व्यक्ति के जीभ और हाथ काटने का वीभत्स वीडियो भारत का नहीं; कोई सांप्रदायिक मकसद नहीं

एक ग्राफिक वीडियो, जिसमें एक आदमी की जीभ और हाथों को काटते हुआ दिखाया गया है, सोशल मीडिया में वायरल है। इसके साथ उर्दू में दिया गया एक ऑडियो इस प्रकार है, “अल्ला-ओ-अकबर! (तीन बार) ज़ुल्म की इंतेहा देखें, ज़ुल्म की इंतेहा। अल्फाज़ नहीं हैं आज आज अल्फाज़ नहीं हैं कि किस तरह हिंदुओं का ज़ुल्म जो है मुसलमानों के ऊपर हो रहा है। इस वीडियो को हर मुसलमान पर फ़र्ज है कि वायरल करें पूरी दुनिया में ये वीडियो जानी चाहिए…।” इस वीडियो का ग्राफिक और इसकी अत्यधिक भयंकर प्रकृति के कारण, ऑल्ट न्यूज़ इसे यहाँ पोस्ट नहीं कर रहा है। हालाँकि, नीचे दिए गए ऑडियो को नीचे सुना जा सकता है:

ऑल्ट न्यूज़ को व्हाट्सएप पर इसके सत्यापन के कई अनुरोध मिले हैं।

सच क्या है?

ऑल्ट न्यूज़ ने कीवर्ड – “man tongue cut off” (आदमी की जीभ काटी)- का उपयोग करते हुए वीडियो की खोज की, हमें डेली स्टार का 15 जनवरी को प्रकाशित एक लेख मिला। इसमें बताया गया था कि “सेना के एक भगोड़े किशोर को उसके पूर्व सहयोगियों द्वारा पकड़ा गया और उसके हाथों को काट कर, उसकी जीभ निकाल कर और उसकी आँखें बाहर निकाल कर उसे सजा दी गई। उसे यिन यान की सोने की खदान पर सेना के छापे में पकड़ा गया था, जहां माना जाता है कि वह सोने के अवैध खनन से जीविका चलाने की कोशिश कर रहे लोगों में से एक है।” मीडिया संगठन के अनुसार, यह घटना दक्षिणी वेनेजुएला में बोलिवर राज्य के अल कैलाओ शहर में हुई थी।

डेली स्टार में 19-वर्षीय पीड़ित का नाम था- लीओकर जोस लुगो मायज। ट्विटर पर उसके नाम की खोज करने पर, हमें जनवरी 2019 से कई ट्वीट मिले, जिसमें उस घटना के बारे में बात की गई थी और वायरल वीडियो में दिख रहे आदमी की तरह तस्वीरें थीं।

कोलंबिया और वेनेजुएला के एक खोजी पत्रकार ब्रैम एबस (@BramEbus) ने एक ट्विटर श्रृंखला में बताया कि कैसे वेनेजुएला के खनन क्षेत्रों में शरीर का अंग-भंग करना एक चेतावनी और एक सजा है। 15 जनवरी 2019 को एबस ने ट्वीट किया था, “आज वेनेजुएला की सेना ने “यिन यान” नामक खनन क्षेत्र में प्रवेश किया, जहां 19-वर्षीय लेओकर जोस लुगो मायज – सेना के हाल ही के एक भगोड़े – का खदानों में चोरी के बाद अंग-भंग किया गया। इस दौरान आठ लोग मारे गए”।

वेनेजुएला के अन्य पत्रकारों ने भी इस मामले को लेकर ट्वीट किए थे। यदि कोई ध्यान से देखे, तो वीडियो में पीड़ित व्यक्ति के कपड़े अन्य लोगों के कपड़ों से मिलते हैं।

यह स्पष्ट है कि जिस भयानक वीडियो का इस्तेमाल सांप्रदायिक तनावों को भड़काने के लिए किया जा रहा है, उसका न तो भारत से कोई संबंध है और न ही यह दुनिया के किसी अन्य हिस्से में मुसलमानों द्वारा हिंदुओं पर या इसके विपरीत, अत्याचार को चित्रित करता है। हाल के दिनों में, हमने कई ऐसे उदाहरण देखे हैं जिनमें हिंसा को दर्शाने वाले असंबंद्ध वीडियो को समुदायों के  ध्रुवीकरण के लिए सांप्रदायिक संदेश के साथ प्रसारित किया गया है।

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