसंद करती हैं. उन्होंने कहा, “गैंगरेप होंगे. इस मामले में कोई शिकायत नहीं होगी क्योंकि ये ऐसे लोग हैं जिन्हें रेप का शिकार होना पसंद है. कुछ महिलाओं को रेप का शिकार होना पसंद है, खासकर वामपंथी, सेक्युलर, लोकतांत्रिक और मज़दूर वर्ग की महिलाओं को. अब अगर इस दौरान किसी की मौत हो जाती है, तो वो उस व्यक्ति को शहीद बना देंगे.”
ऑनलाइन प्लेटफ़ोर्म्स इन वीडियोज़ की कड़ी आलोचना हुई, हालांकि उनके यूट्यूब वीडियो पर कई कमेंट करने वालों ने उनके बयानों का समर्थन भी किया. ऑनलाइन बड़े पैमाने पर हुए विरोध के कारण स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन (AISF) के नेताओं ने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज़ कराईं.
मोहनदास के खिलाफ मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192 और 353(1)(b), इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट की धारा 66, और केरल पुलिस एक्ट की धारा 120(o) लगाई गई हैं. फ़र्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) के अनुसार, ये मामला एक शिकायत के बाद दर्ज़ किया गया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि मोहनदास के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो का मकसद सार्वजनिक शांति को भंग करना और डर व अशांति पैदा करना था.
कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक X हैंडल ने भी 27 जुलाई को एक बयान जारी कर मोहनदास के बयानों की निंदा की. पोस्ट में कहा गया, “मोहनदास का ये घटिया बयान RSS की घिनौनी, हिंसक और महिलाओं के प्रति नफरत भरी सोच का सबूत है, और RSS ने हमेशा ऐसे लोगों को पनाह दी है.” पार्टी ने “ऐसे नफरत फैलाने वाले और कुंठित लोगों” के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की भी मांग की.
‘अगर मेरे पास अधिकार होता तो मैं जंतर-मंतर के आसपास कर्फ्यू लगाकर प्रदर्शनकारियों को गोली मार देता।’
– ये बात RSS नेता और BJP के Intellectual Cell के पूर्व प्रमुख टीजी मोहनदास ने कही है
मोहनदास ने यह भी कहा- ‘प्रोटेस्ट में ऐसी लड़कियां थीं, जिन्हें रेप पसंद है और अगर उनके साथ… pic.twitter.com/NqPqDpqDP4
— Congress (@INCIndia) July 27, 2026
उनके विचार RSS का प्रतिनिधित्व नहीं करते’
RSS ने मोहनदास की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है. 28 जुलाई के एक बयान में, RSS दक्षिण केरल के प्रांत सह-कार्यवाह (संयुक्त प्रांतीय सचिव) के.बी. श्रीकुमार ने कहा कि ये टिप्पणियां मोहनदास के निजी विचार हैं और संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं. साथ ही, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि वो “किसी भी स्तर पर” RSS के पदाधिकारी नहीं हैं.
फ़ेसबुक पर मोहनदास के 2,20,000 से ज़्यादा फ़ॉलोवर्स हैं. 6 जून, 2018 की एक फ़ेसबुक पोस्ट में, जिसमें उन्हें टैग किया गया था, हमने पाया कि उन्हें ‘विराट हिंदुस्तान संगम’ में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था और उन्हें BJP केरल के बौद्धिक सेल का संयोजक बताया गया था.

पिछले कुछ सालों में उन्हें केरल के पूर्व गवर्नर मोहम्मद आरिफ़ खान, रमन पिल्लई, सुब्रमण्यम स्वामी और सुरेश गोपी समेत बीजेपी के कई प्रभावशाली नेताओं के साथ भी देखा गया है.
हमने पाया कि मोहनदास के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है. उन्होंने पहले भी ऐसे बयान दिए हैं. उदाहरण के लिए, 2022 में जब पंजाब में किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी के काफिले को रोका था, तो मोहनदास ने एक फ़ेसबुक वीडियो में कहा था कि अगर किसान आंदोलन के दौरान लाल किले पर झंडे फहराने वाले कुछ लोगों को “गोली मार दी जाती”, तो ये अपमान नहीं होता. उन्होंने मोदी के काफिले को रोकने वाले किसानों को किसान कहने के बजाय “आतंकवादी” भी कहा था.
2024 में, मुंडाक्कई/वायनाड भूस्खलन आपदा के दौरान बचाव कार्य में लगे लोगों के बारे में की गई टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज़ की गई थी. केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के सदस्य रियास मुक्कोलाक्कल ने केरल के पुलिस महानिदेशक (DGP) के पास शिकायत दर्ज़ कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि जब राज्य बचाव कार्यों के लिए एकजुट हुआ था, तब मोहनदास ने नफरत फैलाई और ज़मीन पर काम कर रहे लोगों के काम को कमतर आंका. एक यूट्यूब इंटरव्यू में मोहनदास ने दावा किया था कि बचाव कार्यों में शामिल लोग सिर्फ़ कैमरों के लिए संगठन की ब्रांडेड टी-शर्ट पहनकर घूम रहे थे और सुरक्षित जगहों से तस्वीरें ले रहे थे, जबकि वो कभी भी उन ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों में नहीं गए जहां काम करने का वो दावा कर रहे थे.





