“उड़ीसा से आज खबर मिली है की बिहार से झारखंड होते हुए भिखारी के बेस में पांच सौ लोग निकले है जो रासते में जो मिलता है उसको काटकर कलेजे अौर कीडनी निकाल रहे है जिसमे से छः सात लोग पकड़े गाए है .जो पकडे़ गए हैं वही लोग को कडी़ पुछताच के बाद पांच सौ लोग आने की बात काबुल की है इसलिए हमारे भाईयों मेसेज को आपके जितने परिवार और मेंबर है सबको परवड कीजे इसमे एक विडयो भी” यह संदेश फ़िलहाल व्हाट्सएप पर व्यापक रूप से फैल रहा है जिसे कई ग्रुपों में शेयर किया जा रहा है। इस संदेश के साथ कई तस्वीरें भी है जिनमें से कुछ खून से भरी है जिसे देखा नहीं जा सकता। (इस पार्ट में काफी हिंसक तस्वीरें है, पाठकों को सावधानी से देखने की सलाह दी जा रही है)

एक तस्वीर में बड़े-बड़े कार्डबोर्ड में लाशों को प्लास्टिक में लपेटे देखा जा सकता है। दूसरी तस्वीर में पुरे कमरे में खून फैला हुआ है और एक महिला को इस कमरे में खून से सने हुए देखा जा सकता है। उसके बाद की कुछ तस्वीरों में उन लोगों को दिखाया गया है जिन्होंने यह किया है। जिनमें से कुछ को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए हुए दिखाया गया है।

यह संदेश फेसबुक पर भी तेजी से फैल रहा है जहां कई यूजर्स ने इन तस्वीरों का एक सेट अपलोड किया है, जिनमें से कुछ ऊपर पोस्ट किए गए हैं। फेसबुक पर अपलोड किए गए इन संदेशों में फोन नंबरों का भी उल्लेख दिख रहा है जिससे यह पता चलता है कि इस संदेश को व्हाट्सएप से कॉपी-पेस्ट किया गया है।

इस तरह का एक दूसरा संदेश भी है, “कृपया सावधान रहें राँची,घोराठी,तिलैया,चितरतपुर, गोला,बरवाडीह और रामगढ , ओरमांझी, पतरातू, हज़ारीबाग़, बोकारो, आदि जगोहो पर 15 से 20 लोगों की टोली आई है उनके साथ बच्चे और लेडीस हैं और उनके पास हथियार भी हैं और और आधी रात को किसी भी वक्त आते हैं और बच्चे के रोने की आवाज आती है कृपया दरवाजा ना खोले प्लीज ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में से शेयर करें यह अस्थानीये पुलिस की तरफ से मैसेज है पूरे एरिया में 2 से 3 दिन के अंदर फेल जाना चाहिए। अपनी सूरक्षा अपने हाथ, सावधान रहे, जनहित मे जारी। “

ये तस्वीरें कहाँ से है? क्या इनके साथ किया जा रहा दावा सच है?

पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई रिपोर्टें आई हैं कि बच्चा अपहरण करने वाली गिरोह सक्रिय हो गई है जिसके परिणामस्वरूप ऐसी भीड़ देखी जाती है जो इस अफवाह की वजह से किसी बेकुसूर के मौत का कारण बन जाती है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में ऐसी कई घटनाएं हुईं है। अफवाहें फैलाने और डर पैदा करने के लिए पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

ऑल्ट न्यूज़ ने इन तस्वीरों का गूगल रिवर्स इमेज सर्च किया। जिनमें से कुछ की हमें कोई जानकारी नहीं मिली। हालांकि, उन तस्वीरों में से एक जिसमें कई कार्डबोर्ड बक्से को दिखाया गया है, जो लाश की तरह दिखता है। हमने पाया कि यह तस्वीर अक्टूबर 2017 में अरुणाचल प्रदेश के तवांग में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना के पीड़ितों की है। पांच वायु सेना के और दो सेना के जवान की 6 अक्टूबर को एक MI 17 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण मौत हो गई थी। कई मीडिया ने इन क्षेत्र में बॉडी बैग की कमी के कारण रक्षा कर्मियों के लाश के लिए कार्डबोर्ड बक्से के उपयोग को रिपोर्टों भी किया था। द वायर के लेख से ली गई तस्वीर नीचे पोस्ट की गई है।

पांच गिरफ्तार युवकों की तस्वीर कई अलग-अलग दावों के साथ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर पहले भी फैली है। इनमें से कुछ संदेश दावा करते हैं कि यह तमिलनाडु से एक बच्चा अपहरण करने का गिरोह है जबकि अन्य दावा करते हैं कि यह कर्नाटक से है। द न्यूज मिनिट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बेंगलुरु पुलिस ने ट्विटर के माध्यम से स्पष्ट किया है कि ये तस्वीरें नकली हैं। हालांकि ऑल्ट न्यूज़ स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित नहीं कर सका कि ये तस्वीरें कहां से हैं।

तस्वीरों का एक और सेट जो एक कमरे के अंदर खून से लतपत महिलाओं को दिखाती है। खोज परिणाम में हमें ब्लॉग पेज dainikswaraj.blogspot.com पर ये तस्वीरें मिली। इन तस्वीरों को 29 सितंबर, 2015 को इस लेख में पोस्ट किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह मुंबई में किन्नर समुदाय के कुछ लोगों का कार्य है। ऑल्ट न्यूज़ स्वतंत्र रूप से इस दावे को सत्यापित नहीं कर सका है। हालांकि, तथ्य यह है कि 2015 से इंटरनेट पर ये तस्वीरें मौजूद हैं जो साबित करती हैं कि ये किसी भी हाल की घटना का नहीं है जैसा कि दावा किया जा रहा है।

एक अन्य तस्वीर की खोज से हमें 22 मई 2018 की तेलुगू वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख मिली। इस लेख में यह कहा गया है कि व्हाट्सएप के माध्यम से ये अफवाहें फैल रही हैं कि सड़कों पर कुछ राक्षस लोगों को मारकर उनके मस्तिष्क, दिल और गुर्दे खा रहे हैं। ऊपर पोस्ट की गई कई तस्वीरों में से एक का उपयोग इस लेख में किया गया है और बताया गया है कि यह तस्वीर तेलंगाना में इस अफवाह के साथ फैल रही है।

एक और तस्वीर की खोज हमें फिर से तेलुगू वेबसाइट पर ले गया जिसमें ‘तेलुगु में नकली खबर की अफवाहों से हिंसा’ शीर्षक के साथ एक लेख है। 20 मई 2018 के इस लेख में एक तस्वीर पोस्ट की गई है और यह बताया गया है कि ये बच्चों के अपहरणकर्ता हैं इस दावे के साथ व्हाट्सएप पर कई तस्वीरें फ़ैल रही है।

सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर कई पोस्ट में इन तस्वीरों में एक वीडियो भी है जिसकी सच्चाई हमने पहले बताई थी। यह वीडियो कुछ ही दिन पहले इस दावे के साथ फैलाया गया था कि ये मुसलमान बर्मिंघम में दंगे कर रहे हैं जबकि वास्तव में यह स्विट्जरलैंड में फुटबॉल मैच से संबंधित थी।

मई 2017 में, एक बच्चे के अपहरण गिरोह के बारे में व्हाट्सएप पर फैलाए गए अफवाहों के परिणामस्वरूप झारखंड में सात लोगों पर भीड़ ने हमला कर दिया। वही पैटर्न अब कई स्थानों पर देखा जा रहा है। गलत जानकारी का खतरा अब इस नतीजे तक पहुंच गया है जहां लोग इस तरह की अफवाहों के कारण सड़क पर मारे जा रहे हैं। जनता के मन में डर पैदा करने वाले भयावह प्रयास के परिणामस्वरूप हाल के दिनों में भीड़ हिंसा की चौंकाने वाली घटनाएं हुई हैं। व्हाट्सएप प्लेटफ़ॉर्म में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण इस तरह की खतरनाक अफवाहों की शुरुआत कौन करता है यह पता करना असंभव हो जाता है, जो कानून जाँच प्रक्रिया के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।

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