उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 5 अगस्त को राम मंदिर का शिल्यान्यास किया गया था. उसके बाद सोशल मीडिया में 2 वीडियो वायरल हुआ और उसके साथ लिखा था, “राम मंदिर का घंटा लगभग तैयार है; 8 धातु- सोना, चांदी, तम्बा, जिंक, लेड, टिन, लोहा और मरकरी को मिलाकर, ‘अष्टधातु’ से बना 2,100 किलो वज़नी, सबसे बड़ा 6’X5′ का सिंगल पीस का घंटा. इसे 15 किलोमीटर तक सुना जा सकता है. #JaiShriRam.” यानी, दावा किया गया कि वीडियो में राम मंदिर में लगाया जाने वाला 2,100 किलो का घंटा दिख रहा है. दोनों ही वीडियोज़ को फे़सबुक और ट्विटर पर धड़ल्ले से शेयर किया गया.

वीडियो 1

ये वीडियो 23 सितम्बर के आसपास ऑनलाइन नज़र आया. इसमें एक व्यक्ति बड़े से घंटे को बजाता हुआ नज़र आ रहा है. इस वीडियो में तमिल टेक्स्ट लिखा है जो इशारा करता है कि इसे दक्षिण भारत में बनाया गया है.

ट्विटर यूज़र @AnkitaBnsl ने ये वीडियो शेयर किया जिसे 900 से ज़्यादा लोगों ने रीट्वीट किया. (आर्काइव लिंक)

यूज़र @mini_razdan10 (आर्काइव लिंक) ने भी ये वायरल वीडियो शेयर किया था जिसे 800 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया. इसी तरह कई फे़सबुक यूज़र्स ने ये वीडियो शेयर किया.

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वीडियो 2

अक्टूबर के पहले हफ़्ते में कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने एक मोंटाज (कई फ़ोटो और वीडियो का कलेक्शन ) शेयर किया जिसमें एक घंटे के बनाने की प्रक्रिया दिखाई देती है.

ट्विटर यूज़र @RVAIDYA2000 ने 5 अक्टूबर को ये वीडियो उसी वायरल कैप्शन के साथ शेयर किया. इसे 1,500 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया और 50,000 से ज़्यादा बार देखा गया (आर्काइव लिंक). ऑल्ट न्यूज़ ने अगस्त में @RVAIDYA2000 के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर जांच के बारे में फैलायी गई कई ग़लत सूचनाओं पर रिपोर्ट बनाई थी.

ये वीडियो बहुत से फे़सबुक यूज़र्स ने भी शेयर किया है. (ऐसे ही एक वीडियो का लिंक)

फै़क्ट-चेक

वीडियो में दिख रहा घंटा राम मंदिर में लगाया तो जाएगा लेकिन ये न ही 2,100 किलो का है और न ही ये 8 धातुओं से बना है.

और हां, उत्तर प्रदेश में 8 धातुओं को मिलाकर 2,100 किलो का घंटा बनाया तो गया है लेकिन वो इस वीडियो में नहीं है. ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि दोनों वीडियो में दिखाई दे रहा घंटा तमिलनाडु में बनाया गया है.

वीडियो 1

ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो में दिख रहे टेक्स्ट का अनुवाद किया. इसका मोटे तौर पर मतलब है, “सरल- तमिलनाडू से अयोध्या श्री राम मंदिर के लिए रामागिरुपन नादर पॉटरी 600 kg का कांस्य का काम.” (சரால் – ராமகிருபன் நாடார் பாத்திரக்கடையில் இருந்து அயோத்தி ஸ்ரீ ராமர்கோவிலுக்காக தமிழகத்தில் இருந்து செல்லும் 600கிலோ எடை கொண்ட வெங்கல பணி)

तमिल टेक्स्ट में घंटे का वज़न 600 किलो लिखा है जबकि वायरल टेक्स्ट में 2,100 किलो.

इसके बाद हमने InVid टूल का इस्तेमाल करते हुए वीडियो के फ़्रेम्स का रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें तमिल वेबसाइट मालाईमलार की 13 सितम्बर की एक रिपोर्ट मिली. इसके मुताबिक इस वीडियो में तमिलनाडु में अयोध्या राम मंदिर के लिए बना कांस्य का एक बड़ा घंटा दिखाई दे रहा है. इस आर्टिकल में इसके 8 धातुओं से मिलाकर बनाने की बात कहीं नहीं लिखी है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक घंटे को रामाकृष्ण नादर नाम के कुम्हार ने बनाया है. गूगल मैप के मुताबिक, ये तूतूकुड़ी का मेटल सप्लायर है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ये घंटा 600 किलो का है, और ये वीडियो घंटे की टेस्टिंग के दौरान एक कर्मचारी ने बनाया था.

इससे हिंट लेते हुए हमने गूगल पर कीवर्ड सर्च किया और हमें रामाकृष्ण नादर का जस्ट डायल पेज मिला (आर्काइव लिंक). इस पेज में लगी एक हुबहू तस्वीर वायरल वीडियो जैसी है. रामाकृष्ण ने ऑल्ट न्यूज़ से बात की और इस बात की पुष्टि की कि घंटा उन्होंने ही बनाया है.

ऑल्ट न्यूज़ ने तमिलनाडु से भाजपा सदस्य करू नागराजन से बात की जिन्होंने हमारा संपर्क राजलक्ष्मी मंडा से कराया. राजलक्ष्मी भाजपा समर्थक और चेन्नई के कानूनी अधिकार परिषद् की सचिव हैं. वो घंटे को तमिलनाडु से राम मंदिर तक खुद लेकर आई थीं, और बीच में कुछ धार्मिक क्रियाकलापों के लिए कई शहरों में रुकीं थीं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक वो 7 अक्टूबर को 1 महीने की यात्रा के बाद लखनऊ पहुंचीं थीं.

उन्होंने ऑल्ट न्यूज़ को बताया, “वायरल वीडियो तूतूकुड़ी वर्कशॉप का लग रहा है जहां घंटे बनाये गये और फिर काम पूरा करने के लिए कुम्बकोनाम भेजे गये. ये अगस्त में ही तैयार हो गया था. घंटे के लिए कानूनी अधिकार परिषद् ने फंड बढ़ा दिया था. हमने 17 सितम्बर को रामेश्वरम से अपनी यात्रा शुरू की थी. आज (1 अक्टूबर ) हमने उत्तर प्रदेश पार कर लिया है. हम राम मंदिर पहुंचने से पहले नई दिल्ली में धार्मिक कार्यक्रम के लिए रुकेंगे.” साथ ही उन्होंने आगे पुष्टि की कि ये घंटा कांसे का है और इसका वज़न करीब 613 किलो है.

गौर करने वाली बात है कि ट्विटर यूज़र @AnkitaBnsl, जिसने ये वायरल वीडियो भ्रामक कैप्शन के साथ शेयर किया, ने आगे दो ट्वीट सही जानकारी के साथ पोस्ट किये.

वीडियो 2

इस वीडियो में घंटे के बनने की पूरी प्रक्रिया है, मोल्डिंग, कास्टिंग, पॉलिशिंग, और टेस्टिंग. ऑल्ट न्यूज़ ने नोटिस किया कि वीडियो में 1:06 और 1:07 से लेकर 1:12 मिनट पर जो घंटा है वो बिल्कुल पहले वीडियो में दिख रहे घंटे के जैसा ही है.

नीचे दोनों के बीच समानताएं दिखाई गयी हैं :

i) दोनों वीडियो में व्यक्ति ने एक जैसे कपड़े पहने है – सफ़ेद शर्ट और नीली लुंगी. (लाल रेखा)

ii) दोनों घंटों पर ‘जय श्री राम’ लिखा हुआ है. (हरा बॉक्स)

यहां तक कि, आखिरी के कुछ सेकंड दोनों वीडियो में एक जैसे हैं

2,100 किलो का घंटा कौन-सा है?

हमने एक बार फिर दूसरा कीवर्ड सर्च किया और द इकॉनमिक टाइम्स (ईटी) की 10 अगस्त की एक रिपोर्ट मिली जिसमें इसकी पुष्टि की गयी है कि राम मंदिर के लिए 2,100 किलो का घंटा बन कर तैयार हो चुका है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के एटा ज़िले में जलेसर के दाऊ दयाल राम मंदिर के लिए 2,100 किलो का घंटा बनाने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. ईटी के अनुसार इसे इकबाल मिस्त्री ने डिज़ाइन किया है. दाऊ दयाल ने ईटी को बताया, “हमारे मुस्लिम भाई डिज़ाइन, घिसाई और पॉलिशिंग के एक्सपर्ट हैं.” रिपोर्ट में लिखा है, “घंटा सिर्फ़ पीतल का नहीं, बल्कि अष्टधातु – सोना, चांदी, तम्बा, जिंक, लेड, टिन, लोहा और मरकरी के मिश्रण से बना हुआ है.”

यही india.com और द सियासत डेली ने भी रिपोर्ट किया है. सियासत के मुताबिक वर्कशॉप के मालिक जलेसर नगर परिषद् के अध्यक्ष विकास मित्तल हैं और दाऊ दयाल और इकबाल मिस्त्री ने मिलकर घंटा बनाया है.

निष्कर्ष

दो वीडियो, जिनमें बड़े घंटे दिख रहे हैं, इस दावे के साथ शेयर किये गए कि ये यूपी में अयोध्या राम मंदिर के लिए बनाया जा रहा 2,100 किलो का घंटा है जो ‘लगभग तैयार’ है. ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि दोनों वीडियो में दिख रहा 613 किलो का कांस्य का घंटा है जिसे तमिलनाडु के कुम्बकोनम में बनाया गया है. ऑल्ट न्यूज़ ने इसे बनाने वाले से बात की और उन्होंने पुष्टि की कि ये उन दोनों वीडियो में उनकी ही वर्कशॉप नज़र आ रही है.

राम मंदिर के लिए 2,100 किलो का घंटा यूपी के दाऊ दयाल ने बनाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये वाकई 8 धातुओं से बना है और इसे नवम्बर 2019 और 10 अगस्त के बीच पूरा किया गया.

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About the Author

Archit is a graduate in English Literature from The MS University of Baroda. He also holds a post-graduation diploma in journalism from the Asian College of Journalism. Since then he has worked at Essel Group's English news channel at WION as a trainee journalist, at S3IDF as a fundraising & communications officer and at The Hindu as a reporter. At Alt News, he works as a fact-checking journalist.