जून में असम में आई बाढ़ पर रिपोर्ट करते हुए द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि दक्षिणी असम का सबसे बड़ा शहर और बराक नदी के तट पर तीन ज़िलों का गेटवे, सिलचर, पूरी तरह पानी में डूब गया. “इस शहर के इतिहास में पहले कभी” ऐसा नहीं हुआ था. जुलाई के पहले हफ़्ते तक राज्य में मरने वालों लोगों की संख्या 170 के पार पहुंच गई थी.

26 जून को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि सिलचर में आई बाढ़ “मानव निर्मित” थी. उन्होंने कहा, “अगर बेतुकंडी में तटबंध को नहीं तोड़ा गया होता [जिसे लोगों ने तोड़ दिया था], तो ऐसा नहीं होता.” सिलचर से बेतुकंडी 10 किलोमीटर से भी कम दूर है.

जुलाई के पहले हफ़्ते में तटबंध तोड़ने में कथित संलिप्तता के लिए, इन चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया – काबुल खान, मिठू हुसैन लस्कर, नज़ीर हुसैन लस्कर और रिपन खान. बता दें डाइक या तटबंध एक ऐसी संरचना है जो आम तौर पर नदी के समानांतर वाले बाढ़ के मैदान में या निचले तटरेखाओं के साथ चलती है. इसका मकसद नदियों के रास्ते को बदलने से रोकना और नदी या तट से सटे क्षेत्र में बाढ़ से बचाव करना है.

‘मानव निर्मित’ आपदा से ‘बाढ़ जिहाद’ तक

5 जुलाई के आसपास मेनस्ट्रीम मीडिया के एक वर्ग ने इस कथित उल्लंघन को ‘बाढ़ जिहाद’ बताया. चैनल ने सिलचर में बाढ़ को लेकर प्राइम टाइम डिबेट आयोजित की थी. पैनल में पूर्व राजनयिक भास्वती मुखर्जी, गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी RVS मणि, ऑरेलियस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस के संस्थापक सुमित पीर (एक राजनीतिक विश्लेषक के रूप में) और ITV नेटवर्क (न्यूज़एक्स की मूल कंपनी) के संपादकीय निदेशक माधव नलपत थे. ऐंकर सहित सभी पैनलिस्टों की राय थी कि “बाढ़ जिहाद” हुआ है. (आर्काइव्ड लिंक)

पैनलिस्टों का स्वागत करने के बाद, ऐंकर मीनाक्षी उप्रेती ने पूछा, “… ये अनजाने में की गई शरारत की तरह नहीं लगता …क्या आप कहेंगे कि ये एक साधारण सी शरारत है या आप इसे एक भयावह साजिश की तरह देख रहे हैं… क्या आपको लगता है कि शायद … भारत सरकार को बहुत ज़्यादा सतर्क रहना चाहिए…” भास्वती मुखर्जी ने इस घटना को ” देश को आंतरिक नुकसान पहुंचाने का मामला” और “देशद्रोह का काम” कहा. मीनाक्षी उप्रेती को जवाब देते हुए माधव नलपत ने कहा कि ये घटना एक “सामूहिक हत्या की योजना” थी. सभी पैनलिस्टों ने कहा कि ये घटना भाजपा शासित राज्य को अस्थिर करने की एक कोशिश थी.

सुदर्शन न्यूज़ ने भी इसे “बाढ़ जिहाद” बताते हुए 1 घंटे का शो किया. सुरेश चव्हाणके ने शो ‘बिंदास बोल’ में कहा कि ये बाढ़ प्राकृतिक नहीं बल्कि ‘जिहादियों’ ने लाया है.

दैनिक जागरण ने “बाढ़ जिहाद” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. लेकिन रिपोर्ट में कहा, “इसके पीछे एक गहरी साजिश के संकेत मिले हैं.”

वनइंडिया ने विक्की नानजप्पा द्वारा लिखित एक आर्टिकल पब्लिश किया जिसका टाइटल था ‘फ्लड जिहाद: असम बाढ़ में जो दिखता है उससे कहीं ज़्यादा है.’ द फ्रस्ट्रेटेड इंडियन जैसे भाजपा समर्थक प्रोपगंडा संगठन ने भी इसी तरह की रिपोर्ट दी. (पहला आर्काइव लिंक और दूसरा आर्काइव लिंक)

अलग-अलग इन्फ्लुएंस वाले “पत्रकारों” ने भी इस घटना को “बाढ़ जिहाद” बताया जिनमें लाइव हिंदुस्तान के डिप्टी चीफ़ कंटेंट प्रोड्यूसर हिमांशु झा, इंडिया टुडे के एंकर गौरव सी सावंत, RSS के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र के वरिष्ठ संवाददाता निशांत आज़ाद, इयरशॉट के संस्थापक संपादक अभिजीत मजूमदार, पांचजन्य में विशेष संवाददाता अश्विनी मिश्रा और पत्रकार विक्की नानजप्पा शामिल हैं.

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भाजपा के OBC मोर्चा के राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी राहुल नागर ने भी यही दावा किया. उन्होंने चारों आरोपियों की एक क्लिप शेयर करते हुए लिखा, ‘पूरे असम को डुबोने में कामयाब, क्या नाम दें इसे अब. #floodjihad.” (आर्काइव्ड लिंक)

न्यूज़X, सुदर्शन न्यूज़ और अन्य ने सिलचर में आई बाढ़ को सांप्रदायिक ऐंगल दिया

न्यूज़X और अन्य मीडिया आउटलेट्स द्वारा कथित बेतुकंडी तटबंध तोड़े जाने को “बाढ़ जिहाद” बताए जाने के दो दिन बाद असम के सीएम श्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “ये कोई बड़ी बात नहीं है. जिहाद जैसे शब्दों के इस्तेमाल की कोई जरूरत नहीं थी. छोटे दिमाग वाले कुछ लोगों ने इस तरह का काम किया है.” हालांकि, उन्होंने “जिहाद” ऐंगल को ग़लत बताया. लेकिन सरमा अपने उस कथन पर अटक गए कि सिलचर में आई बाढ़ “मानव निर्मित” थी.

द हिंदू ने भारत मौसम विज्ञान विभाग का हवाला देते हुए बताया कि असम में प्री-मानसून सीजन (मार्च से मई) के दौरान सामान्य से 41% ज़्यादा बारिश हुई है और 25 जून तक सामान्य से 71 फीसदी ज़्यादा बारिश हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, असम के 1961 और 2010 के बीच वार्षिक सामान्य बारिश 2,239.4 मि०मी० रही है. हालांकि, 1 मार्च से 24 जून के बीच 1,891.9 मि०मी० बारिश हुई जो तीन महीने से भी कम समय के अंदर वार्षिक वर्षा स्तर के करीब है.

7 जुलाई को एक प्रेस इंटरव्यू में कछार के SP रमनदीप कौर ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार “बाढ़ जिहाद” सुना है. साथ ही उन्होंने इस घटना में किसी भी तरह के सांप्रदायिक ऐंगल का साफ तौर पर खंडन किया. उन्होंने न्यूज़ आउटलेट और अन्य लोगों से इस घटना को सांप्रदायिक ऐंगल नहीं देने का आग्रह किया. 1 मिनट 15 सेकेंड के आसपास उन्होंने कहा, “… कुछ दिनों पहले हमें सिंचाई विभाग से एक शिकायत मिली थी कि बांध [तटबंध] टूट गया था. उन्हें भी ये नहीं पता था कि बांध कैसे तोड़ा गया… हमारी प्रारंभिक जांच में हमें पता चला कि कुछ लोगों ने इसे तोड़ा था जिसके आधार पर चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है…”

Cachar SP Ramandeep Kaur warns against rumors on ‘Flood Jihad’

#Northeastlive | A new angle to the recent devastating flood in Silchar has come to the fore with a section of the media including news channels, web portals and social media have tried to give a new connotation to the calamity. The recent incident of devastating floods in Silchar caused as a result of breach at the Bethukandi dyke has even been termed by a section of the media and in various social media platforms as ‘Flood Jihad’.

Dismissing such claims, Cachar Superintendent of Police Ramandeep Kaur said that a section of the media encompassing platforms have attempted a give a communal angle to this dyke damage incident.

#floodjihad #silcharfloods #dyke #assamfloods #northeastlive

Posted by Northeast Live on Wednesday, 6 July 2022

4 जुलाई को SP रमनदीप कौर ने टेलीग्राफ़ को बताया कि सिंचाई विभाग ने 23 मई को बदमाशों द्वारा बेतुकंडी बांध को नुकसान पहुंचाने की शिकायत दर्ज़ कराई जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक, कथित ब्रीच 30 मीटर लंबी थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपी ने कथित तौर पर मई महीने में बेतुकंडी में जलजमाव को कम करने के लिए ब्रीच किया था. ईस्ट मोजो ने 19 मई को रिपोर्ट किया, “बारक घाटी में मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई, सैकड़ों प्रभावित.”

टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बेतुकंडी के निवासियों ने जलजमाव का स्थायी समाधान ढूंढने के लिए अधिकारियों से कई रिक्वेस्ट की थी. ऑल्ट न्यूज़ ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने वाले कई रीजनल पत्रकारों से बात की जिनमें से दो राष्ट्रीय समाचार पोर्टलों से जुड़े हैं. नाम न छापने की रिक्वेस्ट पर उन्होंने बताया कि जलभराव की समस्या की वजह से ये समुदाय इस तरह के कठोर उपाय करने, यानी कथित तौर पर तटबंध / बांध को तोड़ने के लिए प्रेरित हुआ था. इसके आलावा, उन्होंने ये भी कहा कि राज्य के अधिकारियों को तटबंध को बहुत जल्द ठीक करना चाहिए था. एक सोर्स ने टेलीग्राफ़ को बताया, “उन्हें बांध को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए था और प्रशासन को भी उपद्रवियों के खिलाफ़ समय पर कार्रवाई करनी चाहिए थी और समय पर ब्रीच को बंद करना चाहिए था.”

रीजनल फ़ोटोजर्नलिस्ट पार्थ शील ने 23 मई और 4 जुलाई की तटबंध की तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने बातचीत में बताया, “मेरी जानकारी के अनुसार, पुनर्निर्माण 26 जून के आसपास शुरू हुआ और 6 या 7 जुलाई तक पूरा हो गया था.”

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मई में स्थानीय समाचार आउटलेट वे टू बराक ने रिपोर्ट किया कि सिलचर WR डिवीज़न के एक एग्ज़ीक्यूटिव इंजिनियर ने राज्य सरकार को एक फ़ॉर्मल मेसेज भेजा. इसमें कहा गया, “सिलचर शहर के बेतुकंडी क्षेत्र, बेरेंगा क्षेत्र, रिंगबंड क्षेत्र, बगदाहर क्षेत्र में सबसे कमजोर बांध हैं, और इन क्षेत्रों में बाढ़ से भी खतरा है.” एक अन्य रीजनल मीडिया आउटलेट ने भी चेतावनी दी थी कि अगर अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की तो प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ आ सकती है.

कई मीडिया आउटलेट्स ने बताया है कि असम और अन्य राज्यों में तटबंध बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. टाइम्स नाउ ने लिखा है, “बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए तटबंधों का निर्माण 1950 के दशक से शुरू हुआ था. अब इसने एक प्रकार की “तटबंध अर्थव्यवस्था” को जन्म दिया है जिसमें हर साल तटबंधों के निर्माण, रखरखाव और मरम्मत में बड़ी मात्रा में पैसा लगाया जाता है. ये अक्सर उच्च बाढ़ के मौसम के दौरान पानी छोड़ देते हैं और फिर छोड़े गए पानी की तीव्रता से काफी ज़्यादा नुकसान होता है.”

सेंटिनल ने रिपोर्ट किया, “असम में लगभग 70% तटबंधों ने अपनी सीमा को पार कर लिया है जिससे हाल के सालों में राज्य में आई बाढ़ की हर लहर से बांध में आई दरार तबाही की व्याख्या करती नज़र आती हैं.” फ़र्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “सिर्फ तटबंध बनाना ही पर्याप्त नहीं है, कटाव से बचाव के लिए भी कदम उठाए जाने चाहिए और इसे एक साथ किए जाने की ज़रूरत है.”

ऑल्ट न्यूज़ ने असम विश्वविद्यालय, सिलचर के पारिस्थितिकी और पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफ़ेसर पार्थंकर चौधरी से बात की. उन्होंने कहा, ‘अगर बाढ़ का एकमात्र कारण ब्रीच का टूटना ही था तो संबंधित विभागों और प्रशासन ने समस्या पर तत्काल ध्यान क्यों नहीं दिया? ये काम युद्ध स्तर पर किया जाना था. इतनी ज़्यादा (<1900 मि०मी०) बारिश हुई थी और शहर ने मई के महीने में ही बाढ़ के पहले चरण का अनुभव कर लिया था. ‘सिलचर-बाढ़’ के लंबे समय तक समाधान के लिए सरकार को ‘वाटर कैनाल’ इंफ्रास्ट्रक्चर को मंजूरी देने पर विचार करना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “फिर भी, कुछ नेशनल न्यूज़ रिपोर्ट में इसे” बाढ़ जिहाद” कहा गया है. जब लोग पीड़ित थे तब वो रिपोर्ट नहीं कर पाए. हालांकि, अब जबकि स्थिति में सुधार हो रहा है, वो इसे सांप्रदायिक ऐंगल देकर घटना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं. जो बहुत ही शर्मनाक है.”

गौरतलब है कि CM हिमंत बिस्वा सरमा और SP रमनदीप कौर ने इस बात का खंडन किया है कि तटबंध के तोड़े जाने की कथित घटना, सांप्रदायिक रूप से प्रेरित थी. इसके अलावा, ऑल्ट न्यूज़ ने कई रीजनल पत्रकारों से बात की जिन्होंने कहा कि जलजमाव से राहत पाने के लिए ऐसा किया गया था.

मेनस्ट्रीम मीडिया आउटलेट द्वारा “जिहाद” शब्द के इस्तेमाल करके किसी घटना को सांप्रदायिक बताने का ये इकलौता मामला नहीं है. ज़ी न्यूज़ ने 2020 में एक पूरा शो “जिहाद” के अलग-अलग प्रकारों पर “रिपोर्ट” करते हुए किया था. इसमें “लव जिहाद” से “आर्थिक जिहाद” से “फिल्म और संगीत जिहाद” तक शामिल था. पुलिस ने ज़ी न्यूज के तत्कालीन प्रमुख सुधीर चौधरी के खिलाफ़ प्राथमिकी भी दर्ज़ की थी. उसी साल, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यक्रम पर रोक लगाने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया. इसके बाद भाजपा समर्थक न्यूज़ चैनल सुदर्शन न्यूज़ ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में मुस्लिम “घुसपैठ” पर एक विवादास्पद शो प्रसारित किया था. ऑल्ट न्यूज़ ने एक घंटे के प्रसारण में 6 झूठ का पर्दाफाश किया था. सुदर्शन न्यूज़ के प्रसारण को इंडियन पुलिस सर्विस एसोसिएशन ने “पत्रकारिता का सांप्रदायिक और ग़ैर ज़िम्मेदाराना” करार दिया गया था.

कुल मिलाकर, 23 मई को सिंचाई विभाग ने संबंधित पुलिस स्टेशन को सिलचर से 10 कि०मी० से भी कम दूरी पर स्थित बेतुकंडी तटबंध के कथित ब्रीच के बारे में शिकायत भेजी थी. सिलचर शहर 19 जून के आसपास पूरी तरह पानी में डूब गया. “इस शहर के इतिहास में पहले कभी” ऐसा नहीं हुआ था. जुलाई के पहले हफ़्ते में, चार मुस्लिम आदमियों को कथित तौर पर तटबंध तोड़ने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि मई में जलजमाव से राहत के लिए तटबंध को तोड़ा गया था. इस घटना के एक महीने से भी ज़्यादा समय के बाद, असम के मुख्यमंत्री ने सिलचर में आयी बाढ़ को “मानव निर्मित” आपदा बताया. इसके बाद कई मीडिया आउटलेट्स ने इस मामले को एंटी-मुस्लिम ऐंगल देते हुए ये रिपोर्ट किया कि बाढ़ एक “बड़ी साजिश” का हिस्सा है. आपदा की बारीकियों पर रिपोर्ट करने के बजाय मीडिया आउटलेट्स और पत्रकारों ने सिलचर में बाढ़ के लिए मुस्लिम समुदाय को दोषी ठहराने के लिए इस घटना को “बाढ़ जिहाद” बता दिया. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि रिपोर्ट ऐसे समय में पब्लिश की गई जब देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव का माहौल है.

कछार के SP रमनदीप कौर के अनुसार, जांच अभी जारी है. हालांकि, CM और SP दोनों ने घटना में किसी भी सांप्रदायिक ऐंगल की मौजूदगी से इनकार किया है.

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About the Author

Archit is a senior fact-checking journalist at Alt News. Previously, he has worked as a producer at WION and as a reporter at The Hindu. In addition to work experience in media, he has also worked as a fundraising and communication manager at S3IDF.