दिल्ली के उत्तम नगर ईस्ट के जेजे कॉलोनी की तंग गालियां फिलहाल पुलिस के बैरिकेड्स से भरी हैं. मुख्य बाज़ार के पास दंगा-रोधी गाड़ियाँ तैनात हैं. लगभग हर मोड़ पर, वर्दीधारी चौकन्ने, सतर्क पुलिसकर्मी मौजूद हैं. इस इलाके के हिसाब से पुलिस की मौजूदगी कुछ ज़्यादा ही है; जबकि यह इलाका आम तौर पर रोज़मर्रा की चहल-पहल का आदी है.

ईद से पहले वहां तनावपूर्ण खामोशी छाई हुई है. ऊपर से सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन अंदर ही अंदर कुछ बेचैनी, शायद किसी अनहोनी का डर, अभी भी बना हुआ है. दुकानें खुली हैं, कामकाज भी चल रहा है, लेकिन लोगों की बातचीत में सावधानी झलकती है और अक्सर बातें बीच में ही रुककर खामोशी में बदल जाती हैं.

ऑल्ट न्यूज़ ने 17 मार्च, 2025 को जब उत्तम नगर के जेजे कॉलोनी का दौरा किया, तो अराजकता नहीं लेकिन आशंका का माहौल पूरी तरह दिख रहा था. चप्पे-चप्पे पर लगी पुलिस की बैरिकेडिंग साफ बता रही थी कि होली के दिन 26 साल के तरुण कुमार की हत्या का मामला अभी भी चर्चा का मुख्य विषय है. यहां के माहौल में एक अजीब सी अनिश्चितता थी, जिसे स्थानीय लोग महसूस तो कर रहे थे लेकिन खुलकर बोलने से कतरा रहे थे. हिंसा की असली वजह अभी भी विवादित है. एक तरफ सांप्रदायिक तनाव की आशंका जताई जा रही है, तो दूसरी तरफ पुलिस ने दो समुदायों के दो परिवारों के बीच पुराने विवादों के बारे में बयान दिए हैं. हालांकि, अब यह मामला एक अलग और खतरनाक रूप ले चुका है.

फ़ोटो: अभिषेक कुमार

एक सैलून के भीतर अपने पोते के बाल कटवा रहे एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति से हमने बात की. उनकी बातों में एक सधी हुई सावधानी दिखी. उन्होंने मौजूदा स्थिति को ठीक बताते हुए कहा कि पुलिस की मुस्तैदी की वजह से ईद में शांति बनी रहने की उम्मीद है. उनके अनुसार, वहां के हिंदुओं और मुस्लिम समुदाय के लोगों का बीच कोई दुश्मनी नहीं है, सबलोग शांति से रह रहे हैं.

लेकिन यह बाहरी शांति कहानी का केवल एक हिस्सा बयान करती है.

एक प्रवासी कामगार ने बेबाकी से बोलते हुए एक अलग ही हक़ीकत बयान की. उन्होंने बताया, “दहशत का आलम यह है कि जो लोग जा सकते थे, वे ईद से बहुत पहले ही अपने गांवों को लौट चुके हैं. पर वे लोग क्या करें जिन्होंने अपना पुश्तैनी ठिकाना बेचकर यहाँ की तंग गलियों में अपनी पूरी जिंदगी बसा ली है? उनके पास अब कहीं और जाने का रास्ता ही नहीं बचा है. यहाँ रुकना ही उनकी मजबूरी है.”

उस कामगार ने बताया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही यह धमकी हर घर की बेचैनी बन चुकी है. “ईद पर खून की होली खेली जाएगी” ये नफरत के ये मैसेज इंटरनेट के जरिए इलाके के हर कोने और हर मोबाइल तक पहुंच चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों के मन में एक गहरा डर बैठ गया है.”

इसी इलाके में मौजूद एक दुकानदार ने हमें बताया, “कुछ दिन पहले ही यहीं पास के मैदान में (उत्तम नगर में) हिंदू विराट आक्रोश सभा के नाम पर भीड़ इक्कठा हुई थी और सभी लोग मुसलमानों को गालियां दे रहे थे. जब से यह विवाद हुआ यहाँ थाने के पास भीड़ आती है और न्याय प्रदर्शन के नाम पर केवल राजनीति करते हैं.”

“हम जैसे छोटे दुकानदार, जो रोज कमाते हैं और वही खाते हैं, उनका जीना हराम कर रहे हैं.”

कई मायनों में, सड़कें विरोधाभास दिखाती हैं: आवाजाही तो है, पर नॉर्मल नहीं; व्यवस्था तो है, पर शांति नहीं.

गलियों में पुलिस की गश्त जारी है. बैरिकेड मज़बूती से अपनी जगह पर लगे हुए हैं. उत्तम नगर आगे बढ़ रहा है इस उम्मीद के साथ कि ईद बिना किसी घटना के गुज़र जाएगी.

उत्तम नगर की हर गालियां मानो थम सी गईं हों | फ़ोटो: पवन कुमार

भड़काऊ बयान, हिंसा का आह्वान और मनगढ़ंत शत्रुता

हालांकि, ज़मीनी हालात तनावपूर्ण होने के बावजूद नियंत्रण में हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट की बाढ़ सी आ गई है.

ईद से तुरंत पहले ऑनलाइन कई वीडियोज़ और पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें खुले तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और इस त्योहार में बाधा डालने का आह्वान किया जा रहा है. खुद को हिंदू हितों का प्रतिनिधि करने वाले मुसलमानों को खुलेआम धमकियां देते हुए दिख रहे हैं. इनमें ईद की नमाज़ रोकने से लेकर हिंसक वारदातों को अंज़ाम देने तक की बातें शामिल हैं.

हिंदू रक्षा दल के सदस्य ललित शर्मा ने खून से होली खेलने की बात कहते हुए कहा, “इस साल न तो ईद मनेगी और न ही ईद में नमाज़ होगी, ना रोज़े पढ़ने देंगे और इस बार ख़ून की होली ज़रूर खेलनी पड़े पर इस बार ईद में होली जरूर खेलेंगे.”

एक वीडियो में एक व्यक्ति धमकी भरे बयान देते हुए मुसलमानों को सीधे तौर पर चेतावनी देता है, सनातनियों का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक उन 25 मुसलमानों (शायद इस मामले में आरोपी व्यक्तियों का ज़िक्र करते हुए) को ज़िंदा जला नहीं दिया जाता या एनकाउंटर में मार नहीं दिया जाता.” वो आगे कहता है, “ये लास्ट संदेश पहुंचाना चाहूंगा मैं मुसलमानों के लिए, हम तुम्हारे मुंह से ‘जय श्री राम’ ना बुलवा दिया ना हमारा नाम इंद्र नहीं है. इनके घर के आगे सुअर काट के फेंक देंगे. फिर देखेंगे क्या करोगे तुम और क्या फाड़ पाओगे हमारा तब.”

 

एक और वीडियो में कुछ लोग हिंसक बयान देते हुए कह रहे हैं कि अगर सरकार हमें छूट दे, तो हम उन्हें मरवा देंगे. इन्होंने (मुसलमानों ने) हमारी होली खराब की, हम इनके त्योहार (ईद) खराब करेंगे.

सोशल मीडिया में ऐसे सैकड़ों वीडियो वायरल हैं जिनमें उत्तम नगर के विवाद को लेकर देश के मुसलमानों को निशाना बनाने और उन पर हिंसा करने के लिए उकसाने वाले बयान व त्योहारों को ना मनाने देने जैसी बातें मौजूद हैं.

ऐसे ही एक वीडियो में एक हिंदू व्यक्ति हिंसा की बाते कहते हुए कह रहा है, “पुलिस प्रशासन परमिशन देकर कह दे कि गेट खुला है. 15 मिनट नहीं बस 5 मिनट ही चाहिए सनातनियों को, क्योंकि हम ‘जय श्री राम’, ‘हर हर महादेव’ का माला जपना जानते हैं तो भाला चलाना भी जानते है.”

कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने उत्तम नगर को लेकर भड़काऊ पोस्ट किया और उसे आगे बढ़ाया. ऐसा करने वालों में पूर्व आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित द्वारा संचालित ‘द जयपुर डायलॉगस्’ भी शामिल है. एक पोस्ट में लिखा है, “उत्तम नगर में इस बार ईद के दिन होली मानेगी, हिन्दू को होली नहीं मनाने दी गई तो हिन्दू ईद कैसे मनाने दे सकता है?”

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उत्तम नगर में बढ़े सांप्रदायिक तनाव और सोशल मीडिया पर “ख़ून की होली ईद पे खेलेंगे” जैसे धमकी भरे हिंसक बयान को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी. जिसे न्यायालय ने 18 मार्च को सूचीबद्ध किया था. हालांकि, 18 मार्च को इस मामले की सुनवाई नहीं हो पायी.

नागरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए गठित संगठन (एपीसीआर) द्वारा दायर याचिका में आगामी ईद के दौरान हिंसा की धमकियों को लेकर चिंता जताते हुए एपीसीआर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष यह बात रखते हुए कहा, “ईद पर हिंसा की व्यापक धमकियां मिल रही हैं. सोशल मीडिया पर सभाएं आयोजित की जा रही हैं जिनमें कहा जा रहा है, ‘खून की होली हम ईद पर खेलेंगे’. हमने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. हमें ईद के दौरान और उसके आसपास गंभीर हिंसा का डर है. हम पुलिस को तत्काल निर्देश देने की मांग करते हैं. कृपया इस तरह की धमकियों पर ध्यान दें,”

दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 मार्च को निर्देश दिया कि ईद के मौके पर हिंसा की आशंका को देखते हुए उत्तम नगर इलाके में पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम किए जाएं. साथ ही, यह भी निर्देश दिया कि रामनवमी के त्योहार तक पुलिस सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जाए. इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को होनी तय हुई है.

इस तरह के भड़काऊ बयानों का मिला-जुला असर बहुत गहरा होता है. यह किसी स्थानीय, निजी झगड़े को एक राष्ट्रीय, सांप्रदायिक कहानी में बदल देता है, जिसे तथ्यों से नहीं, बल्कि गुस्से, अटकलों और जान-बूझकर की गई उकसावेबाज़ी से हवा मिलती रहती है.

अभी उत्तम नगर भारी पुलिस पहरे में है, लेकिन असली जंग का मैदान यह डिजिटल दुनिया बन गया है, जो लोगों की सोच को गढ़ रही है, डर को बढ़ा रही है, और संभवतः, किसी टकराव के लिए ज़मीन तैयार कर रही है.

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