नए साल की शुरुआत कई लोगों के लिए तबाही लेकर आया जब नफ़रत आधारित भीड़ हिंसा (हेट क्राइम) ने उनकी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल दी. 1 जनवरी से 10 जनवरी 2026 के बीच राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे अलग अलग राज्यों से ऐसी कई घटनाएं सामने आईं जिनमें अल्पसंख्यकों, बुज़ुर्गों और गरीब तबकों को निशाना बनाया गया. इन घटनाओं के मामलों में कहीं गोमांस के शक में पिटाई हुई, तो कहीं ‘धर्म परिवर्तन’ का आरोप लगाकर प्रार्थना सभाओं में हस्तक्षेप किया गया.
1 जनवरी: गोमांस के शक में बुज़ुर्ग की पिटाई
साल के पहले ही दिन यानी, 1 जनवरी को राजस्थान के झालावाड़ ज़िले के किशनपुरा गांव में कथित गौ रक्षकों ने एक उम्रदराज व्यक्ति पर हमला कर दिया. उस व्यक्ति पर गाय की हत्या करने और सार्वजनिक रूप से गोमांस खाने का कथित आरोप लगाते हुए सड़क पर बेरहमी से लात घूसों से हमला किया गया. इतना ही नहीं सड़क पर आ रही ट्रक से कुचलवाने का भी प्रयास किया गया. इस घटना से जुड़े वीडियोज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो गए.
राजस्थान, झालावाड़ के अकलेरा इलाके में एक दक्षिणपंथी ग्रुप ने कथित तौर पर बीफ़ (गोमांस) खाने का आरोप लगाकर एक बुज़ुर्ग आदमी को बेरहमी से पिटाई की। उन्होंने उस पर रोहिंग्या बांग्लादेशी होने का भी आरोप लगाया।#rajsthan #jhalawar #Islamophobia #MobLynching #muslim #BJPGovernment pic.twitter.com/n4G0rCWGdT
— Reporter Madam (@Reportermadam) January 2, 2026
ऑल्ट न्यूज़ ने इस मामले में अधिक जानकारी जुटाने के लिए झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि आरोपियों ने पीड़ित बुज़ुर्ग को गाय की हत्या करने और गोमांस खाने के संदेह में पीटा था. घटना का वीडियो मिलने के बाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया.
अलकेरा पुलिस इंस्पेक्टर धरमराम ने हमें बताया कि पीड़ित मानसिक रूप से बीमार था और वह एक मृत गाय के अवशेषों के पास बैठा हुआ था. हमले के बाद वो वहां से चला गया. धरमराम ने बताया कि हमलावरों की पहचान राकेश, रोहन और अजय के रूप में हुई. ऑल्ट न्यूज ने इन लोगों के सोशल मीडिया हैन्डल की को खंगाला और मालूम चला कि ये तीनों बजरंग दल से जुड़े हैं और सार्वजनिक रूप से मारपीट के वीडियो पोस्ट करते रहते हैं.
पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट :- राजस्थान में ‘गौरक्षकों’ ने गौमांस खाने का आरोप लगाकर ‘मानसिक रूप से बीमार बुज़ुर्ग’ को पीटा
2 जनवरी: धार्मिक पहचान को लेकर मुस्लिम महिला को बनाया निशाना
एक वीडियो में मुस्लिम महिला बता रही है उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर विरार, मुंबई के डी-मार्ट स्टोर में उसे निशाना बनाया गया. महिला ने दावा किया कि डी-मार्ट स्टोर में लाइन खड़े होने के दौरान एक हिंदू महिला ने उसे हिजाब पहने हुए देखा और गाली गलोज करने लगी. महिला ने गंभीर आरोप लगाया कि जिस महिला से उसकी बहस हुई थी, उसके पति ने उसे धमकी देते हुए कहा, “मैं आदमियों को बुलाकर तुम्हारा रेप करवा दूंगा”. आगे महिला कहती है कि डी-मार्ट स्टोर के लोगों ने धार्मिक पहचान के कारण उसे ही चुप कर रहे थे. वो उसे मराठी में बात करने को कह रहे थे. डी-मार्ट के किसी स्टाफ ने कहा कि हिजाब पहने लोगों का आना बंद कर देंगे. इस वीडियो की शुरुआत में कथित आरोपी महिला “हम हिंदू हैं” कहते हुए नज़र आ रही है.
Location: Virar, Mumbai
A Muslim woman was targeted at a D-Mart store based on her religious identity. The woman made serious allegations, claiming that the husband of the woman she had an argument with threatened her, saying, “I will call men and have you raped.” pic.twitter.com/ghZt0GCxNa
— The Muslim (@TheMuslim786) January 4, 2026
न्यूज़ मीडिया मिरर ऑफ़ ट्रुथ ने इस मामले पर रिपोर्टिंग की. रिपोर्ट में मुस्लिम परिवार के समर्थन में आए अहमद ने पूरे घटनाक्रम के बारे बताया कि ये घटना 2 जनवरी को हुई थी और इस मामले को लेकर 3 जनवरी को आरोपी परिवार के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज की गई. 4 जनवरी को मुस्लिम परिवार और परिवार के समर्थन में आए हिंदू – मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग विरार के डी-मार्ट स्टोर के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे थे. ये प्रदर्शन डी-मार्ट स्टोर के स्टाफ़ द्वारा हिजाब और बुर्का पहनकर आने पर रोक लगाने के कथित बात के विरोध में था. डी-मार्ट के स्टाफ़ द्वारा हिजाब और बुर्का को लेकर कही गई बातों के लिए माफ़ी मंगवाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे.
4 जनवरी: ओडिशा, छत्तीसगढ़ में बंगाली भाषी मज़दूरों पर हमला
भारत के अलग-अलग राज्यों में बंगाली-भाषी, ख़ासकर मुस्लिम प्रवासी मजदूरों के खिलाफ़ पहचान-आधारित हमलों और लक्षित हिंसा की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं. इन तरह की घटनाओं में ज़्यादातर एक पैटर्न रहा है कि प्रभावित लोग भाषा, धर्म और “बांग्लादेशी” होने के कथित आरोपों के आधार पर निशाना बनाए गए है या बनाये जा रहे है. इनमें से ज़्यादातर घटनाएं छत्तीसगढ़, ओडिशा से सामने आ रही हैं.
छत्तीसगढ़ में बेकरी पर प्रवासी मुस्लिम कामगारों पर हमला
“द वायर” की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 जनवरी को छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले के पात्रापारा क्षेत्र में स्थित जयदुर्गा बेकरी में आठ बंगाली-भाषी मुस्लिम प्रवासी मजदूरों पीटा गया. बेकरी मालिक के साथ हुए उचित मजदूरी की मांग पर विवाद के बाद कथित रूप से बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से इन्हें पीटा और बेकरी से बाहर निकाल दिया.

द वायर को कर्मचारियों ने बताया कि मालिक के निर्देश पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का समूह रविवार दोपहर को बेकरी में घुसा और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाया फिर सभी मजदूरों पर बांग्लादेशी कहते हुए हमला किया. कर्मचारियों द्वारा आधार कार्ड दिखाए जाने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आधार कार्ड फेंका और कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी छीन लिए और फिर उन पर हमला किया गया.
आठों मजदूर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले के रहने वाले हैं. इनमें से हमले के बाद, चार मजदूर शेख जासिम, शेख असलम, शेख बाबी और शेख जुल्फुकार अपने घर लौट गए. बाकी चार, शेख इस्माइल, शेख मीनार, अरबाज काज़ी और शेख साहिल नाबालिग हैं और सूरजपुर के एक सरकारी आश्रय गृह में रह रहे हैं.
छत्तीसगढ़ से ऐसी ही दूसरी घटना
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से इसी तरह की दूसरी भीषण हिंसा की घटना भी सामने आयी. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के पास के इलाके से आए तीन प्रवासी मजदूर, यदुल शेख (28), नियामत शेख (30) और हनीफ शेख (65) ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में मोटरसाइकिलों पर कंबल और अन्य सामान बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं. इन पर हमला तब हुआ जब वे छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में ऑर्डर लेने जा रहे थे.
द टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट में प्रभावित मजदूरों के बयानों के अनुसार, नारायणपुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास पर आठ लोगों के एक समूह ने उन्हें रोका और उनके आधार कार्ड और मतदाता कार्ड मांगे. उन्हें मुसलमान के रूप में पहचान कर हमलावरों ने उनके दस्तावेज़ फाड़ दिए और उन पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाया. इसके बाद तीनों को लाठियों और छड़ों से पीटा गया. साथ ही उन्हें बाँधकर उन पर पेट्रोल डालकर जलाने का भी प्रयास किया गया.
ओडिशा में प्रवासी मजदूरों पर हमला
छत्तीसगढ़ की तरह ही हिंसा की एक घटना रविवार (4 जनवरी) को ओडिशा के संबलपुर ज़िले से सामने आयी, जहां पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के धुलियान इलाके से आये प्रवासी मजदूरों पर कथित तौर पर हमला किया गया. इस घटना में एक प्रवासी मजदूर एजाज अली के बांह में फ्रैक्चर हो गया.

द टेलीग्राफ की ही एक रिपोर्ट के अनुसार, पेशे से राजमिस्त्री एजाज़ अली दो महीने पहले 15 अन्य लोगों के साथ काम की तलाश में ओडिशा के संबलपुर ज़िले आए थे. भगवा कपड़े पहने और माथे पर तिलक लगाए सात लोगों की एक भीड़ ने उन सभी श्रमिकों के घर में घुस गए और उनसे आधार कार्ड और वोटर कार्ड दिखाने को कहा. कार्ड दिखाए जाने के बाद भीड़ को ये मालूम चला कि ये लोग मुसलमान हैं. उन्होंने बांग्लादेशी होने का कथित आरोप लगाते हुए उन्हें लाठियों से पीटना शुरू कर दिया. इस दौरान सहकर्मी कबीर शेख और राशिद शेख घायल हो गए, जबकि मजदूर एजाज़ अली के बाएं हाथ में फ्रैक्चर हो गया. हमले के बाद ओडिशा में इलाज न मिलने के कारण वह अगले दिन ट्रेन से धुलियान लौट गया.
7 जनवरी: झारखंड में मुस्लिम शख्स की पीट-पीटकर हत्या
7 जनवरी को झारखंड के गोड्डा ज़िले में 45 साल के एक मुस्लिम व्यक्ति को मवेशी चोरी के शक में कुछ अज्ञात लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी. मृतक के परिवार का आरोप है कि हत्या धर्म के वजह से हुई. इस घटना का चोरी से कोई लेना देना नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में पीटीआई के हवाले से बताया कि घटना बुधवार रात को पोराइयाहाट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मतिहानी गांव में घटी. पीड़ित की पहचान पप्पू अंसारी के रूप में हुई है, जो पथरगामा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के रानीपुर गांव का निवासी था.

इंडियन एक्सप्रेस की दूसरी रिपोर्ट में बताया गया कि पाथरगामा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत रानीपुर गांव के निवासी अंसारी, बिहार के बांका में श्याम पशु बाज़ार से घर लौट रहा था, तभी सुगाबाथन क्षेत्र में मटियानी फुटबॉल मैदान के पास यह घटना घटी. उसकी पत्नी आयशा बेगम की शिकायत पर 8 जनवरी को पोराइयाहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, अज्ञात व्यक्तियों ने पीड़ित की गाड़ी रोककर उससे पूछताछ शुरू कर दी. FIR में कहा गया है, “उन्होंने उसका नाम पूछा और फिर उस पर हमला किया”. इसके अलावा बताया गया है कि हमलावरों ने कुल्हाड़ी, फरसा और तीर जैसे धारदार हथियारों का इस्तेमाल करते हुए उनकी मौके पर ही हत्या कर दी और उनके शव को पास के खेत में फेंक दिया.
झारखंड की लोकल मीडिया उजागर न्यूज़ की एक वीडियो रिपोर्ट में भी मृतक पप्पू के परिजन ये सभी आरोप लगा रहे हैं.
इंडियन एक्सप्रेस को मृतक पप्पू के बहनोई फुरकान अंसारी ने बताया कि पप्पू के पास एक पिकअप ट्रक था और वे ट्रांसपोर्टर के रूप में काम करते थे. मवेशियों को एक बाज़ार से दूसरे बाज़ार तक ले जाते थे, यही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन था और वे कई वर्षों से यह काम वैध रूप से कर रहे थे.
9 जनवरी: मुंबई के धारावी में गौमांस के शक में हिंसा
9 जनवरी को मुंबई के धारावी में हिंदुत्ववादी समूहों ने मुस्लिम समुदाय के युवकों पर कथित गौमांस ले जाने के आरोप में हमला कर दिया. साथ ही समूह के लोगों ने उनके साथ गाली गलौज और मारपीट की और उनके टेम्पो गाड़ी पर भी हमला कर तोड़फोड़ किया. इतना ही नहीं, उन्होंने जय बजरंगी, हर हर महादेव, जय श्री राम जैसे धार्मिक नारे भी लगाये जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
Location: Dharavi, Mumbai
Three Muslim men—Aqib Sheikh, Salim, and Babar—were brutally assaulted by alleged VHP and Bajrang Dal members over accusations of carrying beef, while religious slogans were raised and their vehicle was vandalized. Police registered cases against five… pic.twitter.com/JZOifHXsQI
— The Muslim (@TheMuslim786) January 11, 2026
कई रिपोर्ट्स और पोस्ट के मुताबिक, कथित विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के सदस्यों ने तीन मुस्लिम पुरुषों आकिब शेख, सलीम और बाबर पर कथित गोमांस ले जाने के आरोप में बेरहमी से हमला किया. पुलिस ने इस मामले में पांच बजरंग दल कार्यकर्ताओं के खिलाफ और तीन पीड़ितों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है.
पीड़ित आकिब ने पुलिस के FIR में प्रारंभिक पूछताछ के दौरान और मीडिया को बताया कि वो लोग भैंस के मांस को देवनार बूचड़खाने से करीब 3 बजे गाड़ी में भरकर देवनार से धारावी के लिए ले जा रहे थे तभी हिंदुत्ववादी लोगों ने हिंसक हमला किया.
10 जनवरी: त्रिपुरा में हुई सांप्रदायिक हिंसा
10 जनवरी की सुबह त्रिपुरा के फटिकरॉय क्षेत्र में हिंदुत्ववादी समूहों ने मुस्लिम परिवारों के साथ मार पीट की. उनके घरों, दुकानों और एक मस्जिद में तोड़फोड़ कर आग और हिंसा की गई.
Location: Fatikray, Tripura
The Jama Masjid was vandalized and set on fire, and copies of the Holy Quran were burned.
Following a dispute that began over fundraising, Hindutva activists systematically vandalized, looted, and set fire to Muslim homes, shops, and vehicles. pic.twitter.com/ZlIoKkAFIz
— The Muslim (@TheMuslim786) January 10, 2026
इस हिंसा के बाद अस्पताल में भर्ती पीड़ित मसेबिर अली ने मकतूब मीडिया को हमले के बारे में विस्तार से बताया. पीड़ित के मुताबिक, 10 जनवरी की सुबह उसकी दुकान पर हिंदुत्व कार्यकर्ताओं के समूह आगामी हिंदू धार्मिक कार्यक्रम के लिए चंदा लेने आये थे. उसने उन लोगों से कहा कि मैं पहले ही पैसे दे चुका हूं और कुछ दिनों में और दे सकता हूं, लेकिन उन्होंने उसकी बात नहीं सुनी और किसी भी तरह से उसी समय पैसे की मांग करने लगे. फिर उन्होंने मासेबिर अली को पीटना शुरू कर दिया और यह हिंसा केवल उस पर हुए हमले तक ही सीमित न रहकर उसके घर, दुकानों, गाड़ियों में तोड़फोड़ तक आ गई. इतना ही नहीं, इस हिंसा की आँच में हिंदुत्ववादी समूह ने कई मुस्लिम घरों, दुकानों और एक मस्जिद में भी आग लगा दी.

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित मसेबिर अली समेत सैदरपारा-शिमुलतला और कुमारघाट क्षेत्रों के निवासियों ने आरोप लगाया कि आगजनी के दौरान घटनास्थल पर पुलिसकर्मी मौजूद थे लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.
इस घटना पर पुलिस अधीक्षक अविनाश कुमार राय ने पीटीआई को बताया कि हिंसा से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप में दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत फ़ोर्स क्षेत्र में लागू हैं और इंटरनेट सेवा अभी भी निलंबित है. साथ ही बताया कि किसी भी प्रकार की नई हिंसा की सूचना नहीं है.
कथित धर्मांतरण के आरोप लगाकर प्रार्थना सभा को भंग करना
नये साल की शुरुआत केवल धार्मिक पहचान या लक्षित हिंसा के तहत मारपीट तक ही सीमित नहीं रही बल्कि नए साल का पहला रविवार यानी 4 जनवरी को मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से कथित धर्मांतरण के आरोपों को लेकर हंगामा करने की घटना भी सामने आयी. हिंदूवादी संगठनों की भीड़ ने ईसाई समुदाय द्वारा चलाए जा रहे प्रार्थना सभा में जबरदस्ती घुसकर सभा को रोका और धर्मातरण करने के कथित आरोप लगाए. स्थानीय संगठनों के दबाव में पुलिस ने मामला भी दर्ज किया.
मध्यप्रदेश के श्योपुर शहर की घटना
ऐसी ही एक घटना मध्यप्रदेश के श्योपुर शहर के वार्ड 11 की अंबेडकर बस्ती से सामने आयी जहां अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराए जाने का आरोप लगाया गया. 4 जनवरी की सुबह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर बस्ती के एक मकान में प्रार्थना के जुटे कुछ लोगों पर प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया.
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दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद रविवार दोपहर करीब एक बजे शुरू हुआ. रेगर मोहल्ला निवासी अजय रेंगर की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. अजय का आरोप है कि सीताराम बैरवा और अन्य लोग अंबेडकर बस्ती में लोगों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे. शिकायत में कहा गया है कि इन लोगों ने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया और ईसाई अपनाने पर पैसे और मुफ्त शिक्षा का लालच दिया.
तो वहीं दूसरी ओर, अंबेडकर नगर के निवासियों ने भी पुलिस को एक आवेदन सौंप शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि बजरंग दल और आरएसएस से जुड़े कुछ लोग 4 जनवरी को जबरन उनके घरों में घुस आए और इन लोगों ने गेट तोड़ने की कोशिश की. इन लोगों ने महिलाओं को डराया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित किया.
पत्रिका की रिपोर्ट में आवेदन के विषय में लिखा है कि अंबेडकर नगरवासी पिछले 20 सालों से सत्संग कर रहे हैं. सभी बाबा साहब (भीमराव अंबेडकर) के अनुयायी हैं और वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. अंधविश्वास और कुप्रथाओं के खिलाफ जागरुक करते है.
उत्तर प्रदेश के वाराणसी ज़िले के दुनियापुर की घटना
उपरोक्त घटना के जैसे ही उत्तर प्रदेश के वाराणसी ज़िले के दुनियापुर में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के सदस्यों ने एक ईसाई प्रार्थना सभा पर अचानक छापा मारकर हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि ईसाई मिशनरी अवैध रूप से धर्मांतरण कर रहे हैं. साथ ही विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के सदस्यों ने दावा किया कि हिंदू महिलाओं को प्रलोभन देकर धर्मांतरित किया जा रहा है. बजरंग दल वालों ने प्रशासन से तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की.
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टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, कथित अवैध धर्मांतरण के आरोप के बाद पुलिस ने कादीपुर रेलवे स्टेशन और मदनपुर नहर पुलिया क्षेत्रों के पास मुकेश (51), कृष्ण कुमार मौर्य (38), इनोश जोसेफ (30) और रवि जोसेफ (54) को गिरफ्तार किया. रिपोर्ट में शामिल एक वीडियों में प्रार्थना सभा में उपस्थित भीड़ इस गिरफ्तारी का विरोध करते हुए नज़र आती है.
छत्तीसगढ़ के कांकेर की घटना
ऐसा ही कुछ हमें 4 जनवरी को छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के देवडोंगर गांव में देखने को मिला. जहाँ एक ग्रामीण सुखदर मंडावी के घर में आयोजित प्रार्थना सभा के दौरान हंगामा किया गया और प्रार्थना सभा का विरोध करते हुए आरोप लगाया गया कि सभा में प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा रहा था. साथ ही ग्रामीणों का कहना था कि गांव में बाहरी लोगों द्वारा इस तरह की गतिविधियां उनकी पारंपरिक मान्यताओं और मूल संस्कृति के खिलाफ हैं.

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मामले की सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी गई जिसके बाद से पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हालात को शांत कराया गया.
साल के पहले रविवार में हुए इन तीनों घटनाओं में हमें एक समान ही पैटर्न देखने को मिला. सभी में कथित धर्मांतरण के आरोप लगाते हुए ईसाई समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया. इन सभी घटनाओं में स्थानीय भीड़ या संगठनों का दबाव प्रशासन पर भी देखने को मिला.
उत्तरप्रदेश के उन्नाव की घटना
7 जनवरी को उत्तरप्रदेश के उन्नाव के सदर कोतवाली क्षेत्र में क्रिश्चियन प्रार्थना सभा को लेकर हंगामा की घटना सामने आयी. एक निजी मकान में चल रही प्रार्थना सभा के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर कथित धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
“आप ईसाई बनिए, खत्म करिए. क्यों आरक्षण की भीख लेके बैठे हैं.”
यूपी के उन्नाव में एक घर में ईसाई प्रार्थना सभा चल रही थी, जहां बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंच गए.
बजरंग दल का दावा है कि इस सभा में लोगों को बहला फुसलाकर धर्मांतरण कराया जा रहा है. घर के अंदर बड़ी संख्या में लोग… pic.twitter.com/PNBVenCWNw
— Priya singh (@priyarajputlive) January 7, 2026
रिपोर्ट के अनुसार, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक बंद कमरे में लगभग 25 से 30 महिलाओं और एक संदिग्ध व्यक्ति के एकत्रित होकर धर्म परिवर्तन कराने के दावा किया साथ ही उन्होंने धारा 144 लागू होने के बावजूद ऐसी सभा को नियमों का उल्लंघन और धर्मांतरण की बड़ी साजिश बताया. वहीं इस मामले में मिली सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना कोतवाली सदर पुलिस, एलआईयू और विशेष सूचना इकाई के सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस ने घर के अंदर मौजूद लोगों से पूछताछ की और स्थिति को नियंत्रण में लिया.
हालांकि, पुलिस जांच में धर्मांतरण की सूचना असत्य पाई गई और सदर कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि जांच के बाद धर्मांतरण का कोई प्रमाण नहीं मिला.
अगर हम 1 से 10 जनवरी 2026 हुईं इन उपरोक्त घटनाओं को देखें तो लगभग सभी घटनाओं में एक समान ही पैटर्न देखने को मिलता है. अफवाह या शक के आधार पर हिंसा या ‘धर्म’ को हथियार बनाकर निशाना बनाना या हिन्दुत्व भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेते हुए जिस तरह हेट क्राइम की कई घटनाएँ दर्ज हुईं हैं, वह देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल खड़े कर रही हैं.
सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें.
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