वाराणसी में नाव पर इफ़्तार मामले के शिकायतकर्ता ने 23 मार्च को ऑल्ट न्यूज़ के साथ बातचीत में ऐसी गोल-मोल प्रतिक्रियाओं की एक सीरिज पेश की, जो उस मामले से जुड़ी विसंगतियों को स्पष्ट रूप से दिखाती हैं. वाराणसी में 14 मुस्लिम पुरुषों को नाव पर अन्य खाद्य पदार्थों के साथ बिरयानी से इफ़्तार तोड़ने के लिए गिरफ़्तार किया गया था.
विवाद तब शुरू हुआ जब नाव पर रमज़ान का रोज़ा तोड़ते लोगों का वीडियो वायरल हो गया. भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) वाराणसी के अध्यक्ष रजत जयसवाल ने 16 मार्च को एक शिकायतदर्ज की, जिसमें नदी में मांसाहारी भोजन का सेवन करने और उसमें अपशिष्ट प्रवाहित करके धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया था. बाद में पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, सार्वजनिक उपद्रव और पानी को प्रदूषित करने सहित कई आरोपों के तहत 14 लोगों को गिरफ़्तार किया. कुछ दिनों बाद, और ज़्यादा गंभीर आरोप (जिनमें जबरन वसूली भी शामिल है) जोड़े गए, जिससे कानूनी दांव काफी बढ़ गए.
जब ऑल्ट न्यूज़ ने रजत जयसवाल से संपर्क किया तो बातचीत से ही खुलासा हो गया.
सबसे पहले, रजत जयसवाल ने हमारे संवाददाता से पूछा कि क्या वो हिंदू है. इसके बाद तीखे सवालों और टालमटोल वाली प्रतिक्रियाओं की एक सीरिज शुरू हुई:
रजत जयसवाल ने दावा किया, ”हमारी मां गंगा में इतनी गहरी आस्था है कि वहां नॉनवेज खाना भी घोर पाप है.” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन को पूरे सबूत सौंपे गए थे और “उसी आधार पर FIR दर्ज की गई थी.”

जब उनसे विशेष रूप से उनके इस आरोप के बारे में पूछा गया कि अपशिष्ट (नॉन-वेज भोजन) को नदी में फेंक दिया गया था, तो उन्होंने कहा, “उन्होंने खाया और फिर अपने हाथ धोकर कचरा फेंक दिया.”
जब पूछा गया कि उन्हें ये कैसे पता है, तो उन्होंने जवाब दिया, “सब पता है.”
ये पूछे जाने पर कि उन्हें कचरा फेंके जाने के बारे में कैसे पता था, रजत जयसवाल ने पहले कहा, “मैंने इसे खुद देखा.” जब उनसे पूछा गया कि अगर वो नाव पर मौजूद नहीं थे तो उन्होंने इसे कैसे देखा. उन्होंने ये कहते हुए बात टाल दी कि लोगों ने गवाहियां दी थीं.
ये पूछे जाने पर कि लोगों ने उनके साथ गवाहों के डिटेल क्यों शेयर किए थे, रजत जयसवाल ने कहा कि वे उनके साथ नहीं, बल्कि प्रशासन के साथ शेयर किए गए थे. उन्होंने कहा, “प्रशासन से बात करें, वे बेहतर तरीके से समझाएंगे.”
फिर उन्हें कचरा वाले हिस्से के बारे में कैसे पता चला? ऑल्ट न्यूज़ ने उनसे दोबारा पूछा. क्या उन्होंने इसे खुद देखा या किसी वीडियो में? रजत जयसवाल ने स्पष्टीकरण देने से इनकार करते हुए कहा, “आओ मुझसे मिलो, मैं आपको दिखाऊंगा.”
उनसे उनका स्थान पूछा गया, उन्होंने जवाब दिया, “मैं वाराणसी में रहता हूं,” जिसके बाद कॉल खत्म हो गई.
विशेष रूप से, उनकी बातें लगातार बदलती दिखीं. अपने वीडियो बयान में रजत जयसवाल ने दावा किया था कि गंगा में हड्डियां फेंकी जा रही हैं. ऑल्ट न्यूज़ के साथ उनकी बातचीत में, सबसे पहले नदी में “हाथ धोने” की बात की. इसके अलावा, दो अलग-अलग दावे, जिनमें से कोई भी ऑल्ट न्यूज़ द्वारा समीक्षा किए गए मौजूद वीडियो में साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं है. बाद में वो “हाथ धोने” के दावे से भी दूर जाते हुए दिखाई दिए, और “अपशिष्ट पदार्थ” के आरोप पर पलटवार करते हुए, सिर्फ इस बारे में अस्पष्ट दावे पेश किए कि उन्हें कैसे पता था कि नाव पर क्या हुआ था. ध्यान दें कि “मांसाहारी भोजन को नदी में बहाए जाने” का ये दावा FIR का मूल हिस्सा है.
घटना: वायरल वीडियो, FIR, गिरफ़्तारियां और बढ़ते आरोप
15 मार्च को, चौदह युवक – आज़ाद अली, आमिर कैकी, दानिश सैफी, मोहम्मद अहमद, नेहाल अफ़रीदी, महफूज आलम, मो. अनस, मो. अव्वल, मो. तहसीम, मो. अहमद उर्फ राजा, मो. नूर इस्माइल, मो. तौसीफ़ अहमद, मो. फैज़ान, और मो. समीर को एक नाव पर कथित तौर पर चिकन बिरयानी खाकर अपना रमज़ान महीने का उपवास तोड़ते देखा गया.
इसका वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद, रजत जयसवाल ने एक शिकायत दर्ज की जिसमें आरोप लगाया गया कि लोगों ने गंगा पर मांसाहारी भोजन किया, नदी में कचरा बहाया और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई.
एक वीडियो बयान में उन्होंने आगे दावा किया कि समूह ने बिंदु माधव धरारा मंदिर को “आलमगीर मस्जिद” के रूप में संदर्भित किया था. गौरतलब है कि आलमगीर मस्जिद मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, जिसके बीच में धरहरा मस्जिद स्थित है.
उन्होंने कहा, “मंदिर को आलमगीर मस्जिद बताई गई… वीडियो में साफ दिख रहा है कि वो नॉनवेज खा रहे हैं है और हड्डियां गंगा में फेंकी जा रही हैं. इस तरह की चीजें हम सनातन धर्म के लोगों को एकदम बर्दाश्त नहीं है.”
हालांकि, ऑल्ट न्यूज़ ने वायरल वीडियो की समीक्षा की और नदी में कचरा फेंके जाने का कोई सबूत नहीं पाया.
अभियुक्त के खिलाफ़ शुरूआती आरोप हैं:
- धारा 298 BNS – किसी धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को अपवित्र करना
- धारा 299 BNS – धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य
- धारा 196(1)(B) BNS – धार्मिक आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना
- धारा 270 बीएनएस – सार्वजनिक उपद्रव
- धारा 279 BNS – सार्वजनिक झरने या जलाशय के पानी को गंदा करना
- धारा 223(B) BNS – एक लोक सेवक द्वारा आदेश की अवज्ञा
- धारा 24, जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974
इसके बाद, दो और गंभीर आरोप जोड़े गए:
- धारा 308(5) BNS – मौत या गंभीर चोट की धमकी के तहत जबरन वसूली
- धारा 67, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम – अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना (वायरल वीडियो से जुड़ा हुआ)
इन सब के साथ, संभावित सज़ा में काफी बढ़ोतरी हुई – जबरन वसूली के आरोप के कारण अधिकतम लगभग 6 साल (जल अधिनियम के तहत) से लेकर 10 साल तक.

वाराणसी की एक अदालत ने 23 मार्च को आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया. उन्हें 19 मार्च को 1 अप्रैल तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उन्हें रिमांड पर लेते हुए, एडिशनल चीफ़ जुडिशल मजिस्ट्रेट अमित कुमार यादव ने कहा: “केस डायरी और अन्य पुलिस डाक्यूमेंट्स के आधार पर, आरोपी व्यक्तियों की रिमांड देने के लिए इस स्तर पर पर्याप्त आधार हैं… न्यायिक हिरासत… उचित और स्वीकार्य पाई गई है.”
शिकायतकर्ता के वकीलों ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर संवेदनशील स्थल पर धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने का काम किया है. मीडिया के सामने आकर उनमें से एक नित्यानंद राय ने कहा कि मामले में एक ‘महत्वपूर्ण मोड़’ तब आया जब ये पाया गया कि नाव को नाविकों की इच्छा के विरुद्ध जबरन ले जाया गया था.
Varanasi, Uttar Pradesh: On the arrest of 14 youths in Varanasi for dumping non-vegetarian food into the Ganga during an Iftar party on a boat, Advocate Nityanand Rai says, ”The turning point in the case was the boatmen, as we had mentioned earlier. The statements of Ranjan… pic.twitter.com/JUHjv7rN9G
— IANS (@ians_india) March 19, 2026
20 मार्च को, रजत जयसवाल ने अपनी जान को लगातार खतरा बताते हुए वाराणसी के सिगरा पुलिस स्टेशन में एक और FIR दर्ज कराई. ख़बरों के मुताबिक, BJYM वाराणसी इकाई प्रमुख ने शिकायत की कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं क्योंकि वो मुस्लिम बहुल इलाके में रहते हैं.
नाव मालिक का लेखा: जबरन वसूली का नैरेटिव
जबरन वसूली के आरोपों जुड़ने से गंभीर सवाल उठते हैं, खासकर जब नाव मालिक के परिवार के खाते के साथ जांच की जाती है.
नाव के मालिक काशी साहनी (65 साल) ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 15 मार्च को, नाजू यादव (40 साल) नामक एक स्थानीय निवासी (जो कई बार उनका ग्राहक रह चुका था) ने शाम 5 बजे के आसपास अपनी मोटरबोट किराए पर लेने के लिए उनसे संपर्क किया, जिसमें लगभग 30 लोग बैठ सकते थे. साहनी की बेटी नैना, जो बातचीत के दौरान मौजूद थी, के अनुसार शुरुआत में प्रति व्यक्ति किराया 100 रुपये बताया गया, लेकिन आख़िरकार किराया एकमुश्त 1800 रुपये पर तय हुआ.
नैना ने कहा कि यात्री बर्तन ले जा रहे थे और ये असामान्य बात नहीं है. यात्रा के दौरान, साहनी का बेटा अनिल भी अतिरिक्त ईंधन देने के लिए नाव पर चढ़ गया, जब नाजू यादव ने काशी साहनी को फ़ोन करके सूचित किया कि नाव में ईंधन कम हो गया है. अनिल को कुछ भी असामान्य नहीं लगा.
नाव 45 मिनट के भीतर वापस कर दी गई, और नाजू यादव ने चाबियां वापस सौंप दीं. परिवार ने कहा कि सब कुछ सामान्य लग रहा था और उन्हें विवाद के बारे में दो दिन बाद पता चला जब पुलिस ने काशी साहनी को पूछताछ के लिए बुलाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस अभी भी नाजू यादव की तलाश कर रही है.
संक्षेप में, एक नियमित ग्राहक ने नाव किराए पर ली, कीमत पर बातचीत की, एक छोटी यात्रा पूरी की, चाबियां लौटा दीं, और बिना किसी दिक्कत, जबरदस्ती या गड़बड़ी के चला गया.
इससे प्रमुख सवाल उठते हैं: कथित जबरन वसूली और धमकियां कब हुईं?
ये ध्यान देने वाली बात है कि शिकायतकर्ता के वकील का मीडिया को दिया गया बयान – कि नाव मालिक की इच्छा के बिना ली गई थी – सीधे तौर पर इंडियन एक्सप्रेस को दी गई परिवार की गवाही से विरोधाभासी है.
जब ऑल्ट न्यूज़ ने नैना साहनी से संपर्क किया, तो उन्होंने आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया: “जो होना था हो गया है, जाने दीजिए. उसके बारे में बात नहीं करनी है.”
जैसा कि स्थिति है, आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं – मामले के प्रमुख तत्वों के अस्पष्ट होने के बावजूद जबरन वसूली भी शामिल है. इस बीच, अपने वीडियो बयान में जयसवाल की समापन टिप्पणियाँ व्यापक संदर्भ को रेखांकित करती हैं:
“लोगों को ये नहीं भूलना चाहिए कि प्रदेश में योगी जी की सरकार है और देश में नरेंद्र मोदी जी की सरकार है तो इस तरह का कृत्य इन मुस्लिम युवकों को यहां पर नहीं करना चाहिए था.”
उनका बयान, मामले में बदलते दावों और बढ़ते आरोपों की तरह, गंगा पर इफ़्तार के एक वायरल वीडियो के साथ शुरू हुए मामले में सबूत, इरादे और कानून के इस्तेमाल के बारे में गंभीर सवाल उठाता है.
ऑल्ट न्यूज़ ने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और दो ACP को कई बार कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. जवाब मिलने पर इस आर्टिकल को अपडेट किया जाएगा.
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