घायल महिला और पुरुष की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि कर्नाटका में मुसलमानों ने जैन मुनि को मारा और कांग्रेस ज़िंदाबाद के नारे लगाए.

पूरा मेसेज कुछ इस तरह है – [कर्नाटक में जैन मुनि को मुसलमानों ने मारा कहा कांग्रेस जिन्दाबाद के लगाये नारे अब कांग्रेस अपने असली रूप में आ गई कांग्रेस को वोट देने वाले हिन्दुओं इसी तरह का प्यार तुम्हें कांग्रेस देती रहेगी । इस फोटो को ईतना भेजो की कल तक नरेंद्र मोदी जी और योगी जी के पास पहुंच जाऐ। आज मौका मिला है कुछ पुण्ये का काम करने का। कोई मुसलमान ही होगा जो इस वीडियो को शेयर नहीं करेगा आप सभी को भगवान की कसम।]

ऑल्ट न्यूज़ को इन दावों की पड़ताल के लिए कुछ रिक्वेस्ट मिलीं हैं.

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पुरानी तस्वीरें, ग़लत दावा

पहली तस्वीर

जिस तस्वीर में व्यक्ति के हाथ में चोट लगी है वो दरअसल 2018 में कर्नाटका चुनाव के समय भी शेयर की जा रही थी. इसे शेयर करते हुए लिखा गया था, “बहुत ही दुखद समाचार, कल कर्नाटक में कुछ मुस्लिम युवकों ने एक जैन मुनि पर हमला किया….सिद्धारमैया के कर्नाटका में कोई भी सुरक्षित नहीं है.”

फ़र्ज़ी न्यूज़ वेबसाइट पोस्टकार्ड न्यूज़ के संस्थापक महेश विक्रम हेगड़े और अक्सर ग़लत जानकारी फैलाने वाले गौरव प्रधान के ट्विटर टाइमलाइन पे भी इसी तरह के दावे देखे गए.

इस पोस्ट को फ़ेसबुक पर शेयर करने वाले पहले व्यक्ति का नाम दीपक शेट्टी है, जिसके पोस्ट को 6000 से अधिक बार शेयर किया गया.

इसे पोस्टकार्ड न्यूज़ के फेसबुक पेज से भी शेयर किया गया.

ऑल्ट न्यूज़ ने पता लगाया कि मुस्लिम युवाओं ने हमला नहीं किया था. जैन मुनि मयंक सागर के साथ छोटी सी दुर्घटना हुई थी, बाइक से ठोकर लगने के कारण उनके कंधे पर चोट लगी थी. ये घटना मार्च 2018 में कनकपुरा, कर्नाटका में हुए थी और उस समय उनके चोट से ठीक होने की खबर रिपोर्ट की गयी थी.

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ये समाचार जैन पब्लिकेशन की अहिंसा क्रांति ने रिपोर्ट की थी, इस प्रकाशन के संपादक ने ऑल्ट न्यूज़ से बात कर अपने वेबसाइट पर इस खबर की पुष्टि की और इस घटना में मुस्लिम ऐंगल होने के दावे को नकार दिया. जैन मुनि मयंक सागर 4 फरवरी को महामस्तकअभिषेक के लिए श्रवणबेलगोला, कर्नाटका गए थे. ये घटना श्रवणबेलगोला से वापस जाते समय हुई. अहिंसा क्रांति ने इसकी सूचना 13 मार्च 2018 को दी.

दूसरी तस्वीर

ऑल्ट न्यूज़ ने रिवर्स इमेज सर्च किया और पता चला कि 9 सितबंर 2017 को रॉयल बुलेटिन नाम की एक न्यूज़ वेबसाइट पर यह खबर छपी थी, जिसमें एक आदमी के सिर से काफी खून बह रहा था. इस रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरप्रदेश के मुज़फ्फ़रनगर ज़िले के भोपा गांव में पत्नी के साथ विवाद में एक व्यक्ति घायल हुआ था. इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि पुलिस ने इसे पति-पत्नी का विवाद बताकर कार्रवाई करने से मना कर दिया था. रॉयल बुलिटेन के संपादक ने SMHoaxSlayer से बातचीत में बताया कि ये तस्वीर न्यूज़ पेपर से जुड़े एक पत्रकार ने लिया था. EXIF डेटा को सत्यापित करने वाली एक वेबसाइट वेरेजिफ से पता चला कि ये फ़ोटो निकोन कूलपिक्स ए10 कैमरे से ली गई है. सोशल मीडिया EXIF डेटा (मेटाडेटा) को मिटा देती है. इससे यह पता चलता है कि वेबसाइट पर पोस्ट की गई फोटो असली है.

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तीसरी तस्वीर

गुगल रिवर्स इमेज सर्च दिखाता है कि ये तस्वीर बहुत सारे संदर्भ में इंटरनेट पर शेयर हुई है. ये फ़ोटो रमेश राजाराम नाम के एक गूगल प्लस एकाउंट होल्डर ने शेयर की थी. इससे पता चलता है कि 2 अप्रैल 2018 को विभिन्न संदर्भों में शेयर की गयी तस्वीर का उस घटना से कोई ताल्लुक नहीं है जिसका दावा किया जा रहा है कि हाल में हुआ है.

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इसके अलावा ये तस्वीर एक ट्विटर पोस्ट में भी शेयर की गयी थी जिसमें बताया गया था कि छात्रों पर पुलिस फ़ोर्स ने लाठियां चलाई थी.

ऑल्ट न्यूज़ तीसरी तस्वीर के बारे में और ज़्यादा पता करने में असमर्थ रहा लेकिन ये कम-से-कम 3 साल पुरानी है. बाकी की 2 तस्वीरें भी अलग-अलग घटनाओं की हैं. इसलिए इन तस्वीरों के साथ कर्नाटका में मुस्लिमों द्वारा जैन मुनि को पीटने का दावा ग़लत साबित होता है.

ग़लत

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