एक TV न्यूज़ डिबेट में पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने मोहम्मद पैगंबर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके बाद 28 जून को राजस्थान के उदयपुर में दो मुस्लिम लोगों ने कन्हैया लाल साहू नाम के एक दर्जी की हत्या कर दी थी. दोनों हमलावरों ने इस बर्बर घटना को अपने फ़ोन में रिकॉर्ड किया और बाद में इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. आरोपियों ने इसे नूपुर शर्मा के बयान का ‘बदला’ बताया.

इस घटना के बाद पूरे देश में तनावपूर्ण स्थिति है. इन सब के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल है. वीडियो में कुछ लोगों को मुस्लिम पहनावे में दिख रहे एक बूढ़े व्यक्ति से पूछताछ करते हुए देखा जा सकता है. वीडियो में लोग उस बुजुर्ग व्यक्ति पर अपनी पहचान बताने के लिए दबाव डाल रहे हैं. साथ ही लोग उसे अपनी पहचान साबित करने के लिए गवाह पेश करने के लिए भी कहते हैं. हालांकि, बुज़ुर्ग व्यक्ति एक शब्द भी बोलने से इनकार करता है और चुप रहता है. वहीं स्थानीय लोग घटनास्थल पर बुलाए गए पुलिस अधिकारियों से बात करते दिख रहे हैं.

ये वीडियो इस दावे के साथ वायरल है कि बुज़ुर्ग व्यक्ति कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा है और जयपुर में मुस्लिम बनकर दंगा भड़काने की तैयारी कर रहा था. उस व्यक्ति ने कुर्ता-पायजामा पहना हुआ है और साथ ही दाढ़ी रखी है.

ट्विटर यूज़र @Mainbhichanakya ने ये वीडियो इस दावे के साथ ट्वीट किया कि ये जयपुर के ज़ुबैदा मस्जिद का वीडियो है.

‘The CJ Werleman Show’ के ट्विटर अकाउंट ने भी इसी तरह के दावों के साथ ये वीडियो शेयर किया.

इसी तरह ‘द मुस्लिम न्यूज़’ नाम के एक ट्विटर अकाउंट ने भी ये वीडियो ट्वीट किया. कुछ यूज़र्स ने ये वीडियो शेयर करते हुए इसे एक साजिश कहा. और लिखा कि हो सकता है कन्हैया लाल की हत्या करने वाले दोनों मुस्लिम व्यक्ति के भी RSS से संबंध हों. ठीक उसी तरह जैसे वायरल क्लिप में दिख रहे शख्स का बताया जा रहा है.

ध्यान दें कि ऐसे समय में जब देश में धार्मिक तनाव बढ़ गया है तब इस तरह के दावे आग में घी डालने का काम करते हैं. ऐसे दावों से हिंसा और भड़क सकती है. सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले अनवेरीफ़ाईड दावों को सच समझने में सावधानी बरतनी चाहिए.

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने सबसे पहले हिंदी में की-वर्ड्स सर्च किया. हमें इसी दावे के साथ शेयर किये गए इस वीडियो का पुराना उदाहरण मिला. ये वीडियो 14 जून को ट्वीट किया गया था. इसका मतलब है कि ये मामला दर्जी कन्हैया लाल की हत्या से पहले का है.

हमने एक स्थानीय पत्रकार से संपर्क किया जिन्होंने बताया कि ये घटना असल में जयपुर की ज़ुबैदा मस्जिद में ही हुई थी. हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए दावों को खारिज किया. और बताया कि ग़लतफहमी की वजह से लोग उस व्यक्ति से भिड़ गए थे. पत्रकार ने हमें घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों से संपर्क करने में मदद की. उन्होंने स्थानीय पुलिस से भी हमारा संपर्क कराया.

ज़ुबैदा मस्जिद के सचिव मोहम्मद सलीम (55 साल) के मुताबिक, उन्होंने और तीन अन्य लोगों ने ही इस व्यक्ति से बात की थी. वे उस व्यक्ति की पहचान को लेकर चिंतित थे क्योंकि वो अक्सर अलग-अलग वजहों से चंदा मांगने उस क्षेत्र में आता रहता था. मोहम्मद सलीम ने कहा, “ये आदमी एक दो बार इस इलाके में आ चुका है. हर बार जब ये आता है, तो लोगों से अलग-अलग वजहों से चंदा देने के लिए कहता है. कभी मस्जिद के लिए चंदा मांगता है, कभी मदरसे के लिए और कभी वो अपनी बेटी के लिए. इसलिए हमें उस पर शक हुआ था.”

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं मस्जिद के मुख्य मौलाना और दो अन्य बुजुर्ग, इस व्यक्ति के पास पहुंचे और उसकी पहचान जानने के लिए उससे बात करने की कोशिश की, तो वो गुस्से में आ गया और मुझे कोसने लगा. कहने लगा कि मैंने उसके ईमान (विश्वास) पर सवाल उठाने की हिम्मत कैसे की. उसने मुझ पर हमला भी किया. उसकी तेज़ आवाज़ सुनकर सभी लोग मस्जिद के अंदर जमा हो गए और घटना को रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया. मैं उससे उसकी पहचान के बारे में पूछता रहा लेकिन वो सहयोग नहीं कर रहा था. ये करीब डेढ़ घंटे से ज़्यादा समय तक चला और लोगों की संख्या बढ़ने लगी. उसने हमें कुछ डिटेल बताई जिन्हें हमने तुरंत वेरीफ़ाई किया तो सब झूठे निकले. अंत में हमने उसे पुलिस को सौंप दिया और उन्हें पता चला कि वो टोंक शहर का रहने वाला है.

मोहम्मद सलीम ने बताया, “जब हम उसे पुलिस थाने ले गए तो उसने पुलिस का सहयोग करते हुए बताया कि उसने 10-15 साल पहले इस्लाम धर्म अपना लिया था. पुलिस ने उसकी पत्नी को बुलाया. वो बुर्का पहनकर थाने आई और हमसे शिकायत वापस लेने की गुहार लगायी. हमने शिकायत वापस ले ली. अब, मुझे नहीं पता कि उसके RSS से संबंध हैं या नहीं, पुलिस ने हमें ये नहीं बताया.”

ऑल्ट न्यूज़ ने गलता गेट थाने के SHO मुकेश खरदिया से संपर्क किया. SHO मुकेश के मुताबिक, घटना 14 जून को हुई थी. उन्होंने हमें बताया, “सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा पूरी तरह से ग़लत है. हमने पूरे मामले की जांच की और उसके परिवार का पता भी लगाया. वायरल वीडियो में दिख रहे शख्स का नाम मोहम्मद उमर है. उन्होंने कई साल पहले धर्म परिवर्तन किया था. उन्होंने साजिदा नाम की महिला से शादी की और बाद में उन्होंने धर्म परिवर्तन किया. लोगों को शक हुआ क्योंकि उसने अपनी पहचान बताने में सहयोग नहीं किया, लोगों ने ये जांच भी की कि उसका खतना हुआ था या नहीं. जो कि नहीं हुआ था क्योंकि उसने अपना धर्म बाद में बदला था. उसके चार बच्चे भी हैं- अब्दुल्ला मोहिन, साबिर, तनीज़ और फातिमा.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर उसके RSS से संबंध होने के आरोप हैं, तो मस्जिद कमेटी को इसका सबूत देने दें क्योंकि हमें ऐसे लिंक नहीं मिले. हमने IPC की धारा 151 के तहत स्वत: संज्ञान लिया और अगले दिन उमर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. मजिस्ट्रेट ने उन्हें सावधान रहने और कम से कम अगले 6 महीनों तक इस तरह की गड़बड़ी न करने का आदेश दिया.

ऑल्ट न्यूज़ ने मोहम्मद उमर की पत्नी साजिदा के एक रिश्तेदार से बात की. नाम न जारी करने की शर्त पर उसने बताया कि मोहम्मद उमर इस बात से नाराज़ था कि लोगों को उस पर शक हो रहा है. उन्होंने कई साल पहले धर्म परिवर्तन किया था और उसे ये बहुत अपमानजनक लगा कि लोगों ने उनके विश्वास पर सवाल उठाया.

कुल मिलाकर, स्थानीय लोगों द्वारा शक होने की वजह से एक दशक से भी पहले अपना धर्म बदल कर इस्लाम अपनाने वाले एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को कथित रूप से परेशान किया गया. उसने अपनी पहचान बताने में सहयोग नहीं किया और कथित तौर पर एक स्थानीय पर हमला भी किया जिससे चीजें बिगड़ गईं. ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये साबित हो कि ये व्यक्ति RSS से जुड़ा था या दंगा भड़काने के लिए वहां गया था.

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