एक वृद्ध व्यक्ति के साथ बदसलूकी कर रही पुलिसकर्मियों की एक तस्वीर इस दावे के साथ शेयर की जा रही कि ये चंडीगढ़ में चल रहे किसान आंदोलन की है. इस तस्वीर को कई लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर पुलिस की काफ़ी निंदा कर रहे हैं.

ट्विटर हैंडल @SranHarjap, @Jass71093752, और @ChdVarinder ने ये तस्वीर अन्य लोगों के बीच शेयर किया.
इस तस्वीर को चंडीगढ़ पुलिस किसान विरोधी हैशटैग के साथ भी शेयर किया गया.

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ये तस्वीर चंडीगढ़ में चल रहे किसान आंदोनल के सन्दर्भ में फैल रही है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार बी.के.यू. नामक संस्था ने राज्य और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ डिप्टी कमिश्नर के प्रदेश भर के दफ़्तरों के बाहर 2 जुलाई को प्रदर्शन किया. किसान पेट्रोल के बढ़ते दामों और सिंचाई के लिए अनियमित ऊर्जा संचालन के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे थे. ट्रिब्यून के मुताबिक, बी.के.यू. ने आज जिला मुख्यालय में निम्न सचिवालय के बाहर एक प्रदर्शन शुरू किया जो डगरु में 3 नए कृषि कानून और चंडीगढ़ पुलिस द्वारा किसानों पर लगाए जा रहे झूठे केसों के ख़िलाफ़ था.

फ़ैक्ट-चेक

इस तस्वीर का रिवर्स इमेज सर्च हमें हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट तक ले गया. मालूम चला कि ये तस्वीर पटियाला के निकट हरियाऊ गांव की है और इसे 2015 में खींचा गया था. इस मौके पर किसान ग़ैरक़ानूनी तरीके से पंचायत की जमीन हड़पने के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे.

हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार पुलिस और प्रशासन को कोर्ट से ज़मीन को अपने कब्जे में लेने के लिए ऑर्डर प्राप्त हुआ था. किंतु गुस्साए किसानों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया जिसके जवाब में पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े. स्थानीय किसान नेताओं ने कहा कि उस ज़मीन से उन्हें हटाये जाने पर स्टे ऑर्डर जारी किया जा चुका था लेकिन पुलिस सुनने को तैयार नहीं थी. परिणामस्वरूप इस हिंसा में 12 किसान और 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए.

द ट्रिब्यून ने लिखा है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जो पाटरन के हरियाऊ कलां गांव में पंचायत की ज़मीन खाली करने के लिए पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे. इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पुलिस और पॉवर कॉम के अधिकारियों के पास संयुक्त रूप से उच्च न्यायालय के आदेश थे. जिसमें पुलिस को ज़मीन खाली करवाने के लिए कहा गया था. और जब पुलिस उस जगह पहुंची तो प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया.

इस तस्वीर का आसान सा रिवर्स इमेज सर्च वायरल दावे को ख़ारिज कर देता है. साथ ही, ये भी देखा जा सकता है कि इस तस्वीर में जितने भी लोग दिख रहे हैं उनमें से किसी ने भी मास्क नही लगा रखा है. यानी, ये तस्वीर हाल की नहीं हो सकती.

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