सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें पानी बहता हुआ दिख रहा है. दावा किया जा रहा है कि ये दक्षिण भारत की पितृ नदी है. ये पितृ पक्ष की अमावस्या को आती है और दीवाली, यानी अमावस्या को गायब हो जाती है. इसे प्रकृति का अद्भुत चमत्कार बताते हुए शेयर किया जा रहा है. फ़ेसबुक पेज ‘Mahadev ke Puyuzjari’ ने ये वीडियो पोस्ट करते हुए यही दावा किया.

फ़ेसबुक यूज़र दीपिका सोलंकी ने ये वीडियो इसी दावे के साथ पोस्ट किया.

फ़ेसबुक और ट्विटर पर ये वीडियो वायरल है. ऑल्ट न्यूज़ के व्हाट्सऐप हेल्पलाइन नंबर पर भी इस वीडियो की जांच के लिए कुछ रीक्वेस्ट आयी हैं.

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यूट्यूब पर भी 2018 में ये वीडियो इसी दावे के साथ अपलोड किया गया था.

फ़ैक्ट-चेक

फ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर ऑल्ट न्यूज़ को ये वीडियो साल 2017 में पोस्ट किया हुआ मिला. 19 सितंबर 2017 के यूट्यूब वीडियो के साथ बताया गया था कि ये तमिलनाडु के मायावरम शहर का वीडियो है जहां कावेरी नदी का पानी बहता हुआ पहुंचा है. इसके अलावा, और भी कई यूज़र्स ने 2017 में ये वीडियो तमिलनाडु का ही बताते हुए अपलोड किया था. (लिंक 1, लिंक 2, लिंक 3)

आगे, सर्च करने पर हमें 11 सितंबर 2017 की द हिन्दू की रिपोर्ट मिली. इसके मुताबिक, तमिलनाडु के माइलाधूतुराई में 12 से 24 सितंबर, 2017 तक कावेरी महा पुष्करम मनाया जाने वाला था.रिपोर्ट में बताया गया था कि इस मौके पर लाखों की संख्या में भक्त कावेरी नदी में डुबकी लगाने के लिए पहुंचने वाले थे.

10 सितंबर 2017 की डेकन क्रॉनिकल की रिपोर्ट में बताया गया था कि पुष्करम कमिटी के कोऑर्डिनेटर ने कर्नाटका सरकार से दरख्वास्त की थी कि वो कावेरी नदी का पानी छोडें ताकि महा पुष्करम त्योहार बिना किसी रुकावट के मनाया जा सके.

19 सितंबर 2017 की द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटका सरकार ने मेत्तुर डैम से कावेरी नदी का पानी छोड़ दिया था. इसके चलते, कई लोग कावेरी नदी की पूजा करने के लिए किनारे पर इकट्ठा हुए थे.

इंडिया टुडे ने भी इस वीडियो के बारे में 2019 में फ़ैक्ट-चेक आर्टिकल पब्लिश किया था.

कुल मिलाकर, तमिलनाडु में कावेरी पुष्करम त्योहार के चलते कर्नाटका सरकार ने 2017 में बांध खोलकर कावेरी नदी का पानी छोड़ा था. ये पानी कुदरती कारणों से नहीं आया था. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर चमत्कार बताते हुए शेयर किया गया.


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