ट्रिगर वार्निंग: हिंसा के विजुअल्स
पीड़ित के भाई ने 17 जनवरी को ऑल्ट न्यूज़ को बताया, “नसीब खराब था कि 35 साल के शेख मकंदर मोहम्मद उन बदमाशों के सामने या गया, जिन्होंने 14 जनवरी को ओडिशा के बालासोर ज़िले में उसकी पीट-पीट कर हत्या कर दी.”
भाई जितेंद्र मोहम्मद ने कहा, “मकंदर, मेरा चचेरा भाई, एक राजमिस्त्री के रूप में काम करता था. मकर संक्रांति के दिन, वो मवेशियों को ले जाने वाले एक स्थानीय वैन चालक की मदद करने के लिए सहमत हो गया, क्यूंकि कोई और नहीं था. चालक ने उससे मदद मांगी और वो सहमत हो गया.”
उन्होंने आगे कहा, “रास्ते में वैन को रोका गया और मकंदर पर उसकी मुस्लिम पहचान के कारण हमला किया गया. जिन लोगों ने उस पर हमला किया, वो अजनबी नहीं थे. इन लोगों को मकंदर जानता और पहचानता था. जब वो काम पर जाता था तो ये अक्सर उसे देखते थे.”
ये जानलेवा हमला 14 जनवरी के शुरुआती घंटों में हुआ जब बालासोर के जयदेव कसबा इलाके से मवेशियों से भरी एक पिकअप वैन को एक ग्रुप ने रोक लिया. बालासोर सदर ब्लॉक के अस्तिया गांव निवासी मकंदर और वैन के चालक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई. दोनों को बालासोर ज़िला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया जहां मकंदर ने उसी दिन दम तोड़ दिया.
मकंदर के बाद उसके परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं.
हमले के वायरल वीडियो में मकंदर मोहम्मद ज़मीन पर, हमले के कारण बेसुध दिख रहा है. उसके आसपास लोग मोटे डंडों के साथ खड़े हैं. मकंदर को लाठियों से मारा जा रहा है और ‘जय श्री राम’ और ‘गौ माता मेरी माता है’ का नारा लगाने के लिए कहा जाता है. वो पीटने वाले लोगों की बात मान कर ये नारे दोहराता है.
पहली FIR में मारपीट का कोई ज़िक्र नहीं था
घटना के बाद, एक उप-निरीक्षक की शिकायत के आधार पर बालासोर के सदर पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज़ की गई थी. प्राथमिकी में ज़िक्र किया गया है कि मवेशियों से लदी पिकअप वैन तेजी और लापरवाही से चलाई जा रही थी, और वो संतुलन खो बैठी और पलट गई. इसमें ये भी ज़िक्र किया गया है कि जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक ड्राइवर को अस्पताल ले जाया जा चुका था और घटनास्थल पर एक गाय पाई गई थी.
FIR में किसी हमले का ज़िक्र नहीं था. इसमें वैन के ड्राइवर और मालिक का नाम है जिन पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, ओडिशा गोहत्या निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में FIR के हवाले से कहा गया है, “गाय को ज़ब्त कर लिया गया और माँ भारती गौशाला में लाया गया, साथ ही पिकअप वैन को पुलिस स्टेशन लाया गया. शिकायतकर्ता ने पिकअप वैन के मालिक और चालक के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करने के लिए एक लिखित रिपोर्ट पेश की.”
हालांकि, मृतक के चचेरे भाई जितेंद्र मोहम्मद ने 14 जनवरी की शाम को एक और शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में पांच लोगों पर वैन रोकने और उसके भाई पर धारदार हथियारों से बेरहमी से हमला करने का आरोप लगाया गया. इस शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 103(2) के तहत FIR दर्ज की गई.
ऑल्ट न्यूज़ ने सदर पुलिस स्टेशन में जितेंद्र द्वारा सौंपी गई शिकायत की एक कॉपी हासिल की. उड़िया में लिखी दो पन्नों की शिकायत में जितेंद्र ने मकंदर पर किए गए क्रूर हमले का विवरण दिया. इसमें लिखा था कि उसके भाई के साथ दुर्व्यवहार किया गया, पीटा गया और दरांती जैसे तेज़ हथियारों से हमला किया गया. हमले के पीछे पांच लोगों का नाम लिया गया – बापू नन्ना, पवन, पिंटू, नेपाली और चीनू. इन पांचों पर मकंदर मोहम्मद की हत्या का आरोप है.

17 जनवरी को जितेंद्र ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया, “मेरे भाई को अस्पताल ले जाने के बाद ही हमें पुलिस ने सूचित किया था. वहां मैंने उसे देखा और उससे बात की. वो मुश्किल से बोल पा रहा था और 10-15 मिनट के भीतर, उसकी मौत हो गई. उसके पूरे शरीर पर – उसके सिर, हाथ, पैर और चेहरे पर, हर जगह गंभीर घाव थे. उसके शरीर के लगभग हर हिस्से पर पट्टियां और टांके लगे हुए थे. उसने मुझे बताया कि 5-8 लोगों के एक समूह ने वैन पर घात लगाकर हमला किया और उन्हें पीटना शुरू कर दिया.”
जितेंद्र ने कहा, “मकंदर ने ही अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए मुझे हमलावरों के नाम बताए थे.”
उसने आगे कहा, “हमने बाद में हमले के वीडियो देखे और महसूस किया कि उसे किस अमानवीय यातना का सामना करना पड़ा था. उन्होंने उसे हिंदू धार्मिक मंत्र कहने के लिए मजबूर किया. ये स्पष्ट है कि उसकी मुस्लिम पहचान के कारण उस पर हमला किया गया था.”
मकंदर के एक अन्य चचेरे भाई शेख अहसान मोहम्मद ने ऑल्ट न्यूज़ से पुष्टि की कि आरोपी मकंदर को जानते थे. शेख अहसान ने बताया, “मकंदर और हमलावर आपस में बात नहीं कर रहे थे, लेकिन वो एक-दूसरे को जानते थे. वो उन्हें पहचान सकता था. वो राईटविंग से जुड़े गौरक्षक थे.”
शेख अहसान ने हमले के फ़ुटेज ऑल्ट न्यूज़ के साथ शेयर किए जो सार्वजनिक डोमेन में नहीं हैं. ऐसे ही एक वीडियो में हमलावरों को मकंदर को उड़िया में गाली देते और उस पर रॉड और लाठियों से हमला करते दिखाया गया है. असहाय मकंदर उनसे विनती करता रहता है, लेकिन इसका कोई असर नहीं होता.
वीडियो आगे एड किया गया है. रिडर्स अपने विवेक का इस्तेमाल कर वीडियो देखें क्यूंकि इसमें हिंसा है.
ऑल्ट न्यूज़ से बात करते हुए, बालासोर के एसपी प्रत्यूष दिवाकर ने शुक्रवार को कहा कि सभी पांच आरोपियों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस ने अपराध स्थल पर उनमें से तीन की मौजूदगी का पता लगाया था. इन तीन व्यक्तियों को गिरफ़्तार कर लिया गया और अदालत में भेज दिया गया. वे हृषिकेश बेहरा के पुत्र सरोज कुमार बेहरा उर्फ पिंटू (25 साल) और पुरुना बालासोर के निवासी थे; सरगांव निवासी कार्तिक चंद्र दास के पुत्र चिन्मय कुमार दास उर्फ चीनू (29 साल) और हरसापुरा निवासी अनादि मोहलिक के पुत्र सागर मोहलिक उर्फ चंदू (22 साल) शामिल हैं.
पुलिस ने कहा कि जांच की जा रही है कि क्या इसमें और भी लोग शामिल हैं.
ये पूछे जाने पर कि क्या मकंदर पर हमला सांप्रदायिक रूप से प्रेरित था? एसपी ने कहा कि फिलहाल इसका पता नहीं चल सका है. उन्होंने इस पर भी बयान देने से इनकार कर दिया कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्रारंभिक FIR में हमले का ज़िक्र क्यों नहीं किया गया.
बजरंग दल कनेक्शन
पांच आरोपियों को हिरासत में लिए जाने के बाद, बजरंग दल 16 जनवरी को बालासोर एसपी के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गया और दावा किया कि उनके ‘गौरक्षा’ प्रमुख, पबन भाई और उनके चार सहयोगी (जो गौरक्षक थे) को पुलिस ने बिना किसी सबूत के हिरासत में लिया था. बजरंग दल बालासोर के एक सदस्य ने एक वीडियो में कहा है कि ‘गौ रक्षकों’ को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन अपराधों में फंसाया जा रहा है जिनमें उनकी कोई भागीदारी नहीं है. उनकी मांग है कि पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों की संलिप्तता के सबूत दें.
बजरंग दल बालासोर के ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो भी पोस्ट किया गया था. कैप्शन में लिखा है, “जय श्री राम। कल बालासोर के सुंदूरी में गाय की गाड़ी पलटने से एक मुस्लिम युवक की मौत हो गई. इस घटना के कारण हमारे गौ सुरक्षा प्रमुख पबन भाई को पुलिस ने बिना किसी कारण के उठा लिया है.”
पबन की प्रोफ़ाइल पर नज़र डालने पर – उसका पूरा नाम पबन कुमार भोई है – हमें बजरंग दल बालासोर के अलग-अलग सदस्यों के नाम सूचीबद्ध करने वाली एक पोस्ट मिली. पबन भोई को ‘गौ सुरक्षा प्रमुख’ का नाम दिया गया था.
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