पिछले महीने मथुरा रेलवे स्टेशन से बच्चा उठा रहे एक शख्स का CCTV फ़ुटेज सामने आया. बाद में पुलिस को ये बच्चा भाजपा पार्षद के घर से मिला. पुलिस के अनुसार इस बच्चे का सौदा 1 लाख 85 हजार रुपए में हुआ था. इस वारदात के बाद से सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और खासकर व्हाट्सऐप पर बच्चा चोरी की अफ़वाहों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है. ध्यान दें कि ऐसी ही अफ़वाहें साल 2019 में खूब शेयर की गई थी. उस वक्त ऑल्ट न्यूज़ ने प्रखरता से इन अफ़वाहों की सच्चाई अपने पाठकों तक पहुंचाई थी.

एक बार फिर शेयर की जा रही इन अफ़वाहों की वजह कई जगहों पर भीड़ द्वारा संदिग्ध लोगों को पीटा जा रहा है. पिछले कुछ वक्त से सोशल मीडिया पर ये दावा काफी शेयर किया जा रहा है कि साधुओं के भेष में कुछ लोग घूम रहे हैं. और ये बच्चों को अगवा कर उनकी किडनी निकाल लेते हैं. हाल ही में ऐसा ही दावा करने वाला एक ऑडियो क्लिप और कुछ वीडियोज़ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा था. ऑल्ट न्यूज़ ने इनकी जांच करते हुए पाया कि ये वीडियोज़ मध्यप्रदेश के एक गांव में चोरी करने पहुंचे लोगों के पकड़े जाने का है. हाल ही में इन अफ़वाहों के कारण कई लोगों को पीटने के मामले सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश के सीतापुर में भी बच्चा चोरी की फ़र्ज़ी अफ़वाहों के चलते एक महिला को पीटा गया था. पुलिस इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए लगातार बयान जारी कर रही है. सीतापुर पुलिस ने इन अफ़वाहों का खंडन करते हुए बयान दिया था. वहीं मुरादाबाद पुलिस, बरेली पुलिस और हरदोई पुलिस ने भी इन अफ़वाहों को फ़र्ज़ी बताते हुए बयान जारी किया था.

हाल ही में 2 मिनट 20 सेकंड का एक वीडियो खूब शेयर किया जा रहा है. वीडियो में ‘द लाइव टीवी न्यूज़’ का लोगो दिख रहा है. इसमें कुछ साधु ज़मीन पर बैठे हैं और उनके आस-पास पुलिस खड़ी है. वहीं बैकग्राउंड में चल रहे वॉयसओवर में दावा किया गया है कि बनारस के बीरापट्टी गांव से 28 साधुओं को किडनी चोरी कर बच्चों को मौत के घाट उतारते हुए रंगे हाथों गिरफ़्तार किया गया. ट्विटर हैन्डल ‘@MrKhan1A’ ने ये वीडियो ट्वीट करते हुए ऐसा ही दावा किया. आर्टिकल लिखे जाने तक इस ट्वीट को 3500 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है. (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

ट्विटर हैन्डल ‘@ikramAli33’ ने भी ये वीडियो इसी दावे के साथ ट्वीट किया. (आर्काइव लिंक)

ट्विटर यूज़र डॉ. मोहम्मद शकीर खान ने इस वीडियो के साथ एक और वीडियो ट्वीट किया. इसमें कुछ बच्चों की लाश ज़मीन पर पड़ी दिख रही है और उनके आस-पास लोग रो रहे हैं. वीडियो के दृश्य संवेदनशील होने की वजह से ऑल्ट न्यूज ये वीडियो आर्टिकल में शामिल नहीं कर रहा है. (आर्काइव लिंक)

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ये वीडियो इसी दावे के साथ ट्विटर पर वायरल है. फ़ेसबुक पर भी ऐसे ही दावे के साथ वीडियो शेयर किया गया है.

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यूट्यूब पर इस घटना को अलग ऐंगल से रिकार्ड कर इसी दावे के साथ अपलोड किया गया है.

फ़ैक्ट-चेक

सबसे पहले तो ऑल्ट न्यूज़ ने ‘द लाइव टीवी न्यूज़’ का यूट्यूब पेज खंगाला. लेकिन हमें पता चला कि ये वीडियो डिलीट कर दिया गया है.

आगे, ऑल्ट न्यूज़ ने वायरल ट्वीट्स पर किये गए कमेंट्स देखे. वाराणसी ग्रामीण पुलिस ने वायरल ट्वीट्स पर जवाब देते हुए SP के बयान का वीडियो शेयर किया. वीडियो में पुलिस अधीक्षक, वायरल दावे का खंडन करते हुए कहते हैं कि बच्चा चोरों के पकड़े जाने की अफवाह पुरी तरह से फ़र्ज़ी है. उन्होंने बताया कि साधु भेष में भिक्षा मांगने का काम करने वाले लोगों से पूछताछ करने पर कोई संदेहजनक बात सामने नहीं आयी.

वाराणसी, ग्रामीण के सोशल मीडिया सेल ने इस मामले में एक लिखित बयान भी जारी किया है. बयान के मुताबिक, 1 सितंबर को बड़ागांव के इंद्रवार ग्राम में भिक्षा मांगने वाले साधुओं पर लोगों ने शक किया था. इसके चलते साधुओं को थाने में लाकर पूछताछ की गई. लेकिन जांच करने पर कोई आपराधिक गतिविधि नहीं पायी गई.

आगे, ऑल्ट न्यूज़ ने वाराणसी ग्रामीण के SP एस के त्रिपाठी से भी बात की. उन्होंने बताया कि ये दावा फ़र्ज़ी है. 28 साधुओं के गिरफ़्तार होने की बात पुरी तरह से गलत है. 4 या 5 साधु भिक्षा मांग रहे थे. उनपर गांववालों ने शक किया जिसके बाद पूछताछ की गई.

ऑल्ट न्यूज़ की टीम इसी दावे के साथ शेयर किये गए दूसरे वीडियो की जांच कर रही है. हमें बच्चों के शव वाले वीडियो के संबंध में कोई भी जानकारी मिलती है तो इस आर्टिकल को अपडेट किया जाएगा.

ऑल्ट न्यूज़ अपने पाठकों से रिक्वेस्ट करता है कि ऐसी अफ़वाहों पर ध्यान न दें. और सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे ऐसे दावों की सच्चाई जाने बिना कोई भी एक्शन न लें. संदेहजनक व्यक्ति दिखने पर पुलिस को सूचना दें लेकिन आवेश में आकार किसी भी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान न पहुंचाएं.

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