सुदर्शन न्यूज़ ने एडिटेड वीडियो प्रसारित किया, कहा RSS कार्यकर्ता की हत्या के नारे लगे

“पूरे भारत मे मज़हबी उन्मादियों का खौफनाक रूप सड़को पर. नंगी तलवारों के साथ लग रहे नारे- चड्ढा चड्ढी वालों को, गोली मारो सालों को. मौत का इशारा @RSSorg व अन्य हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं की तरफ. @HMOIndia @AmitShahOffice @AmitShah @narendramodi @PMOIndia @naqvimukhtar”

सुदर्शन न्यूज़ द्वारा एक वीडियो को उपरोक्त दावे के साथ साझा किया गया है, जिसमें लोगों को कथित तौर पर,“अल्लाह -ओ -अकबर, तबरेज़ के हत्यारों को मार डालो, आरएसएस मुर्दाबाद, हाफ पैंट वालो को गोली मारो, तबरेज़ का खून क्रांति लाएगा” का नारा लगाते हुए सुना जा सकता है।

उपरोक्त दावे के साथ सुदर्शन न्यूज़ द्वारा साझा गए वीडियो को 2.7K बार रीट्वीट किया जा चूका था।

सुदर्शन न्यूज़ द्वारा डिलीट कर दिया गया वीडियो नीचे देखा जा सकता है।

इसी वीडियो को ट्विटर पर डॉ.जीतेन्द्र नागर (@NagarJitendra) ने संदेश,“भोपाल मे सडको पर डरे हुए शांतिदूत @RSSorg के खिलाफ हाथो मे गंडासे और तलवारें ले के निकले है… इसमे एक अंतराष्ट्रीय षडयंत्र नजर आता है कि किसी भी तरह देश मे भय का वातावरण बने और विश्वमंच पर मोदीजी और भारत को बदनाम किया जा सके। MP मे कोंग्रेस की सरकार है तो साजिश ही हो सकती है” के साथ साझा किया है।

30 जून को इस वीडियो को कुछ फेसबुक पेज द्वारा भी साझा किया गया है।

सच क्या है

ऑल्ट न्यूज़ ने इस वीडियो को इनविड के ज़रिये कई की-फ्रेम में तोड़ा। इन की-फ्रेम को गूगल पर रिवर्स सर्च करने से, इसी वीडियो के जैसा एक वीडियो मिला, जिसे 17 नवंबर, 2017 को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था। वीडियो के साथ किये गए दावे में इसे डेहरी के मुहर्रम जुलुस का बताया गया था। सुदर्शन न्यूज़ द्वारा प्रसारित वीडियो से विपरीत, यह वीडियो मॉब लिंचिंग के शिकार तबरेज़ अंसारी के लिए दिए गए भड़काऊ बयान को नहीं दिखाता है। ऑडियो में लाउड स्पीकर में सुना सकता है कि,“धीरे धीरे बढ़ते रहे…आपसे गुज़ारिश है कि धीरे धीरे बढ़ते रहे”। पीछे पारम्परिक मोहर्रम से नारे “हसन हुसैन” को सुना जा सकता है।

यह बताने के लिए कि सुदर्शन न्यूज़ द्वारा एक पुराना वीडियो प्रसारित किया गया है, हमने सुदर्शन न्यूज़ द्वारा प्रसारित वीडियो और 2017 के यूट्यूब के वीडियो की फ्रेम की तुलना की है, जिसे आप लेख में नीचे देख सकते हैं। नीचे दी गई दोनों तस्वीरों में, हाथों में पकड़ा हुए नीले रंग के मोबाइल को देखा जा सकता है। हालांकि, असली वीडियो में सुदर्शन न्यूज़ द्वारा दिखाए गए एक भी नारों को सुना नहीं जा सकता है। इसके अलावा, यह 2017 का वीडियो है, जून 2019 में झारखंड में हुई तबरेज़ अंसारी की मॉब लिंचिंग से संबधित कोई भी विरोध प्रदर्शन को नहीं दिखाता है।

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि सुदर्शन न्यूज़ द्वारा प्रसारित वीडियो का ऑडियो हाल ही में तबरेज़ अंसारी के साथ हुई मॉब लिंचिंग की घटना के खिलाफ SDPI के विरोध प्रदर्शन के वीडियो से मिलती है।

हमें इसी रैली के कुछ अन्य वीडियो भी मिले, जिसमें इसी तरह के नारे सुने सकते हैं। वीडियो के साथ लिखा गया था कि भारतीय लोकतांत्रिक पार्टी की रैली में आरएसएस के खिलाफ इस तरह के नारे लगाए गए थे।

मुहर्रम जुलूस के पुराने वीडियो में आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या के नारों के साथ एडिट करके समुदायों के ध्रुवीकरण के साथ प्रसारित किया गया। सुदर्शन न्यूज़ और इसके संपादक सुरेश चव्हाणके सांप्रदायिक गलत सूचनओं को प्रसारित करने में सबसे आगे रहे हैं। (1,2,3 और 4)

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