सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें दो गुटों के बीच सड़क पर झड़प दिखाई दे रही है. वीडियो में लाल झंडे लिए हुए एक रैली सड़क के एक किनारे से गुज़र रही रही होती है, तभी दूसरी तरफ स्कूटी सवार दो युवक हरा झंडा लहराते हुए उन्हें कथित तौर पर चिढ़ाने की कोशिश करते हैं. कुछ ही देर बाद, रैली में शामिल लोग युवकों पर हमला कर देते हैं और मौके पर मौजूद सुरक्षा बल स्थिति को संभालते नज़र आते हैं. इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि रामनवमी के अवसर पर हिंदुओं की शोभायात्रा के दौरान मुस्लिम युवकों ने धार्मिक झंडा दिखाकर उकसाने की कोशिश की, जिसके बाद उनकी पिटाई कर दी गई.

सोशल मीडिया पर अक्सर गलत जानकारी फैलाते हुए पाए जाने वाले यूज़र ओसियन जैन ने वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि कि श्रीराम नवमी की रैली निकल रही थी, तभी कुछ मुस्लिम युवक आ गए, पहले रामभक्तों ने इग्नोर किया लेकिन जब वे नारेबाज़ी करने लगे तो उनकी तबीयत से पिटाई कर दी. (आर्काइव लिंक)

दीपक शर्मा नाम के यूज़र ने वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि हिन्दुओं की शोभायात्रा के दौरान एक मुस्लिम युवक उकसाने के उद्देश्य से हरा झंडा लेकर धार्मिक नारे लगाने लगा, जिसके बाद शोभायात्रा में शामिल लोगों ने उसकी पिटाई कर दी. (आर्काइव लिंक)

भाजपा समर्थक जनार्दन मिश्रा ने ये वीडियो को सांप्रदायिक एंगल देते हुए शेयर किया और लिखा कि हिन्दुओं की शोभायात्रा के दौरान एक जिहादी उकसाने के उद्देश्य से हरा झंडा लेकर धार्मिक नारे चिल्लाने लगा, फिर लोगों ने उनकी पिटाई कर दी. (आर्काइव लिंक)

फ़ैक्ट-चेक

वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए जब हमने वीडियो के फ्रेम्स को गौर से देखा तो कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए जो वायरल दावे को पूरी तरह से खारिज करते हैं. वीडियो में दिखाई दे रहे लाल झंडों पर मार्क्सवादी क्रांतिकारी ‘चे ग्वेरा’ की तस्वीर साफ देखी जा सकती है. इसके अलावा, रैली में शामिल लोगों के हाथों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के झंडे भी नजर आ रहे हैं.

दूसरी ओर, स्कूटी सवार युवक के पास जो हरा झंडा है, वह केरल की एक राज्य स्तरीय पार्टी ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (IUML) का है, न कि कोई सामान्य धार्मिक झंडा.

जब हमने वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया, तो हमें ये वीडियो चार महीने पहले एक यूजर द्वारा रेडिट पर पोस्ट किया हुआ मिला. उस पोस्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि यह झड़प केरल में वामपंथी कैडरों और मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं के बीच हुई थी.

वीडियो में दिख रही दुकानों और इमारतों के आधार पर गूगल मैप्स की मदद से हमने उस स्थान की पहचान की, जो केरल के कासरगोड जिले का कान्हनगड नगरपालिका क्षेत्र है.

मामले की ज़मीनी हकीकत जानने के लिए हमने घटनास्थल के पास स्थित एक स्थानीय दुकानदार से संपर्क किया. दुकानदार ने बताया कि ये वीडियो लगभग तीन महीने पुराना है और उस समय वहां स्थानीय नगरपालिका चुनाव का माहौल था. यह घटना दो राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प की थी, जिसे वहां तैनात सुरक्षा बलों ने तुरंत शांत करा दिया था. इस घटना का हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिकता या रामनवमी की शोभायात्रा से कोई लेना-देना नहीं है.

कुल मिलाकर, कई राइट-विंग इन्फ्लूएंसर ने केरल में हुए एक राजनीतिक झड़प के पुराने वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर गलत दावे के साथ शेयर किया.

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