उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में भाजपा नेता की शिकायत पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने एक प्राथमिक विद्यालय के हेड मास्टर जान मोहम्मद को निलंबित कर दिया. भाजपा के बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने 30 जनवरी को बेसिक शिक्षा अधिकारी को शिकायत कर जान मोहम्मद पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया कि शिक्षक स्कूल का ‘इस्लामीकरण’ कर रहे हैं, बच्चों को डरा-धमका कर नमाज़ पढ़वाते हैं और उन्हें हिंदू धर्म के विरुद्ध भड़काते हैं. साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया कि स्कूल में राष्ट्रगान नहीं होने दिया जाता.

बिना किसी जांच या साक्ष्यों के निलंबन

शिकायत मिलने के महज 24 घंटे के भीतर, बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने इन आरोपों को ‘गंभीर प्रवृत्ति’ का मानते हुए 31 जनवरी को किसी भी प्रारंभिक जांच या साक्ष्यों के सत्यापन के बिना जान मोहम्मद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. दैनिक भास्कर को दिए एक बयान में बीएसए ने कहा, “स्कूल में बच्चों को नमाज़ पढ़वाने की शिकायत मिली थी. खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से रिपोर्ट मांगी थी. प्रथम दृष्टया में हेडमास्टर को दोषी पाया गया. उन्हें सस्पेंड कर प्राथमिक विद्यालय नगला हुमायूं, मांट में सम्बद्ध किया गया है. बीईओ छाता और मांट को विस्तृत जांच करने के लिए आदेश दिए गए हैं. रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी.”

हालांकि, बीएसए ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि अभी तक उनके पास इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई वीडियो या फोटो साक्ष्य नहीं है. जब मीडिया ने उनके इस फैसले को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने इस निलंबन को महज एक ‘अंतरिम निर्णय’ करार देते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है. जांच समिति की रिपोर्ट आने पर इसपर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

स्कूल में 8 में से 7 स्टाफ़ हिन्दू

दैनिक भास्कर ने जब इस मामले की ज़मीनी हकीक़त जानने के लिए मीडिया की टीमें स्कूल पहुंची तो वहां की तस्वीर भाजपा नेता के दावों से बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली निकली. दैनिक भास्कर ने अपने ग्राउंड रिपोर्ट में बताया कि स्कूल में पढ़ने वाले 235 छात्रों में से 89 मुस्लिम छात्र हैं, बाँकी हिन्दू हैं. स्कूल में कार्यरत 8 स्टाफ में से 7 हिंदू हैं, जो इस विवाद के बाद, आरोपों को खारिज करते हुए हेड मास्टर जान मोहम्मद के समर्थन में खड़े हैं.

स्कूल के बच्चों ने आरोपों को सिरे से किया खारिज

मीडिया से बात करते हुए स्कूल के बच्चों ने कहा कि जान मोहम्मद ने उन्हें कुछ गलत नहीं पढ़ाया. यहाँ हिन्दू-मुस्लिम जैसी कोई बात नहीं होती, इसके अलावा स्कूल में राष्ट्रगान भी रोज होता है. बच्चों ने कहा कि उन्होंने जान मोहम्मद को यह कहते हुए कभी नहीं सुना कि हिन्दू धर्म गलत है. स्कूल के बच्चों ने मीडिया के सामने राष्ट्रगान गाकर भी सुनाया.

क्या है स्थानीय लोगों का कहना?

स्कूल के महज़ कुछ दूरी पर रहने वाले प्रवीण ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनके 2 बेटे इसी स्कूल में पढ़ते हैं और वह रोज अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने आते हैं. यहाँ रोज राष्ट्रगान भी होता है और क्लास भी होती है. उन्होंने इस मामले को महज राजनीतिक बताया. स्कूल के पास रहने वाली पूजा बताती है, “मेरे बच्चे यहीं से पढे हैं, सर ने ही पढ़ाया है, जिसकी वजह से वे हमेशा प्रथम व दूसरा स्थान लाए हैं.” उन्होंने बताया कि जान मोहम्मद बच्चों के लिए ‘भगवान’ हैं, उन्हें फँसाया जा रहा है. गाँव के किसान इंद्रपाल ने निलंबित हेड मास्टर के बारे में बात करते हुए बताया कि वह हिन्दू-मुस्लिम नहीं करते, उनके बेटा-बेटी बीएससी कर रहे हैं, दोनों इसी स्कूल से पढे हुए हैं. हेड मास्टर का व्यवहार बहुत अच्छा है. 26 जनवरी को स्कूल के कैंपस में गाँव वालों को बुलाया जाता है, राष्ट्रगान भी होता है और बूंदी भी बांटी जाती है. गाँव के ही रहने वाले संजय पांडे कहते हैं, “मेरा घर स्कूल के पास में ही है, मेरे दो भतीजे यहाँ पढ़ते हैं, मैं उन्हें छोड़ने आता हूँ, यहाँ रोज राष्ट्रगान होता है.”

संजय ने इसे राजनीतिक मामला बताते हुए कहा, “शिकायत करने वाले इस कस्बे के नहीं हैं, वे बाहर से आकार गाँव का माहौल खराब कर रहे हैं, इस स्कूल में CCTV कैमरा लगा हुआ है, हर हरकत की निगरानी होती है, यहाँ नमाज़ कैसे पढ़वाया जा सकता है?” गाँव के रहने वाले राजन कहते हैं कि स्कूल में बाउंड्री वाल नहीं है, आने-जाने वाले लोग देख सकते हैं कि वहाँ क्या हो रहा है, उन्होंने किसी को नमाज़ पढ़ते हुए नहीं देखा. राजन बताते हैं कि हेड मास्टर जान मोहम्मद इस स्कूल का बाउंड्री वाल करवाने का प्रयास कर रहे थे, स्कूल के बगल वाली जमीन को लेकर कुछ विवाद चल रहा है, जिसकी वजह से वो लोग वहाँ बाउंड्री बनने नहीं दे रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई कि जो लोग बाउंड्री नहीं होने देना चाहते हैं, उन्हीं लोगों ने पास के गाँव से लोगों को बुलाकर शिकायत करवा दिया होगा.

हेड मास्टर के समर्थन में आए स्कूल के शिक्षक

स्कूल की शिक्षिका कामना अग्रवाल और सहायक अध्यापिका लक्ष्मी ने मीडिया को दिए बयानों में हेडमास्टर का समर्थन किया. 2014 से स्कूल में तैनात शिक्षिका कामना अग्रवाल ने बताया कि जान मोहम्मद ने कभी किसी के साथ धार्मिक भेदभाव नहीं किया और वे स्कूल में पढ़ाने से लेकर सामाजिक कार्य में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. अध्यापिका लक्ष्मी ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वहाँ SIR प्रक्रिया को लेकर भी विवाद हुआ था. उन्होंने बताया कि वह SIR प्रक्रिया में लगी थी, उनके पास ज्यादातर वोटर मुस्लिम समुदाय के हैं. कुछ लोग आए थे और फॉर्म-7 के तहत आपत्ति लगाने को कहा, उन्होंने अधिकारियों से पूछा तो अधिकारियों ने बताया कि अधिकतम 10 फॉर्म दिए जा सकते हैं. इसके बाद शिक्षिका ने उन्हें 10 फॉर्म ले जाने को कहा. इसके बाद स्कूल को लेकर ये आरोप और हेड मास्टर के निलंबन की खबर आई.

SIR में मुस्लिम वोट काटने को लेकर विवाद

जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जान मोहम्मद नौहझील क्षेत्र के दस बूथों के सुपरवाइजर हैं. पहले उनके क्षेत्र के एब्सेंट, शिफ्टेड व मृतक मतदाता की सूची को सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर किया गया कि जान-बूझकर इसमें हिन्दू वोट काटे गए हैं. इसके बाद एक राजनीतिक पार्टी के अधिकारियों ने उन पर मुस्लिम मतदाताओं के वोट काटने के लिए लगभग 100 ‘फॉर्म-7’ जमा करने का दबाव बनाया. उन्होंने बताया कि दबाव में आकर उन्होंने 36 फॉर्म जमा कर लिए, बाकी फॉर्म उन्हें लौटा दिए क्योंकि तहसील में एक दिन में 10 फार्म-7 ही लेने के आदेश थे. उन्होंने बताया कि इसके बाद ही उनको लेकर शिकायत हो गई, जबकि वह शिकायतकर्ता भाजपा मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान को जानते भी नहीं हैं.

ग्रामीणों और अभिभावकों ने हेड मास्टर के समर्थन में डीएम को सौंपा ज्ञापन

हेड मास्टर जान मोहम्मद के निलंबन के बाद, दर्जनों अभिभावक और ग्रामीण ने सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक षड्यन्त्र बताते हुए 3 फरवरी को डीएम चंद्र प्रकाश सिंह को ज्ञापन सौंप निष्पक्ष जांच और हेड मास्टर की तत्काल बहाली की मांग की. ग्रामीणों ने कहा कि बिना किसी प्रमाण के ऐसा आरोप लगाना गलत है, उन्होंने जिलाधिकारी से षड्यन्त्र करने वालों के खिलाफ कारवाई की मांग की.

बेशिक शिक्षा अधिकारी ने जांच की समय सीमा में किया संशोधन

जन आक्रोश को बढ़ता देख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 3 फ़रवरी को गठित जांच समिति से तीन दिन के अंदर जांच रिपोर्ट मांगा. पहले बीसए द्वारा जांच कमिटी को एक महीने का समय दिया गया था. 3 फरवरी को जारी किये गए नए आदेश में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मथुरा ने लिखा है कि उक्त प्रकरण की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जांच प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करना आवश्यक है, इसलिए जांच के लिए पूर्व-निर्धारित समय सीमा में संशोधन करते हुए तीन दिन के भीतर तथ्यात्मक जांच आख्या प्रस्तुत करें.

मामले की जांच करने स्कूल पहुंची टीम

खंड शिक्षा अधिकारी छाता और खंड शिक्षा अधिकारी माट की संयुक्त जांच समिति मामले की जांच के लिए 4 फरवरी को नौहझील प्राथमिक विद्यालय पहुंची, वहाँ उन्होंने विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों, शिक्षकों आईऊर अभिभावकों का बयान दर्ज करवाया. मीडिया से बात करते हुए जांच समिति के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने सभी बिंदुओं पर मामले की जांच की, शिक्षाओं का लिखित बयान भी दर्ज किया, प्रथम दृष्ट्या में लगाए गए आरोप में सच्चाई नहीं लगती है, उन्होंने कहा कि जांच के संबंध में फैक्चुअल रिपोर्ट अधिकारी को सौंप देंगे.

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जांच में आरोप झूठा पाया गया

बीएसए मथुरा, रतन कीर्ति ने 6 फरवरी को एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए हेड मास्टर जान मोहम्मद को सवेतन बहाल कर दिया. जारी किये गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 4 फरवरी को जान कमिटी विद्यालय में भौतिक रूप से उपस्थित जांच संपादित की, जिसमें जान मोहम्मद पर लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं पाए गए. इसलिए आरोप सिद्ध नहीं होने और उनके खिलाफ शिकायत झूठी और असत्य पाए जाने के आधार पर जान मोहम्मद को निलंबन की तारीख से सवेतन बहाल कर दिया गया.

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