7 जुलाई को मानवाधिकार कार्यकर्ता फ़ादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में मौत हो गयी. स्टेन स्वामी पर 2018 के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में शामिल होने और नक्सलियों के साथ संबंध होने के आरोप थे. उन्हें ग़ैर क़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया था. हिरासत में उनकी मौत पर कई लोगों ने सवाल उठाये हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने आरोप लगाया कि ये “हत्या” है. वहीं माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने हिरासत में हुई स्टेन स्वामी की ‘मौत की जवाबदेही तय करने की मांग’ की. इन सब के बाद एक तस्वीर शेयर की जा रही है जिसमें हॉस्पिटल के बेड पर पड़े एक बुज़ुर्ग के पैर में ज़ंजीर लगी है. दावा है कि ये स्टेन स्वामी की तस्वीर है.

लोग इसे शेयर करते हुए कह रहे हैं कि भारत सरकार और न्यायिक व्यवस्था ने स्टेन स्वामी को मार दिया.

कुछ लोग कह रहे हैं कि स्टेन स्वामी की उम्र का तो ख़याल रखा जाता.

 

फ़ेसबुक यूज़र राजीव ध्यानी ने भी ये तस्वीर शेयर की. हालांकि उन्होंने इसे शेयर करते हुए स्टेन स्वामी का नाम नहीं लिया. इसके अलावा ये तस्वीर और भी कई लोगों ने स्टेन स्वामी की बताकर शेयर की है.

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फ़ैक्ट-चेक

तस्वीर का रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि ये मामला मई 2021 का है और इस बुज़ुर्ग का नाम बाबूराम बलवान सिंह है. उन्हें 6 फ़रवरी को हत्या के मामले में एटा जेल लाया गया था. वो कुल्हा हाविवपुर के निवासी है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया में 14 मई 2021 को छपी रिपोर्ट में बताया गया कि हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे 92 वर्षीय बुज़ुर्ग बाबूराम बलवान सिंह की 9 मई को तबीयत खराब हो गई तथा उन्हें सांस लेने में भारी परेशानी की वजह से नॉन-कोविड वार्ड में एडमिट किया गया था.

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, “एटा ज़िला कारागार के जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि अस्पताल में कैदी के साथ ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी ने बुजुर्ग के एक पैर में हथकड़ी लगा दी और उसका दूसरा सिरा बिस्तर में लगी ज़ंजीर से ताला लगाकर बांध दिया. बुज़ुर्ग कैदी की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अपर महानिदेशक (कारा) आनंद कुमार ने जेलकर्मी अशोक यादव को निलंबित कर दिया और वरिष्ठ अधिकारी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा.”

अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सौरभ ने पंजाब केसरी को बताया कि बाबूराम मानसिक समस्या से भी जूझ रहे थे और बार-बार बेड से उठ कर भाग जाते थे. इसलिए बार-बार भागने में इन्हें कहीं चोट न लग जाये, इन्हें जंजीर में बांधकर रखा गया था.

कुल मिलाकर, आजीवन कारावास की सजा काट रहे 92 वर्षीय बुजुर्ग बाबूराम बलवान सिंह की तस्वीर स्टेन स्वामी की बताकर शेयर की जा रही है.

ग़लत
दावा:
इलाज के दौरान स्टेन स्वामी को जंजीर से बांधा गया था

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