संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम 6 मार्च को घोषित होते ही एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई. एक ही रैंक और एक ही रोल नंबर पर दो अलग-अलग उम्मीदवारों ने अपना दावा ठोक दिया. ‘रैंक 301’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक चर्चा का विषय बन गया. शुरुआती खबरों में बताया गया कि बिहार के प्रतिबंधित संगठन रणवीर सेना के पूर्व प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह ने यह सफलता हासिल की है. आरा की रहने वाली इस आकांक्षा ने मीडिया में इंटरव्यू देकर अपनी इस उपलब्धि को अपने दिवंगत दादा के सपनों की जीत बताया, जिसके बाद उन्हें बधाइयां मिलने का सिलसिला शुरू हो गया.
विवाद की शुरुआत तब हुई जब उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली और वर्तमान में एम्स (AIIMS) पटना में कार्यरत डॉक्टर आकांक्षा सिंह ने इस दावे को चुनौती दी. डॉ. आकांक्षा ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि 301वीं रैंक पर चयनित उम्मीदवार वो खुद हैं और आरा वाली आकांक्षा सिंह उनके नाम तथा रोल नंबर का गलत इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने प्रमाण के तौर पर अपना पर्सनैलिटी टेस्ट (इंटरव्यू) का ई-समन लेटर सार्वजनिक किया, जबकि आरा की आकांक्षा अपने दावे के समर्थन में प्रारंभिक परीक्षा का एडमिट कार्ड दिखा रही थीं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब दोनों उम्मीदवारों के दस्तावेजों की डिजिटल जांच की गई, तो सच्चाई पूरी तरह साफ हो गई. दोनों पक्ष एक ही रोल नंबर (0856794) पेश कर रहे थे, लेकिन जब दस्तावेजों पर मौजूद क्यूआर (QR) कोड को स्कैन किया गया, तो बड़ा फ़र्ज़ीवाड़ा सामने आया. गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह के दस्तावेजों को स्कैन करने पर यूपीएससी के आधिकारिक डेटाबेस से वही रोल नंबर और नाम प्रदर्शित हुआ जो सफल उम्मीदवारों की अंतिम सूची में दर्ज था. इससे यह पुष्ट हो गया कि डॉ. आकांक्षा ही वास्तविक सफल उम्मीदवार हैं.
वहीं दूसरी ओर, आरा की आकांक्षा सिंह द्वारा पेश किए गए प्रवेश पत्र की पोल खुल गई. उनके एडमिट कार्ड पर ऊपर की ओर तो रोल नंबर 0856794 लिखा था, लेकिन जैसे ही उसके क्यूआर कोड को स्कैन किया गया, डिजिटल डेटा में एक पूरी तरह से अलग रोल नंबर (0856569) दिखाई दिया. इस विसंगति ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रवेश पत्र के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई थी और मूल रोल नंबर को बदलकर सफल उम्मीदवार के रोल नंबर से रिप्लेस कर दिया गया था.
मामले को तूल पकड़ता देख अंततः यूपीएससी ने एक क्लैरिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में एक ही नाम के दो कैंडिडेट्स यानी आकांक्षा सिंह के बारे में दावा किया जा रहा है कि सिविल सर्विसेज़ एग्जामिनेशन, 2025 के फ़ाइनल रिज़ल्ट में दोनों को एक ही रैंक 301 मिली है. “इस बारे में, यह साफ किया जाता है कि कमीशन के रिकॉर्ड के अनुसार, सिविल सर्विसेज़ एग्जामिनेशन (मेन्स), 2025 के फाइनल रिजल्ट में रैंक 301 पाने वाले सफल कैंडिडेट का नाम आकांक्षा सिंह, पुत्री – रंजीत सिंह, नीलम सिंह है, जो ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश की निवासी हैं.”
CIVIL SERVICES (MAIN) EXAMINATION, 2025
The final result of the #CivilServicesExamination, 2025 has been declared on 06.03.2026. There are various media reports, wherein two candidates of same name i.e. Akanksha Singh, are claiming to have secured the same Rank 301 in the final… pic.twitter.com/4zEJS8ijh1
— PIB India (@PIB_India) March 9, 2026
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सभी अफवाहों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि 301वीं रैंक पर गाज़ीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ही चयनित हुई हैं. ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती द्वारा किया गया दावा न केवल निराधार बल्कि फ़र्ज़ी पाया गया है.
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