इंडिया टुडे के साथ कई मीडिया हाउसेज़ ने जामिया की CCTV फ़ुटेज ग़लत दावे के साथ दिखाई

15-16 फ़रवरी, 2020 की दरमियानी रात जामिया को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने 15 दिसंबर, 2019 को हुए लाइब्रेरी में पुलिस की बर्बरता का CCTV फ़ुटेज ट्वीट किया. ये वीडियो 45 सेकंड का था जिसमें पुलिस को छात्रों पर बेरहमी से डंडे बरसाते हुए देखा जा सकता है. ये लाइब्रेरी के अंदर का वीडियो है और पुलिस छात्रों को पीटते हुए वहां से भगाने की कोशिश कर रही है. ध्यान देने वाली बात ये है कि इसी घटना का 29 सेकंड का एक वीडियो वायरल हो रहा है.

16 फ़रवरी को शाम 5 बजे इंडिया टुडे ने अपने ‘एक्सक्लूज़िव’ प्रसारण में एक अन्य CCTV फ़ुटेज चलाया. जिसमें उन्होंने दावा किया कि ये वायरल वीडियो के चंद मिनटों पहले का सीन है.

प्रसारण के दौरान एंकर पूजा शेली, संवाददाता अरविंद ओझा से सवाल करती हैं – “हमें अच्छी तरह बताइए कि इस वीडियो में क्या दिख रहा है? क्यूंकि जो वीडियो रिलीज़ हुआ है उसमें कुछ स्टूडेंट्स दिख रहे हैं बैठे और पुलिस ने आके बेटेन चार्ज शुरु किया. इस वीडियो में क्या है?”

अरविंद ओझा – “देखिये सबसे पहले मैं बता दूं कि जो 29 सेकंड का वीडियो वायरल किया गया है वो डॉक्टर्ड वीडियो बताया जा रहा है. ऐसा हमारे सोर्सेज़ बता रहे हैं. लेकिन इंडिया टुडे के पास पहली बार हम आपको इंडिया टुडे पर दिखा रहे हैं लाइब्रेरी का वो CCTV फ़ुटेज जो न सिर्फ ऑथेंटिक है बल्कि अनकट है. ये CCTV फ़ुटेज 15 दिसंबर का है जब जामिया में वॉयलेंस हुई थी और इसमें साफ़ देखा जा सकता है कि कुछ जो स्टूडेंट है वो लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उसके बाद कुछ लड़के जो बाहरी हैं जिनके फ़ेस मॉफ़ल्ड (?) है, वो धीरे-धीरे करके अंदर लाइब्रेरी में दाखिल होते हैं. एक के बाद एक कई लड़के लाइब्रेरी के अंदर दाख़िल होते हैं और सबसे बड़ी बात कि उन लड़कों के हाथ में पत्थर भी है. ये अन-कट CCTV फ़ुटेज पहली बार इंडिया टुडे के हाथ लगा है जो हम अपने व्यूअर्स को दिखा रहे हैं. उसमें साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है कि जब CCTV के लास्ट मोमेंट में लड़के सब जो बाहरी हैं, वो अंदर आ जाते हैं, जो मॉफ़ल्ड (?) होते हैं, उनके हाथ में पत्थर है. उसके बाद लाइब्रेरी में जो एक मेज़ है, मेज़ से जो दरवाज़ा है उसको बंद किया जाता है. उसके बाद मेज़ से दरवाजे को सटा दिया जाता है. क्राइम ब्रांच के जो सोर्सेज़ हैं उन्होंने हमें बताया है कि इन लड़कों को जो इन रॉयट्स (riot) में शामिल थे, इन लड़कों का हम लगातार पीछा कर रहे थे, ट्रैक कर रहे थे. जब बाहर कई बसों को आग लगा दी गई थी तो ये लाइब्रेरी के अंदर दाख़िल हुए और पुलिस टीम लगातार इनका पीछा कर रही थी. ये लाइब्रेरी में जाकर छिप गए थे, जिसके बाद बैक साइड से दिल्ली पुलिस की जो टीम है, पैरामिलिट्री फोर्सेज़ के जवान, वो अंदर से दाख़िल हुए थे और तब इन लड़कों को पकड़ा गया था. तब बिल्कुल जैसा कि CCTV में दिख रहा है. तब इनपर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.”

कुछ देर बाद पूजा फ़िर से सवाल करती हैं- “इसमें कैसे पता चलेगा कि ये उस लाठी चार्ज से पहले का वीडियो है या उसके बाद का वीडियो है? ये मोमेंट्स इस वीडियो से कैसे सामने आते हैं?

अरविंद ओझा – “ये CCTV जो इंडिया टुडे के पास एक्सक्लूसिव लगा है, ये SIT के बहुत सीनियर अफसर हैं, उनसे हमने ये मांगा है. और लगातार चूंकि हम इस केस को ट्रैक कर रहे थे.”

इंडिया टुडे ने इस प्रसारण में पुलिस की बर्बरता को दर्शाने का प्रयास कम ही किया. ये ध्यान देने वाली बात है कि इंडिया टुडे को ये फ़ुटेज दिल्ली के स्पेशल इन्वैस्टिगेशन टीम (SIT) ने दिया था.

ऑल्ट न्यूज़ ने इस दावे की पड़ताल की है कि लाइब्रेरी के अंदर दाख़िल होने वाले स्टूडेंट्स के हाथ में पत्थर था. हमने पाया कि उस स्टूडेंट के एक हाथ में बटुआ था और दूसरे हाथ में फ़्लैट जैसी दिखने वाली कोई चीज (शायद फ़ोन) थी. ऑल्ट न्यूज़ की विस्तृत फ़ैक्ट-चेक रिपोर्ट यहां पढ़ी जा सकती है.

इंडिया टुडे ब्रॉडकास्ट फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने इन दोनों CCTV फ़ुटेज को कई बार देखा. पहले वीडियो में छात्रों की संख्या कम है, जबकि जिस वीडियो को इंडिया टुडे ने चलाया है उसमें काफी छात्र दिख रहे हैं. एक बेसिक फ़ैक्ट-चेक से पता चलता है कि ये दोनों वीडियो अलग है.

ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियोज़ को फ्रेम दर फ्रेम देखा. नतीजा ये निकला कि ये दो जगह के वीडियोज़ हैं. और ये दो अलग फ़्लोर के फ़ुटेज हैं. इस आर्टिकल में हम दोनों वीडियोज़ में दिख रहे बैकग्राउंड से पड़ताल करेंगे.

विज़ुअल एनालिसिस

यूट्यूब सर्च से हमें ‘द ट्रिब्यून’ का एक वीडियो मिला. ये वीडियो 20 दिसंबर को अपलोड किया गया था. हमने ‘द ट्रिब्यून’ से इस वीडियो के रॉ फ़ुटेज के लिए संपर्क किया जो कि उन्होंने हमें उपलब्ध कराया. इसे देखने पर कई चीज़ें सामने आईं. [यहां ये ध्यान दिया जा सकता है कि वीडियो में स्टूडेंट ने गलती से 15 दिसंबर की जगह 15 जनवरी कह दिया है.]

नीचे पोस्ट किए ‘द ट्रिब्यून’ के इस फ़ुटेज में कैमरा पर्सन को देखा जा सकता है जो फ़र्स्ट फ़्लोर [M. Phil/Post Graduate] पर लाइब्रेरी की तरफ रुख़ कर रहे हैं.

हमने ‘मुस्लिम मिरर’ की पत्रकार खुशबू ख़ान से संपर्क किया. वो 17 फ़रवरी को लाइब्रेरी गईं और वहां का जायज़ा लेकर हमें वीडियो भेजे. इस वीडियो में वो फ़र्स्ट फ़्लोर और सेकंड फ़्लोर पर बारी-बारी से जाकर दोनों जगहें दिखाती हैं.

एमफ़िल/पोस्ट ग्रेजुएट लाइब्रेरी सेक्शन का फ़र्स्ट फ़्लोर

इस सेक्शन के वीडियो एनालिसिस में हम फ़र्स्ट फ़्लोर पर छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज के वायरल हो रहे वीडियो की बात करेंगे.

नीचे पोस्ट किए गए कोलाज में बायीं तरफ़ CCTV फ़ुटेज से ली गई तस्वीर है जबकि दायीं तरफ़ खुशबू ख़ान के वीडियो से ली गई स्क्रीनशॉट है.

नीचे तस्वीरों के कोलाज में बायीं तरफ सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही CCTV फ़ुटेज से ली गई तस्वीरें हैं. वहीं दायीं तरफ ‘द ट्रिब्यून’ के वीडियो से ली गई तस्वीरें हैं.

1. CCTV फ़ुटेज और ‘द ट्रिब्यून’, दोनों के वीडियो में एक समान खिड़कियां दिख रही है.

2. एक और समानता दोनों वीडियोज़ में दिखती है – पिलर पर सफ़ेद रंग का काग़ज़.

3. नीचे पोस्ट किए गए वीडियो में स्टूडेंट कहता है – “ज़्यादातर लोगों को वहां मार रहे थे कॉर्नर में. हमने ये इस्टेब्लिश करने के लिए दोनों वीडियो के विज़ुअल्स को लूप में चलाया. जैसा कि स्टूडेंट कहता है, CCTV फ़ुटेज में पुलिस छात्रों को कोने में पीटती नज़र आ रही है.

एमफ़िल/पोस्ट ग्रेजुएट लाइब्रेरी सेक्शन का दूसरा फ़्लोर

नीचे पोस्ट किये गए कोलाज में बायीं तरफ ‘इंडिया टुडे’ के वीडियो से ली गयी (फ़र्स्ट फ़्लोर की) तस्वीर है. वहीं दायीं तरफ सेकंड फ़्लोर की CCTV फ़ुटेज का ग्रैब है.

हमें इस टूटे हुए दरवाज़े की एक तस्वीर गेटी इमेजेज़ पर मिली. वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक़ इसे घटना के दो दिन बाद यानी 17 दिसंबर को लिया था.

नीचे पोस्ट की गई तस्वीर में हमने ‘द ट्रिब्यून’ से मिले रॉ फ़ुटेज की तुलना गेटी इमेजेज़ की तस्वीर से की है. जैसा कि साफ़ तौर पर देखा जा सकता है, ये दोनों तस्वीरें एक ही जगह की है.

getty images comparison

ऑल्ट न्यूज़ 15 दिसंबर 2019 के सेकंड फ़्लोर के CCTV कैमरा के रॉ फ़ुटेज हासिल करने में कामयाब रहा. हमने गेटी इमेजेज़ पर 17 दिसंबर, 2019 को अपलोड की गई तस्वीर की तुलना CCTV फ़ुटेज में जो भी दिख रहा है, उससे की. वीडियो में साफ़ दिखाई देता है कि एक पुलिसवाला कैमरे को नुकसान पहुंचाता है. और कैमरा टूटता नहीं है, बस नीचे की ओर झुक जाता है. चालू हालत में रहता है. अब कैमरे में जो कैद हो रहा है, उसमें ज़मीन पर पड़ा लकड़ी का टुकड़ा, मेज़ पर रखा बैग और कुछ पेपर, दिख रहे हैं. गेटी इमेजेज़ से मिली तस्वीरों में भी एकदम यही दिखाई पड़ता है. नीचे इन दोनों को आमने-सामने रखकर दिखाया गया है.

इस तरह कई सबूतों के आधार पर ऑल्ट न्यूज़ ये वेरीफाई करने में सफल रहा कि इंडिया टुडे द्वारा चलाया गया CCTV फ़ुटेज सेकंड फ़्लोर का है.

दोनों फ़्लोर में आने-जाने के लिए सिर्फ एक बाहरी रास्ता

ये ध्यान दिया जाए कि वीडियो में दोनों फ़्लोर में लाइब्रेरी के अंदर जो सीढ़ियां दिखती हैं, वो बंद रहती हैं. इसका मतलब ये है कि ऊपर से नीचे के रीडिंग रूम में आने के लिए सिर्फ़ एक बाहरी दरवाज़ा है. हमसे इस बात की पुष्टि जामिया के कई लोगों ने की.

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घटनाक्रम जिसे इंडिया टुडे ने समझने में गलती की

फ़र्स्ट फ़्लोर का दरवाज़ा ज्यों का त्यों था. लेकिन सेकंड फ़्लोर का दरवाज़ा पुलिस ने तोड़ा था. इसके अलावा हमने लाइब्रेरी के एडमिनिस्ट्रेशन से भी बात की. उन्होंने पुष्टि की कि जामिया को-ऑर्डिनेशन कमिटी द्वारा शेयर की गई वीडियो फ़र्स्ट फ़्लोर की थी. इंडिया टुडे ने जो वीडियो चलाया, वो असल में सेकंड फ़्लोर का था जहां स्टूडेंट्स ने दरवाज़ा ब्लॉक किया था. लेकिन उन्होंने दावा किया कि ये फ़र्स्ट फ़्लोर की लाइब्रेरी का वीडियो है.

ऑल्ट न्यूज़ ने ये भी पता किया कि इंडिया टुडे जिस स्टूडेंट को हाईलाइट करके उसके हाथ में पत्थर दिखा रहा था, वास्तव में उस स्टूडेंट के हाथ में बटुआ था. यहां तक कि इंडिया टुडे ने अपने ब्रॉडकास्ट में सेकंड फ़्लोर के CCTV फ़ुटेज का छोटा किया हुआ वीडियो चलाया. और इसे फ़र्स्ट फ़्लोर पर हुए पुलिस लाठीचार्ज से तुरंत पहले का बताया. ये दावा कतई ग़लत था.

चैनल ने सिर्फ़ ये दिखाया कि स्टूडेंट्स दरवाजा ब्लॉक कर रहे हैं. लेकिन पूरी घटना ये है कि स्टूडेंट्स रूम में घुसते हैं, दरवाजा ब्लॉक करते हैं, पुलिस दरवाजा तोड़ती है और लाठी-डंडों से स्टूडेंट्स को पीटती है इसके बाद CCTV कैमरा को भी तोड़ देती है.

Delhi Police beats up Jamia students

In a third video, one which seems to be the continuation of the video released by Delhi Police, police officials are seen entering into the Jamia Millia Islamia Reading Room for PG students on December 15, where students can be seen barricading themselves. What follows is horrific visuals of police beating students, as many of them approach with palms folded. The video shows students piling up against each other, to escape being hit. In the background, a student is seen receiving blows to his head. The video ends with a police official attempting to break the CCTV camera which is recording this video.

The Delhi Police denies having entered Jamia Millia Islamia on December 15.

Credit: Maktoob

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Posted by Firstpost on Monday, 17 February 2020

ऑल्ट न्यूज़ ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक वीडियो भी अपलोड किया है. ज़रूर देखें.

अन्य मीडिया संगठनों ने भी दोहराया

इसके बाद कई मीडिया संगठनों ने भी ये क्लिप चलाते हुए यही दावा किया कि ये फ़ुटेज उसी रूम (फ़र्स्ट फ़्लोर) की है और दूसरे CCTV कैमरे से ली गई है. ऐसा दावा करने वाले अंग्रेजी समाचार चैनल हैं- NDTV. मिरर नाउ, रिपब्लिक और टाइम्स नाउ. कुछ हिंदी चैनलों ने भी ये दावा किया है जैसे –  ज़ी न्यूज़, आज तक, रिपब्लिक भारत और न्यूज़ नेशन.

राइट-विंग वेबसाइट ऑपइंडिया और स्वराज्य ने भी इस तरह की रिपोर्टिंग की है.

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