दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 17 और 18 फ़रवरी को एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब भारत मंडपम में गलगोटिया यूनिवर्सिटी (GU) मंडप में ‘ओरियन’ (ऑपरेशनल रोबोटिक इंटेलिजेंस नोड) नाम के तहत चीन निर्मित रोबोटिक कुत्ते को यूनिवर्सिटी द्वारा बनाया गया बताकर प्रदर्शित किया गया था.
जैसे ही 17 फ़रवरी को एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि ने कहा था कि “ओरियन, ‘रोबोडॉग’, “गलगोटिया यूनिवर्सिटी के उत्कृष्टता केंद्र द्वारा विकसित किया गया था”, सोशल मीडिया यूज़र्स ने ये नोटिस कर लिया कि ये असल में चीन में बना एक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध प्रोडक्ट था.
18 फ़रवरी की दोपहर तक, वैश्विक नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी सहित शिखर सम्मेलन के बारे में बाकी सब कुछ, लगभग हर प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट द्वारा गलगोटिया की कथित चोरी और तथ्यों की ग़लत बयानी पर कहानियां चलाने के कारण काफी चर्चा में आ गया. इनमें रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस, अल जज़ीरा, बीबीसी, द स्ट्रेट टाइम्स, एबीसी और अन्य शामिल थे.
ग्रेटर नोएडा स्थित निजी यूनिवर्सिटी ने ये कहकर अपना बचाव करने की कोशिश की कि उसने कभी ये दावा नहीं किया कि रोबोडॉग उनके द्वारा बनाया गया था. यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया पर बयान शेयर किया.

हालांकि, ये बयान सरासर ग़लत था. पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब GU में स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट में संचार की सहायक प्रोफ़ेसर नेहा सिंह ने डीडी न्यूज़ को बताया कि रोबोटिक कुत्ता इसी यूनिवर्सिटी ने विकसित किया था. उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी ने आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस में 350 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया है. DD न्यूज़ ने बाद में वीडियो हटा दिया. लेकिन इसका आर्काइव ऑनलाइन मौजूद है. रिडर्स इसे यहां देख सकते हैं:
इस विवाद के बीच प्रोफ़ेसर ने भी सफाई दी. विवाद के बारे में बात करते हुए उन्होंने ये कहा:
VIDEO | Delhi: Professor Neha Singh of Galgotias University responds to reports of the university being asked to vacate its stall at the AI Summit Expo, says, “The controversy happened because things may not have been expressed clearly. I take accountability that perhaps I did… pic.twitter.com/z5lOIzmDz1
— Press Trust of India (@PTI_News) February 18, 2026
एक अन्य संकाय सदस्य ने कहा कि पूरा विवाद ग़लत व्याख्या पर आधारित है. आयातित मॉडल को यूनिवर्सिटी में लाया गया था, ताकि छात्र 350 करोड़ के AI निवेश के हिस्से के रूप में इसके साथ बातचीत कर सकें. उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण में विश्वास करता है.
#WATCH | Delhi | Following row over display of a Chinese-made robodog at AI Impact Summit, Galgotias University Professor Dr Aishwarya Shrivastava says,” We never claimed that we manufactured it (robodog), it was only a part of our AI investment. It got misinterpreted in a big… pic.twitter.com/xnVUPlQIi0
— ANI (@ANI) February 18, 2026
रजिस्ट्रार एन के गौड़ द्वारा हस्ताक्षरित दूसरा बयान, यूनिवर्सिटी ने बुधवार शाम 5 बजकर 4 मिनट पर जारी किया. ‘भ्रम’ के लिए माफी मांगते हुए, यूनिवर्सिटी ने पूरे विवाद से खुद को दूर रखने की कोशिश की और दोष नेहा सिंह पर मढ़ दिया.
इसमें कहा गया, “पवेलियन का संचालन कर रहे हमारे प्रतिनिधियों में से एक को ग़लत जानकारी थी. वो प्रोडक्ट की तकनीकी उत्पत्ति के बारे में नहीं जानती थी और कैमरे पर आने के उत्साह में उसने तथ्यात्मक रूप से ग़लत जानकारी दी, जबकि वो प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत नहीं थी.”

ग़लत सूचना को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता: सरकार
तीखी आलोचना का सामना करते हुए, सरकार ने आख़िरकार GU को शिखर सम्मेलन छोड़ने के लिए कहा. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने 18 फ़रवरी को पत्रकारों से कहा कि सरकार चाहती है कि “असली और वास्तविक काम इस तरह से प्रदर्शित हो जैसा कि लोग एक एक्सपो में प्रदर्शित करते हैं.”
“हम यहां पेश किए गए प्रदर्शनों पर विवाद नहीं चाहते हैं, इसलिए मुझे लगता है, ये ज़रूरी है कि वहां एक निर्धारित कोड का पालन किया जाए. हमारा इरादा है, ग़लत सूचना को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता, इसलिए हम एक्सपो में प्रदर्शनों के आसपास विवाद नहीं चाहते हैं. और इसलिए मैं इस विवाद में शामिल नहीं हो रहा हूं कि वे सही हैं या ग़लत, हम सिर्फ विवाद नहीं चाहते हैं.”
VIDEO | S Krishnan (@SecretaryMEITY), Secretary of the Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) talks about decision to ask Galgotias University to vacate the AI Impact Summit Expo.
He says, “The point is, we want genuine, and actual work to be reflected in a… pic.twitter.com/Y9fpm9zvLw
— Press Trust of India (@PTI_News) February 18, 2026
ये बताना उचित है कि मंत्रालय के ऑफ़िशियल X हैंडल ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें रोबोटिक कुत्ते पर DD न्यूज़ की रिपोर्ट का एक सेगमेंट दिखाया गया था. बाद में इसे हटा दिया गया. (आर्काइव)
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी एक X पोस्ट में रोबोटिक कुत्ते के विजुअल्स शेयर किए थे जिसमें उन्होंने “भारत के सार्वभौम मॉडल” की सराहना की थी. हालांकि, बाद में पोस्ट को हटा दिया गया.

बाद में, गलगोटिया विश्वविद्यालय की टीम को उनके मंडप में बिजली कट की ख़बरों के बीच शिखर परिसर से बाहर निकलते देखा गया.
#WATCH | Delhi | Galgotias University staff and officials vacate their stall at India AI Impact Summit expo, following row over display of Chinese-made robodog.
As per sources, the govt had asked Galgotias University to vacate the stall at the expo. pic.twitter.com/cqN5vBcgcN
— ANI (@ANI) February 18, 2026
आगे, यूनिट्री गो2 मॉडल और ओरियन रोबोट-डॉग के बीच एक विजुअल्स की साथ-साथ तुलना दी गई है:

राजनीतिक बवाल और बढ़ती आलोचना
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की कथित प्रगति और प्रधानमंत्री मोदी के AI के दृष्टिकोण का एक हाई-प्रोफ़ाइल शो माना जा रहा था, लेकिन रोबोडॉग विवाद के कारण ये बड़े पैमाने पर शर्मिंदगी में बदल गया.
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर “देश की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचाने” का आरोप लगाया.
The Modi government has made a laughing stock of India globally, with regard to AI.
In the ongoing AI summit, Chinese robots are being displayed as our own. The Chinese media has mocked us. This is truly embarrassing for India.
What is even more shameful is the fact that… pic.twitter.com/xaRwm7j9Wv
— Congress (@INCIndia) February 18, 2026
तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने IT मंत्री वैष्णव पर कटाक्ष किया और उनसे पद छोड़ने के लिए कहा क्योंकि उन्होंने “भारत को हंसी का पात्र बना दिया है.”
Deleting tweets doesn’t change reality @AshwiniVaishnaw – you have made India a laughing stock. Quit the chair if you can’t do your job. Maybe join Galgotia as Professor of Spin? pic.twitter.com/wGJkLxIStD
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) February 18, 2026
CPI (M) सांसद जॉन ब्रिटास ने एक X पोस्ट में कहा, “गलगोटिया यूनिवर्सिटी को प्रमुख भाजपा नेताओं का संरक्षण और समर्थन प्राप्त है जिसमें डॉ. संबित पात्रा से लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल तक अलग-अलग यूनिवर्सिटी कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं. ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि संस्थान अक्सर “विक्सित भारत” नारे पर जोर देता है. ये घनिष्ठ संबंध तब स्पष्ट हुआ जब यूनिवर्सिटी ने AI शिखर सम्मेलन में “ओरियन” के रूप में ब्रांडेड एक घरेलू आविष्कार के रूप में व्यावसायिक रूप से मौजूद चीनी रोबोट कुत्ते को प्रदर्शित किया जिसे आईटी मंत्री के अलावा किसी और ने ट्वीट में प्रचारित नहीं किया था.”
अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने भी तीखी आलोचना की.
The embarrassment caused by Galgotias University at Delhi’s AI meet is what happens when people instead of spending time doing science, maths, literature, spend their time showing that 5000 years ago their ancestors did science, maths, literature.
— Kaushik Basu (@kaushikcbasu) February 19, 2026
रोबोडॉग के बाद, स्कैनर के तहत सॉकर ड्रोन
रोबोटिक कुत्ता गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एकमात्र प्रोडक्ट नहीं था जिसके ग़लत इस्तेमाल पर चिंता जताई गई.
DD न्यूज़ इंटरव्यू के एक अन्य सेगमेंट में, नेहा सिंह ने “भारत का पहला ड्रोन सॉकर मैदान” होने का दावा किया. उन्होंने ज़िक्र किया कि इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग और अनुप्रयोग के हर पहलू को गलगोटिया यूनिवर्सिटी में पूरा किया गया था.
हालांकि, मॉडल पर रिवर्स इमेज सर्च से हमें दक्षिण कोरिया के हेलसेल ग्रुप की वेबसाइट मिली जो ड्रोन स्पोर्ट्स में माहिर है. विशिष्ट मॉडल, जैसा कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि द्वारा प्रदर्शित किया गया है, “स्ट्राइकर वी3 ARF सेमी-असेंबल” सेट से काफी मिलता-जुलता है. आगे, तुलना देखें:

पिछले विवाद
ये पहली बार नहीं है जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी किसी विवाद के केंद्र में है.
2020 में गलगोटियास विश्वविद्यालय के एक रिसर्च स्कॉलर ने एक पेपर पब्लिश किया था जिसमें ये देखा गया था कि क्या थाली (धातु की प्लेट) और घंटी (घंटियाँ) द्वारा उत्पन्न ध्वनि कंपन संभावित रूप से कोरोना वायरस को मार सकते हैं.

बाद में पेपर वापस ले लिया गया.
2024 में, गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्र बड़ी संख्या में धन पुनर्वितरण उपायों के लिए कांग्रेस के दबाव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. जब पत्रकार आशुतोष मिश्रा ने छात्रों से पूछा कि वो किस लिए आए हैं, तो कोई भी अपनी शिकायतें ठीक से नहीं बता पाया. कई लोगों ने अस्पष्ट शब्दों में जवाब दिया और कुछ ने कहा कि वो भाजपा को सत्ता में देखना चाहते हैं.
#Congress के खिलाफ वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन-कथित इन्हेरिटेंसी टैक्स के मुद्दे पर छात्रों का प्रदर्शन लेकिन ज्यादातर को न मुद्दे पता थे ना वजह। कुछ बैनर भी ठीक से नहीं पढ़ पाए। देखिए कांग्रेस मुख्यालय की ओर प्रदर्शन करने चले छात्रों के गजब जवाब।#ReporterDiary | (@JournoAshutosh) pic.twitter.com/ystudZDqYm
— AajTak (@aajtak) May 1, 2024
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