सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़ को एक घर पर पत्थरबाज़ी और तोड़फोड़ करते हुए देखा जा सकता है. साथ ही एक महिला बच्चे के साथ खड़ी है और हाथ में तलवार लिए खुद का बचाव करती नज़र आ रही है.

वायरल वीडियो को शेयर करते हुए राइट विंग इन्फ्लुएंसर रिनिति चटर्जी ने लिखा कि माँ काली की सच्ची भक्त बांग्लादेश की यह हिंदू महिला है, जिसने अकेले ही एक इस्लामी भीड़ का सामना किया. साथ ही ये भी दावा किया कि ये भीड़ उस महिला पर धर्म-परिवर्तन करने का दबाव डाल रही थी, जब उसने मना कर दिया, तो उन्होंने उस पर हमला कर दिया. (आर्काइव लिंक)

अक्सर गलत जानकारी सांप्रदायिक एंगल के साथ शेयर करने वाले भाजपा समर्थक जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया कि बांग्लादेश में, मुसलमानों ने एक हिंदू महिला पर हमला किया. उस हिंदू महिला ने तलवार से बहादुरी के साथ उनका मुकाबला किया. (आर्काइव लिंक)

फ़ैक्ट-चेक

वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें बांग्लादेशी न्यूज़ वेबसाइट ‘देशकाल न्यूज‘ द्वारा 25 मार्च को पब्लिश्ड एक रिपोर्ट मिली. इस रिपोर्ट के अनुसार, ये पूरी घटना चोरी के आरोपों से जुड़ी है. बांग्लादेश के सुनामगंज ज़िले के छताक उपजिला में मवेशी चोरी के आरोप में एक उत्तेजित भीड़ ने कई घरों पर हमला कर तोड़फोड़ की. यह घटना दक्षिण कुर्शी गांव में हुई, जहां चोरी की बार-बार हो रही घटनाओं से नाराज़ लगभग सौ से अधिक लोगों ने आरोपी तारेक मिया और अली हुसैन के घरों को निशाना बनाया. इस हिंसक हमले के दौरान न केवल घरों और घरेलू सामान को नुकसान पहुँचाया गया, बल्कि घर में मौजूद महिलाओं और बच्चों के साथ भी मारपीट की गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि आरोपियों को पहले भी ग्राम परिषद द्वारा चेतावनी दी गई थी, लेकिन हाल ही में एक चोरी की गाय पकड़े जाने के बाद भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा.

इसी प्रकार हमें एक और बांग्लादेशी न्यूज़ वेबसाइट ‘अजकेर सिलहट‘ का 25 मार्च को पब्लिश्ड एक आर्टिकल मिला. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सुनामगंज के छताक में गाय चोरी के आरोप में भीड़ ने एक घर में तोड़फोड़ और हमला कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कुर्शी गांव के लोगों ने सैफुर रहमान नामक युवक को चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ा, जिसने पूछताछ में अली हुसैन और उसके दामाद तारेक मिया सहित चार अन्य लोगों की संलिप्तता का खुलासा किया. इसके बाद स्थानीय बाज़ार में हुई एक बैठक के बाद उत्तेजित भीड़ ने दक्षिण कुर्शी गांव स्थित आरोपियों के घरों पर हमला कर दिया और वहां जमकर तोड़फोड़ की. पुलिस के मुताबिक, आरोपी अली हुसैन और तारेक मिया के खिलाफ पहले से भी चोरी के कई मामले दर्ज हैं और इसी आक्रोश के चलते ग्रामीणों ने इस हिंसक घटना को अंज़ाम दिया.

कुल मिलाकर वायरल वीडियो में भीड़ ने चोरी की वारदातों को लेकर हमला किया था, इसमें कोई धर्मांतरण का मामला नहीं था. वीडियो में दिख रही महिला उन्हीं आरोपियों के परिवार से जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं जो भीड़ से अपना बचाव कर रही थी. इस पूरी घटना में कहीं भी कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं पाया गया है और ना ही रिपोर्ट्स में इस बात का कहीं भी ज़िक्र है.

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