इंडिया टुडे ग्रुप के प्रमुख हिंदी समाचार चैनल ‘आज तक’ के एक लाइव बुलेटिन के दौरान चैनल की वरिष्ठ एंकर अंजना ओम कश्यप ने एक एक ब्रेकिंग न्यूज़ देते हुए कहा, “ईरान के आतंकियों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास के अंदर 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया है.” ये ख़बर व्हाइट हाउस की एक प्रेस ब्रीफिंग का गलत इंटरप्रेटेशन था. दरअसल, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट किसी 45 साल पुराने ‘ईरान होस्टेज क्राइसिस’ का संदर्भ दे रहीं थी. लेकिन अंजना ने उसे ब्रेकिंग न्यूज़ समझकर सनसनीखेज खबर के रूप में पेश कर दिया.
दरअसल, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे दशकों पुराने तनाव और हालिया संघर्षों पर अपनी बात रख रही थीं. लेविट ने ईरानी शासन की कट्टरता को रेखांकित करने के लिए इतिहास का हवाला दिया. उन्होंने कहा, “1979 से, आतंकवादी ईरानी सरकार ने जानबूझकर अमेरिकियों की हत्याओं में मदद की है. वे ‘अमेरिका को मौत दो’ के नारे लगाते हैं और दूसरे कट्टरपंथी आतंकवादियों को फंड देते हैं जो हमारे देश पर हमला करते हैं और पश्चिमी सभ्यता को ही खत्म करना चाहते हैं. इन आतंकवादियों ने हमारी एम्बेसी पर कब्ज़ा कर लिया और तेहरान में 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया.” अंजना ओम कश्यप ने इसे हाल की घटना समझ लिया और लाइव शो में इसे हाल की खबर बता दिया.
हालांकि, बुलेटिन के दौरान मौजूद आज तक के पत्रकार प्रणय उपाध्याय ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए बताया कि कैरोलिन लेविट ने 1979 की एक घटना का ज़िक्र था जिसके बाद से तेहरान में अमेरिका का कोई दूतावास ही नहीं है.
अंजना ओम कश्यप ने अपने दर्शकों को बताया कि तेहरान में ईरानी आतंकियों ने 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया है और इसके दूरगामी परिणाम होंगे. उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि अमेरिका पर इन 66 जिंदगियों को बचाने का भारी दबाव है और ईरान इसे एक ‘लिवरेज’ (सौदेबाजी के मोहरे) के रूप में इस्तेमाल करेगा. उस वक्त चैनल की स्क्रीन पर भी यही जानकारी ‘वॉर ब्रेकिंग’ के रूप में फ्लैश हो रही थी.
🚨 ‘सबसे तेज’ रहने की सनक 🚨
अंजना ओम कश्यप ने आज सुबह बुलेटिन में कह दिया- अमेरिका का दावा है कि तेहरान में US दूतावास के 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया गया है.
बैकग्राउंड पता न होने के चलते अंजना ओम कश्यप उसे आज की खबर बता गईं.
हालांकि- प्रणय उपाध्याय ने उन्हें करेक्ट करते… pic.twitter.com/0jVbflVWjc
— Govind Pratap Singh | GPS (@govindprataps12) March 5, 2026
बुलेटिन के दौरान मौजूद पत्रकार प्रणय उपाध्याय ने इस बड़ी चूक को सुधारा. उन्होंने स्पष्ट किया कि कैरोलिन लेविट 1979 की उस ऐतिहासिक घटना का ज़िक्र कर रही थीं जब अमेरिकी दूतावास पर हमला किया गया था और 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया गया था. 1979 की उस ऐतिहासिक घटना के बाद से तेहरान में अमेरिका का कोई दूतावास ही नहीं है.
प्रणय उपाध्याय ने विस्तार से समझाया कि कैरोलिन लेविट दरअसल उसी ऐतिहासिक घटना का जिक्र कर रही थीं, जिसका उल्लेख डोनाल्ड ट्रंप भी अक्सर अपनी रैलियों में करते रहे हैं. कैसे पिछले 45 वर्षों से ईरान ‘डेथ टू अमेरिका’ (अमेरिका की बर्बादी) के नारे लगाता रहा है और आज भी तेहरान में उस पुराने अमेरिकी दूतावास को एक ‘म्यूजियम’ के रूप में रखा गया है, ताकि वहां की जनता को अमेरिका विरोधी विचारधारा से जोड़ा जा सके.
इसके बाद, अंजना ओम कश्यप ने अपनी गलती स्वीकार की और दर्शकों से खेद जताते हुए कहा कि खबर को गलत तरीके से इंटरप्रेट किया गया था. उन्होंने प्रोडक्शन टीम को तुरंत वह गलत हेडलाइन हटाने के निर्देश दिए.
ईरान होस्टेज क्राइसिस
यह घटना आधुनिक कूटनीति के इतिहास में सबसे काले अध्यायों में से एक मानी जाती है. इसकी शुरुआत 4 नवंबर, 1979 को हुई थी, जब ईरानी छात्रों और प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर धावा बोल दिया था. इस घटना के बाद कुल 66 अमेरिकियों को शुरुआत में बंधक बनाया गया था, जिसमें कई अमेरिकी राजनयिक भी शामिल थे. बाद में कुछ को रिहा कर दिया गया, लेकिन 52 बंधकों को पूरे 444 दिनों तक कैद में रखा गया. अंततः 20 जनवरी, 1981 को उन्हें रिहा किया गया, जो इत्तेफाक से अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के शपथ ग्रहण का दिन था.

इस संकट के दौरान छह अमेरिकी राजनयिक दूतावास से भागने में सफल रहे थे. उन्हें कनाडाई सरकार और सीआईए ने एक संयुक्त गुप्त ऑपरेशन ‘कनाडियन केपर’ के जरिए 27 जनवरी, 1980 को ईरान से बाहर निकाला था. इस जासूसी मिशन पर बाद में हॉलीवुड फिल्म ‘आर्गो‘ (Argo) भी बनी. इस फ़िल्म को 3 ऑस्कर पुरस्कार ने भी नवाजा जा चुका है.

इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध हमेशा के लिए टूट गए. आज दोनों देशों के बीच सीधे संबंध नहीं हैं, अमेरिका में ईरानी हितों की देखभाल पाकिस्तानी दूतावास के माध्यम से की जाती है, वहीं ईरान में अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व स्विट्जरलैंड का दूतावास करता है.
इसीलिए ये एक बहू चर्चित घटना थी, जिसके बाद से ईरान में अमरीकी दूतावास भी नहीं है लेकिन फिर भी अंजना ओम कश्यप ने बिना देर किये ‘एम्बेसी पर कब्ज़ा’ ब्रेकिंग न्यूज़ चला दिया. और इस तरह एक और मामला इनके गैर-ज़िम्मेदाराना रिपोर्टिंग की फेहरिष्त में शामिल हो गया. हाल ही में इन्होंने युद्ध पर रिपोर्टिंग करते हुए बहरीन के एक वीडियो को दुबई पर हमला बताकर चला दिया था. संघर्ष के समय कम से कम मीडिया से ज़िम्मेदाराना रिपोर्टिंग की उम्मीद की जा सकती है लेकिन अंजना ओम कश्यप ने भारत-पाकिस्तान टकराव के समय भी बिना वेरिफाइ किये कई खबरें चलाई थी, पुराने वीडियो को हमला बताकर चला दिया था. नवंबर, 2025 में अंजना को ऐक्टर धर्मेन्द्र के मौत की झूठी ख़बर चलाने के लिए काफी ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा था.
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