पाकिस्तान का पुराना वीडियो, नागपुर रेलवे स्टेशन में तमिल बच्ची मिलने के दावे से साझा

वर्दी पहने हुए व्यक्ति के गोद में एक बच्ची को दर्शाता वीडियो सोशल मीडिया में इस दावे से प्रसारित है कि बच्ची केवल तमिल भाषा बोल सकती है और नागपुर रेलवे स्टेशन पर मिली है।

 

This child speaks only tamil found in Nagpur Raliway station, now with station police. Pls share with all your groups until she reaches safely in her beloved parents good hands. Please try your best

Posted by Venket Mani on Wednesday, 12 December 2018

जैसा कि उपरोक्त पोस्ट से देखा जा सकता है, यह वीडियो समान संदेश के साथ सोशल मीडिया में 2018 से प्रसारित है। उपरोक्त पोस्ट को 34,000 से अधिक बार साझा और करीब 675,000 से ज़्यादा बार देखा जा चूका है। समान दावे से यह वीडियो फेसबुक और यूट्यूब पर भी प्रसारित हुआ है।

वीडियो में वर्दीधारी व्यक्ति खुद की पहचान ख्वाज़ा अजमेर नगरी थाना से सरफराज़ अमन के रूप में देते हैं। वीडियो में उन्होंने बताया कि बच्ची बहुत छोटी है और अपना नाम भी नहीं बता पा रही है। वह आगे इस वीडियो को प्रसारित करने के लिए कहते हैं ताकि यह वीडियो बच्ची के माता-पिता तक पहुंच पाए।

तथ्य जांच

वीडियो में प्राप्त हुई जानकारियों के माध्यम से, स्पष्ट होता है कि यह वीडियो भारत का नहीं है मगर शायद पाकिस्तान से संबधित हो सकता है। ऐसा इसीलिए मालूम होता है क्योंकि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों से मिलनेवाली वर्दी पहन रखी है। ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो से स्क्रीनशॉट लेकर उसे वीडियो से प्राप्त हुई जानकारियों के साथ रिवर्स सर्च किया। परिणामस्वरूप हमें एक यूट्यूब लिंक मिला। वीडियो को दिसंबर 2018 में एक कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था, “करांची की ख्वाजा अजमेर नगरी पुलिस ने गुम हुई बच्ची को दिसंबर 2018 में ढूंढ लिया”-अनुवाद।

ऑल्ट न्यूज़ को पाकिस्तानी उपयोगकर्ताओं द्वारा दिसंबर 2018 में साझा किये गए पोस्ट मिले, जिन्होंने इस वीडियो को उर्दू संदेश के साथ साझा किया था। इसके अलावा, ऑल्ट न्यूज़ ने गूगल मैप पर ‘ख्वाजा अजमेर नगरी’ सर्च किया और हमें इस बात की पुष्टि हुई कि यह वास्तव में सिंध के करांची में स्थित है। इसके अलावा, वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी की वर्दी सिंध से संबधित है, हालांकि सिंध पुलिस की वर्दी हाल ही में बदल दी गई है।

अंत में हमने अपनी जांच में पाया कि दिसंबर 2018 में ऑनलाइन साझा किये गए पाकिस्तान के करांची में लिए गए वीडियो को इस झूठे दावे से साझा किया गया कि नागपुर रेलवे स्टेशन पर एक तमिल बच्ची मिली है।

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