कई लोगों से घिरे हुए बाबा रामदेव की एक तस्वीर व्हाट्सएप पर वायरल है। इन लोगों में से एक मास्क पहने हुए श्री श्री रविशंकर हैं, जो उन्हें पानी का गिलास दे रहे हैं। तस्वीर को इस दावे के साथ साझा किया जा रहा है कि बाबा रामदेव घुटने की सर्जरी के लिए जर्मनी गए थे। इस तस्वीर के साथ प्रसारित संदेश में कहा गया है, “करो योग, रहो निरोग” योग गुरु रामदेव के घुटनो का जर्मनी में सफल ऑपरेशन!! “तुम स्वदेशी अपनाओ” ये आदमी ही कहता था ना… मूत्र पीने और गोबर खाने से फलां रोग ठीक होता है ढिमका रोग ठीक होता है? …….. खुद खाता नहीं दूसरों को खिलाता है।”

फेसबुक और ट्विटर पर भी इस तस्वीर को समान दावे के साथ साझा किया गया है।

तथ्य-जांच

इस तस्वीर की गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर, ऑल्ट न्यूज़ को 2011 में प्रकाशित किए गए कई लेख मिले, जिनमें यह तस्वीर दी गई है। द हिंदू बिजनेस लाइन, जिसने पीटीआई की एक रिपोर्ट को पुनर्प्रकाशित किया था, लेख में कहा गया था कि बाबा रामदेव भ्रष्टाचार विरोधी कड़े कानून की मांग को लेकर 4 जून 2011 से भूख हड़ताल पर थे। 10 जून 2011 को हरिद्वार में उनके पतंजलि योगपीठ आश्रम में उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें उत्तराखंड के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। द हिंदू बिजनेस लाइन ने इस तस्वीर का वर्णन करते हुए लिखा है कि — “आर्ट ऑफ़ लिविंग गुरु श्री श्री रविशंकर (बीच में) और मोरारी बापू ने रविवार को देहरादून के एक अस्पताल में योग गुरु बाबा रामदेव के नौ दिवसीय उपवास को तोड़ने के लिए उन्हें रस दिया। रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण दाएं दिख रहे हैं। – पीटीआई” -(अनुवाद)

इंडिया टुडे ने बताया था कि रामदेव को हिमालयन अस्पताल, जॉली ग्रांट में आईसीयू में ले जाया गया था, जहां उन्हें जबरन ग्लूकोज़ दिया गया। लेख में यह भी कहा गया है कि श्री श्री रविशंकर रामदेव को देखने अस्पताल गए थे।

निष्कर्ष के रूप में 2011 में उत्तराखंड के एक अस्पताल में भर्ती बाबा रामदेव की तस्वीर को इस दावे के साथ साझा किया जा रहा है कि जर्मनी में उन्होंने अपने घुटने की सर्जरी करवाई, जो गलत है।

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