“सेना का जवान कश्मीरी युवाओं के जूते चुरा रहा है * बूट चोर” दो जोड़ी जूते लिए भारतीय सेना के एक जवान की एक तस्वीर को फेसबुक पेज, कश्मीर (Kashmir) द्वारा उपर्युक्त संदेश के साथ शेयर किया गया था। इसके साथ यह दावा किया गया है कि तस्वीर में दिख रहा जवान कश्मीरी युवाओं के जूते चुरा रहा है। यह पोस्ट करीब 1900 बार शेयर किया गया है।

army man stealing shoes of kashmir youth*

boot choor

Posted by Kashmir on Monday, October 22, 2018

कई यूजर्स ने ऐसे ही दावों के साथ फेसबुक पर यही तस्वीर शेयर की है। इस लेख को लिखते वक्त तक पोस्ट को 3000 से अधिक शेयर किया गया था।

सच क्या है?

इस तस्वीर पर छपी जानकारी (PEERZADA WASEE 2018/पीरज़ादा वसी 2018) के आधार पर, ऑल्ट न्यूज़ ने भारतीय समाचार सेवा (Indian News Service) से जुड़े एक फोटोग्राफर पीरज़ादा वसीम से संपर्क किया। वसीम ने कहा, “जहां तक ​​मुझे याद है, मैंने 13 सितंबर, 2018 को यह तस्वीर ली थी। उस समय, सोपोर के अरामपोरा शहर में बंदूक की गोलीबारी हुई थी जिसमें सैनिकों ने दो आतंकवादी मारे थे। इसलिए मुठभेड़ के बाद, वह सैनिक मारे गए संदिग्ध आतंकवादी के जूते ले जा रहा था।” उन्होंने आगे कहा कि जिस संदर्भ के साथ सोशल मीडिया पर यह तस्वीर शेयर की जा रही है, वह सच नहीं है। वसीम ने उस तस्वीर को अपने ट्विटर अकाउंट से पोस्ट भी किया था।

वसीम ने ऑल्ट न्यूज़ को ईमेल से मूल तस्वीर भेजी। EXIF डेटा (EXIF: Exchangeable image file format/विनिमय योग्य तस्वीर फ़ाइल प्रारूप) देखकर, हमने सत्यापित किया कि यह तस्वीर वास्तव में 13 सितंबर को दोपहर 2:44 बजे ली गई थी।

वही जूते एक और कश्मीरी पत्रकार की तस्वीर में भी देखे जा सकते हैं, जो मारे गए आतंकवादियों से बरामद हथियार और गोला बारूद दिखाता है।

हमने नीचे दोनों तस्वीरों को एकसाथ में रखा है जिसमें जूते के दोनों जोड़े वास्तव में समान दिखते हैं।

13 सितंबर, 2018 को टेलीग्राफ द्वारा प्रकाशित एक लेख में भी पुष्टि की गई है कि सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में, बारामुला जिले में सोपोर के अरामपोरा के पास दो आतंकवादी मारे गए थे।

ग़लत
दावा:
सेना के जवाव कश्मीरी युवाओं के जूते चुरा रहे

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