16 फ़रवरी को ट्विटर और फ़ेसबुक पर एक दावा खूब शेयर किया जाने लगा. मेसेज के मुताबिक, स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने पेड़ बचाने के लिए चीन की सरकार को चॉपस्टिक का उपयोग न करने के लिए कहा. पूरा मेसेज कुछ यूं है – “इस बात के लिए मुझे चीन के लोग पसंद आये. ग्रेटा ने पेड़ बचाने के लिए चीन के लोगों को चॉपस्टिक छोड़ने के लिए कहा. इस बात पर चीन ने ग्रेटा और उनके दोस्तों को स्कूल वापस जाने के लिए कहा ताकि वो ये जान सकें कि चॉपस्टिक बांस से बनता है जो कि एक घास है. उन्होंने ग्रेटा को ये सलाह दी कि टिश्यू का इस्तेमाल न करें क्योंकि वो पेड़ से बनता है.”

ट्विटर हैन्डल “@SortedEagle” ने ये दावा ट्वीट किया है.

कॉलमिस्ट राकेश थैया ने भी ये दावा ट्वीट किया.

80 हज़ार फ़ॉलोवर्स वाले फ़ेसबुक पेज ‘हिन्दू’ ने भी ये दावा पोस्ट किया है.

फ़ेसबुक यूज़र्स ट्विटर हैन्डल “@SortedEagle” के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं.

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फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने ट्विटर पर अडवान्स की-वर्ड्स सर्च करते हुए ग्रेटा के चॉपस्टिक पर बैन लगाने के दावे को ढूंढा. लेकिन हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली जो इस दावे की पुष्टि करती हो.

मीडिया में भी ग्रेटा के ऐसे किसी दावे को लेकर कोई खबर नहीं है. इसके अलावा, चीन की ओर से ग्रेटा को टिश्यू का इस्तेमाल न करने की सलाह वाली बात भी गलत मालूम पड़ती है.

2006 में BBC ने खबर दी थी कि चीन कि सरकार ने लकड़ी के चॉपस्टिक पर 5 प्रतिशत का टैक्स लगाया था ताकि जंगल बचाये जा सकें. 2013 की द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मेजर फ़ॉरेस्ट्री ग्रुप के हेड बो ग्वोंशी ने संसद में बताया था कि हर साल डिस्पोज़ेबल चॉपस्टिक की आदत के कारण चीन 2 करोड़ पेड़ों की खपत करता है. उस साल साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने भी यही खबर दी थी.

पिछले साल, नॉर्वे के ‘Faktish‘, अमेरिका के स्नोप्स और रॉइटर्स ने भी इस दावे को खारिज किया था. स्नोप्स और रॉइटर्स के आर्टिकल के मुताबिक, इस फ़र्ज़ी दावे को शुरुआत में शेयर करने का उदाहरण 15 जनवरी 2020 (IST) का है. ट्विटर हैन्डल ‘@Geoloong’ ने उस वक़्त ये दावा शेयर किया था.

Faktish‘ के मुताबिक, एक कवॉरा यूज़र ने 20 जनवरी 2020 को पोस्ट किया था, “आप ग्रेटा के चीन को चॉपस्टिक पर बैन लगाने की राय के बारे में क्या सोचते हैं?” इस सवाल के जवाब में आर्टिकल लिखे जाने तक1 करोड़ से भी ज़्यादा लोगों ने रिप्लाइ किया है. इसके कुछ वक़्त बाद कुछ रशियन भाषीय ब्लॉग ने भी यही दावा किया था. (पहला लिंक, दूसरा लिंक, तीसरा लिंक, चौथा लिंक)

रॉइटर्स ने बताया था कि पिछले साल ऐसा ही मगर एक अलग दावा शेयर किया गया था. सिर्फ़ इस दूसरे दावे में चीन को जापान से बदल दिया गया था. आर्टिकल में बताया गया था कि फ़ेसबुक पर डच और डैनिश भाषा में भी ये दावा शेयर किया गया था.

हाल ही में दिल्ली पुलिस ने ग्रेटा थुन्बेरी द्वारा किसान आंदोलन के समर्थन में शेयर की गई टूलकिट एडिट करने के आरोप में दिशा रवि नामक बेंगलुरू की पर्यावरण कार्यकर्ता को गिरफ़्तार किया है. इस दौरान, ग्रेटा भी विवादों का हिस्सा बनी रहीं. इसके चलते, ग्रेटा से जुड़ा ये फ़र्ज़ी दावा भारतीय सोशल मीडिया पर शेयर किया गया.

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About the Author

Archit is a graduate in English Literature from The MS University of Baroda. He also holds a post-graduation diploma in journalism from the Asian College of Journalism. Since then he has worked at Essel Group's English news channel at WION as a trainee journalist, at S3IDF as a fundraising & communications officer and at The Hindu as a reporter. At Alt News, he works as a fact-checking journalist.