ईरान पर 28 फ़रवरी से शुरू हुए अमेरिकी-इज़रायल के संयुक्त हमलों में कथित तौर पर भारी संख्या में नागरिकों की मौत हुई है. इसमें दक्षिणी ईरान के मिनाब में शजरेह तैयबेह स्कूल पर भयावह हमला भी शामिल है. ईरानी राज्य मीडिया ने बताया कि बमबारी में कम से कम 168 लोग मारे गए, जिनमें से ज़्यादातर स्कूली बच्चे थे, लगभग 100 अन्य घायल भी हुए.
द गार्डीअन की एक रिपोर्ट में विनाश की एक तस्वीर दिखाई की गई है: “साइट से ली गई तस्वीरें और वेरिफ़ाईड वीडियो…बच्चों के शव आंशिक रूप से मलबे के नीचे दबे हुए हैं. एक वीडियो में एक बहुत छोटे बच्चे का कटा हुआ हाथ मलबे से निकाला गया है.” यूनेस्को ने बमबारी की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का “गंभीर उल्लंघन” बताया.
इस संदर्भ में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई यूज़र्स ने एक हवाई तस्वीर पोस्ट की, जिसमें सामूहिक दफन की कार्यवाही दिखाई दे रही है, जिसमें बूलडोज़र द्वारा कब्रें खोदी जा रही हैं.
श्रीनेत ने लिखा कि यूएस-इजरायल बमबारी में मारी गईं स्कूली छात्राओं को दफनाने के लिए कब्रें खोदी जा रही हैं.
Devastating
165 graves being dug for the girls killed by US-Israel bombing on their school
This was done by US-Israel in the name of empowering women
📷 Iran Foreign Minister pic.twitter.com/Y8SfXjndIk
— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) March 3, 2026
भाजपा समर्थक इन्फ्लुएंसर और सुप्रीम कोर्ट के वकील शशांक शेखर झा (@shashank_ssj) ने तुरंत इस पोस्ट की निंदा की और दावा किया कि सुप्रिया श्रीनेत द्वारा इस्तेमाल की गई सामूहिक कब्र की एक पुरानी तस्वीर थी जिसमें कोविड-ग्रस्त इंडोनेशिया दिख रहा था. (आर्काइव)
This picture is of Indonesia during Covid 🤷🏽♂️ https://t.co/ekIc5FxK6m
— Shashank Shekhar Jha (@shashank_ssj) March 3, 2026
इस आर्टिकल के लिखे जाने तक, शशांक झा के पोस्ट को 6 लाख से ज़्यादा बार देखा और 3 हज़ार से ज़्यादा बार रिशेयर किया गया है जिसमें फ़ोटो के ईरान में शूट किए जाने के दावों को खारिज करने की कोशिश की गई थी.
4 मार्च को शशांक शेखर झा ने फिर से उसी कब्रिस्तान को दिखाने वाली एक और तस्वीर का ‘फ़ैक्ट-चेक’ किया, इस बार पत्रकार राजदीप सरदेसाई की एक X पोस्ट का जवाब दिया. (आर्काइव)
This picture is of Indonesia during Covid 🤷🏽♂️ https://t.co/nTKnKEesug
— Shashank Shekhar Jha (@shashank_ssj) March 4, 2026
फ़ैक्ट-चेक
सुप्रिया श्रीनेत द्वारा शेयर की गई तस्वीर का रिवर्स इमेज सर्च करने पर, हमें यह ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा 3 मार्च को अपलोड की गई एक X पोस्ट पर मिली. पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि मिनाब के एक प्राथमिक विद्यालय में “यूएस-इजरायल बमबारी में मारी गईं 160 से ज़्यादा निर्दोष युवा लड़कियों” के लिए कब्रें खोदी जा रही थीं.
These are graves being dug for more than 160 innocent young girls who were killed in the US-Israeli bombing of a primary school. Their bodies were torn to shreds.
This is how “rescue” promised by Mr. Trump looks in reality.
From Gaza to Minab, innocents murdered in cold blood. pic.twitter.com/cRdJ3BELOn
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) March 2, 2026
इस तस्वीर का इस्तेमाल NDTV, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे, डेक्कन हेरल्ड और अन्य द्वारा पब्लिश रिपोर्ट्स में भी किया गया था.
हमने ये भी पाया कि रॉयटर्स ने 2 मार्च, 2026 को ईरानी विदेशी मीडिया विभाग/पश्चिम एशियाई न्यूज़ एजेंसी को क्रेडिट देते हुए अपनी ऑफ़िशियल वेबसाइट पर तस्वीर शेयर की थी. कैप्शन में कहा गया है, “2 मार्च, 2026 को ईरान के मिनाब में एक स्कूल पर कथित हमले के बाद पीड़ितों के लिए कब्रें तैयार की जा रही हैं.”

आगे जांच करने पर हमने पाया कि भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के दूतावास के ऑफ़िशियल X हैंडल ने मिनाब में कब्रिस्तान की चार तस्वीरें शेयर की थीं.
Images of the burial ceremony of martyred students in #Minab, Iran, following the attacks carried out by the criminal regimes of America and Israel. pic.twitter.com/fggmyLoPqp
— Iran in India (@Iran_in_India) March 3, 2026
हमने उस जगह का जियोलोकेट भी किया और स्वतंत्र रूप से ये स्थापित किया कि ये ईरान में मिनाब कब्रिस्तान को दिखाता है. नीचे गूगल से कब्रिस्तान की एक तस्वीर और ईरानी दूतावास के ऑफ़िशियल हैंडल से एक X पोस्ट की तुलना की गई है.

ध्यान दें कि राजदीप सरदेसाई ने जो तस्वीर शेयर की थी वो दूतावास द्वारा पोस्ट की गई चार तस्वीरों में से एक थी.
कुल मिलाकर, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और पत्रकार राजदीप सरदेसाई द्वारा ईरान में स्कूली बच्चों को सामूहिक रूप से दफनाने की तस्वीरें शेयर की गईं, जो असली हैं. भाजपा-समर्थक हैंडल शशांक शेखर झा का ‘फैक्ट-चेक’ ग़लत है.
ऑल्ट न्यूज़ ने पहले भी कई बार शशांक शेखर झा के झूठे और भ्रामक दावों का सच बताया है. पाठक इन स्टोरीज को यहां देख सकते हैं.
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