UP में दलित महिला के हाथों बना खाना खाने से मना करने की घटना के नाम पर बिहार का वीडियो वायरल

जिस वक़्त पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रही थी और पूर्ण विराम पर पहुंच गयी थी, भारत इसके साथ-साथ एक अलग समस्या से दो-चार हो रहा था. प्रवासी मज़दूरों के आने-जाने और उनके रहने-खाने के प्रबंध की समस्या. हज़ारों-लाखों लोग सड़क पर पैदल सैकड़ों किलोमीटर चलने को मजबूर थे. इस दौरान कई परेशान करने वाली खबरें तस्वीरों, वीडियो के रूप में सामने आयीं. इन्हीं ख़बरों के बीच एक वीडियो ऐसा आया जिसमें कुछ लोग चिल्लाते हुए दिख रहे हैं और एक लड़का आकर एक मेज़ पर लात मार देता है. मेज़ पर खाना रखा हुआ था जो कि नीचे गिर गया. श्रीकांत नाम से चल रहे ट्विटर अकाउंट से ये वीडियो 21 मई को ट्वीट किया गया और बताया गया कि इस वीडियो में दिख रहे लोगों का नाम सिराज अहमद और भुजौली खुर्द है और इन्होंने दलित महिला द्वारा बनाए गए खाने को खाने से मना कर दिया और उस खाने पर लात मार दी. (ट्वीट का आर्काइव लिंक) श्रीकांत के इस वीडियो को साढ़े 4 लाख से ज़्यादा बार देखा गया और इसे 1600 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया.

‘Meritdhaari’s Against Equality’ नाम के ट्विटर अकाउंट से इस विडियो को 20 मई को ट्वीट किया गया था जिसमें लिखा गया कि मेरिटधारी दलित महिला द्वारा पकाए गए खाने को खाने से इनकार कर रहे हैं. यहां ये बता दिया जाए कि सोशल मीडिया पर जन्म लिए कई शब्दों में मेरिटधारी भी एक शब्द है जिसका इस्तेमाल सवर्ण हिन्दुओं के लिए किया जाता है. इस वीडियो को भी साढ़े 4 लाख से ज़्यादा बार देखा गया. लगभग 5 हज़ार बार इसे रीट्वीट किया गया. (ट्वीट का आर्काइव किया हुआ लिंक)

21 मई को संदीप साई नाम की फेसबुक प्रोफ़ाइल से इस वीदियो को इसी दावे के साथ शेयर किया गया. इस वीदियो को 1100 से ज़्यादा बार शेयर किया गया और 40 हज़ार से ज़्यादा बार इसे देखा गया.

At a quarantine centre Shiraj Ahmed & Bhujouli refused eat & kicked the food because it was cooked by a Dalit women.

Posted by Sandeep Sai on Thursday, 21 May 2020

फ़ैक्ट-चेक

चूंकि खाने को लात मारने इस इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा था इसलिए ये सोचते हुए कि इसकी न्यूज़ रिपोर्ट भी मौजूद होगी, हमने गूगल पर ‘कोरोना खाना लात मारी’ की-वर्ड्स से सर्च किया तो हमें दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट मिली. इसमें लिखा हुआ है कि मधवापुर के मध्य विद्यालय में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में ये घटना हुई थी जहां प्रवासी मज़दूरों ने खाने को लात मार कर नीचे गिरा दिया था और खाना पकाने वाली महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया. इस पूरी ख़बर में कहीं भी दलित महिलाओं की बात नहीं हुई. घटना के मूल में वहां मौजूद कर्मियों का मज़दूरों को ये बताना था कि वो सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खाना खाएं. इसपर कुछ लोग भड़क गए और उन्होंने ये दुर्व्यवहार किया.

इस रिपोर्ट में ये वीडियो भी संलग्न है जो कि वायरल हो रहा है और दावा किया जा रहा है कि दलित महिलाओं के पकाए खाने पर लात मारने वाले ये दो लोग मुस्लिम समुदाय से हैं. ये वीडियो बिहार का है और इसी घटना से जुड़ा हुआ है, इसकी पुष्टि पीछे स्कूल की छत पर लिखे ‘राजकीयकृत मध्य विद्यालय मधवापुर’ से हो जाती है.

हमने साहरघाट थाने से संपर्क किया तो हमारी बात सुरेन्द्र पासवान से हुई जो कि बतौर SHO तैनात हैं. सुरेन्द्र ने हमें बताया कि इस पूरे प्रकरण में किसी भी तरह से दलित या मुस्लिम ऐंगल शामिल नहीं है. जिन लोगों को क्वारंटीन किया गया था उनसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा गया. इसके लिए खाना बना कर एक जगह रख दिया जाता था जहां से खुद उठाकर उन्हें खाना होता था. मगर कुछ लोगों ने मांग की उन्हें बिठाकर खाना परोसा जाए. ऐसा करने से मना किये जाने पर वो उग्र हो गए और अभद्रता पर उतर आये. तीन लोगों के खिलाफ़ FIR दर्ज हुई है. तीनों के नाम हैं – पंकज कुमार राय, मनोज राय और अशोक शाह.

मगर फिर उस दावे का क्या जिसमें सिराज अहमद और भुजौली खुर्द का नाम आता है और जिन्होंने दलित महिला के हाथ का बना खाना खाने से मना कर दिया था? असल में एक वाकया ऐसा हुआ था. लेकिन इसमें 2 मुस्लिम युवकों का नहीं बल्कि एक ही युवक सिराज अहमद का नाम शामिल था. दूसरा नाम भुजौली खुर्द उस जगह का नाम है जहां के सिराज अहमद हैं. श्रीकांत जी को अगर खुर्द शब्द का मतलब मालूम होता तो वो भुजौली खुर्द को कोई इंसान नहीं समझते और अपनी फैलाई गलत जानकारी में एक और गलत जानकारी जोड़ने से बच जाते. मोटा-माटी ये समझिये कि कई गांवों में इलाके दो हिस्सों में बंटे होते थे. बड़े इलाके को कलां और छोटे को खुर्द कहा जाता है.

खैर, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले में हुई घटना में 35 वर्षीय सिराज अहमद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उसने गांव के क्वारंटीन सेंटर में बना खान खाने से मना कर दिया क्यूंकि रसोइया आया नहीं था और उसकी गैर मौजूदगी में ग्राम प्रधान लीलावती देवी ने खाना बनाया जो कि दलित हैं. केस में सिराज के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुई और एससी/ऐक्ट लगाया गया.

इस तरह से कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने बिहार में हुई घटना के वीडियो को उत्तर प्रदेश में हुई घटना का वीडियो बताया और उसे शेयर किया. ये दोनों अलग घटनाएं हैं. बिहार में हुई घटना में कोई भी दलित ऐंगल नहीं है. जबकी उत्तर प्रदेश में हुई घटना में मुस्लिम युवक ने दलित महिला के हाथों बनाए खाने को खाने से मना कर दिया था.

योगदान करें!!
सत्ता को आइना दिखाने वाली पत्रकारिता जो कॉरपोरेट और राजनीति के नियंत्रण से मुक्त भी हो, वो तभी संभव है जब जनता भी हाथ बटाए. फेक न्यूज़ और गलत जानकारी के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद कीजिये. डोनेट करिये.

Donate Now

तत्काल दान करने के लिए, ऊपर "Donate Now" बटन पर क्लिक करें। बैंक ट्रांसफर / चेक / डीडी के माध्यम से दान के बारे में जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें

Send this to a friend