सोशल मीडिया पर 18 सेकंड की एक वीडियो क्लिप वायरल है. वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी लाठीचार्ज करते हुए दिख रहे हैं. इसे शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि कानपुर में पुलिस ने ‘जिहादी पत्थरबाज़ों’ की पिटाई की. दरअसल ये वीडियो कानपुर में हाल में हुई हिंसा के संदर्भ में शेयर किया जा रहा है. कानपुर में मुस्लिम संगठन नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद को लेकर दिए गए बयान का विरोध कर रहे थे. इन दौरान हिंसा फैल गई थी.

हिन्दु युवा वाहिनी गुजरात प्रदेश के प्रभारी योगी देवनाथ ने ये वीडियो ट्वीट किया. उन्होंने दावा किया कि कानपुर में हिंसा के बाद पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की पिटाई की. (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

दैनिक भास्कर ने भी ये वीडियो कानपुर में हुई हिंसा का फ़ुटेज बताकर चलाया.

ट्विटर हैन्डल ‘@jimmyjvyas’ और ‘@Delli_Ka_Munda’ ने भी ये वीडियो कानपुर में हाल में हुई हिंसा का बताया. (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

फ़ेसबुक से लेकर ट्विटर तक ये वीडियो इसी दावे के साथ वायरल है.

 

फ़ैक्ट-चेक

वायरल वीडियो की असलियत का पता लगाने के लिए ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो के एक फ़्रेम को यांडेक्स पर रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें ये वीडियो यूट्यूब पर 28 मार्च 2020 को अपलोड किया हुआ मिला. वीडियो के कैप्शन में इसे मुंब्रा के कौसा का बताया गया है. ध्यान दें कि मुंब्रा महाराष्ट्र के ठाणे में है.

यूट्यूब चैनल हिन्दुस्तानी रिपोर्टर ने इस घटना के बारे में ख़बर दी थी. वीडियो रिपोर्ट में वायरल वीडियो का हिस्सा 1 मिनट 12 सेकंड के बाद से शुरू होता है. चैनल के मुताबिक, ठाणे के कौसा श्रीलंका इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2 नगरसेवक, राजू और रिहान के गुटों के बीच विवाद हुआ था. 27 मार्च 2020 को रात 11:30 बजे के आसपास इनके बीच झड़प हुई थी. पुलिस ने मामले पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज किया था. ये वीडियो इसी लाठीचार्ज का है.

9 अप्रैल 2020 को पत्रिका ने इस वीडियो का फ़ैक्ट-चेक किया था. तब ये वीडियो इंदौर का बताकर शेयर किया जा रहा था. पत्रिका से बात करते हुए मुंब्रा पुलिस ने बताया था कि ये वीडियो मुंब्रा के कौसा श्रीलंका एरिया का है. 2 गुटों के बीच हुए विवाद के बाद भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.

यहां ये बात तो साफ हो जाती है कि ये वीडियो साल 2020 का है. और इसका हाल में कानपुर में हुई हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है.

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