सोशल मीडिया में 2 तस्वीरों का एक कोलाज खूब वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि कश्मीर में RSS के गुंडों ने एक हिन्दू महिला की इसलिए पिटाई की क्योंकि इस महिला ने रमज़ान के चलते एक मुस्लिम लड़की के लिए सहरी का खाना बनाया था. वायरल कोलाज की पहली तस्वीर में महिला एक मुस्लिम लड़की के साथ दिख रही है जबकि दूसरी तस्वीर में एक महिला के नाक से खून बहता हुआ दिख रहा है. 27 अप्रैल 2020 को ‘ब्लाइन्ड ऑबज़र्वर’ नाम के यूज़र ने ये कोलाज शेयर करते हुए मेसेज में दावा किया कि कश्मीर में एक हिन्दू महिला द्वारा मुस्लिम लड़की को सहरी खिलाने की वजह से आरएसएस के गुंडों ने उस हिन्दू महिला की पिटाई कर दी.

ये तस्वीर इसी मेसेज के साथ ट्विटर और फ़ेसबुक पर वायरल है.

इन तस्वीरों की सच्चाई जानने के लिए ऑल्ट न्यूज़ के ऑफ़िशियल ऐप पर कुछ रीक्वेस्ट आयी हैं.

फ़ैक्ट-चेक

वायरल कोलाज को गौर से देखने पर पता चलता है कि दोनों में दिखने वाली महिलाएं अलग-अलग हैं. तस्वीरों के बारे में जानने के लिए कोलाज को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें पहली तस्वीर 25 अप्रैल को ट्विटर पर शेयर की हुई मिली. ‘वजाहत फ़ारुक़ भात’ नाम के यूज़र ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा, “A Hindu lady wake up early morning to feed Sehri to a Muslim girl. This is the Beauty of my Country Flag of India. Long Live Humanity . #HumanityFirst #RamadanMubarak (अनुवाद – एक मुस्लिम लड़की को सहरी खिलाने के लिए इस हिन्दू महिला ने सुबह जल्दी उठकर खाना बनाया. ये मेरे देश के झंडे की खूबसूरती है. मानवता आबाद रहे. #HumanityFirst #RamadanMubarak)” इसके अलावा ट्वीट की गई तस्वीर के निचले दाएं कोने पर – ’25/04/2020′ – लिखा हुआ है. कई स्मार्टफ़ोन्स में तस्वीर के नीचे उसे खींचने की तारीख भी लिखी हुई होती है. इसका मतलब ये है कि इस तस्वीर को 25 अप्रैल 2020 को खींचा गया था.

आगे सर्च रिज़ल्ट खंगालने पर दूसरी तस्वीर ‘मनीष हिन्दू पांडे’ नाम के यूज़र द्वारा 24 फ़रवरी को ट्वीट की हुई मिली. पांडे ने ये तस्वीर राणा आयूब के एक ट्वीट पर जवाब देते हुए इसे गुजरात के खंभात का बताया है.

इसके अलावा इस घायल महिला की तस्वीर को 23 से 25 फ़रवरी के बीच कई यूज़र्स ने खंभात, गुजरात का बताते हुए शेयर किया है. तस्वीर को गौर से देखने पर हमें महिला के पीछे एक बोर्ड दिखा जिसमें गुजराती भाषा में ‘શાંતિ જાળવો’ यानी की शांति रखो लिखा हुआ था.

 

इसके चलते गूगल पर की-वर्ड्स ‘khambhat caa protest’ से सर्च करने पर ‘टीवी9 गुजराती’ की एक वीडियो रिपोर्ट मिली. 25 फ़रवरी की इस वीडियो रिपोर्ट में गुजरात के खंभात शहर में 2 समुदायों के बीच हुए टकराव के बारे में बताया गया है. वीडियो में 1 मिनट 41 सेकंड पर एक महिला दिखाई देती जो कि वायरल वीडियो में दिखने वाली महिला से काफ़ी मिलती-जुलती है. इन दोनों महिलाओं की तस्वीर को कम्पेयर करने पर इनके एक ही होने की बात साफ़ हो जाती है.

ऊपर की तस्वीर में दोनों महिलाओं के बीच दिखने वाली समानता इस प्रकार है :

  1. दोनों महिलाओं  की आईब्रो का आकार
  2. दोनों के गले में दिखने वाली झुर्रिया
  3. और सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण, दोनों महिलाओं के चहेरे के बाएं हिस्से में नाक के पास लगी चोट

वीडियो रिपोर्ट में ये महिला बताती है कि शहर में कुछ लोग पत्थर मारने के लिए आए थे. इसी बीच उन्हें एक पत्थर लग गया था. उन लोगों ने घरों को जला दिया, बाइक को जला दिया और इन सबकी वजह से वहां पर काफ़ी नुकसान हो गया.

जांच में पाया कि पहली तस्वीर 25 अप्रैल की है जबकि दूसरी तस्वीर फ़रवरी 2020 में ली गयी थी. इससे एक बात तो साफ़ हो जाती है कि घायल महिला की तस्वीर का रमज़ान और सहरी से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि रमज़ान का महीना 23 अप्रैल 2020 से शुरू हुआ था जबकि घायल महिला की तस्वीर फ़रवरी की है. इसके अलावा हमने ये भी देखा कि दोनों तस्वीरों में दिखने वाली महिलाएं अलग-अलग हैं. इस तरह सोशल मीडिया का ये दावा कि इस महिला की पिटाई एक मुस्लिम लड़की को सहरी बनाकर खिलाने की वजह से हुई, ग़लत साबित होता है.

ग़लत
दावा:
कश्मीर में मुस्लिम लड़की को सहरी खिलाने की वजह से एक हिन्दू महिला की आरएसएस के लोगों ने पिटाई की

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