पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 मार्च को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ अपने धरना मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए सांप्रदायिक आरोपों से भरी कमेंट्स कीं जो चुनाव से पहले भय फैलाने के समान हैं.

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने 6 मार्च से एस्प्लेनेड में SIR अभ्यास के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया. पार्टी ने आरोप लगाया कि संशोधन प्रक्रिया के कारण मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाए जा रहे हैं और मांग की कि “वास्तविक मतदाताओं” को चुनावी सूचियों में बहाल किया जाए.

9 मार्च को अपने भाषण के दौरान, ममता बनर्जी ने भाजपा द्वारा लगाए गए एक परिचित आरोप को संबोधित किया कि उनकी पार्टी ने बांग्लादेश से राज्य में मुसलमानों के प्रवेश की सुविधा प्रदान की थी. हिंदी में बोलते हुए उन्होंने कहा, “आप ये क्यों कहते रहते हैं कि मैं या हम मुसलमानों को लाए थे? अगर इसके लिए किसी से सवाल पूछा जाना है, तो वो आजादी के दौरान गांधी जी से होना चाहिए. नेहरू जी से सवाल करें. राजेंद्र प्रसाद से सवाल करें. अंबेडकर से सवाल करें. आप तब पैदा भी नहीं हुए थे.”

इसके बाद उन्होंने बांग्ला भाषा अपनाई और सुझाव दिया कि राज्य में सामाजिक सद्भाव है क्योंकि तृणमूल सत्ता में है. ममता बनर्जी ने कहा, “ये हमारी वजह से है कि आप सब अच्छा कर रहे हैं. अगर कोई दिन ऐसा आए जब हम यहां नहीं रहेंगे, तो इसमें सिर्फ एक सेकंड लगेगा.” उन्होंने फिर चेतावनी दी: “अगर एक निश्चित समुदाय एकजुट हो जाता है और आपको घेर लेता है, तो बस एक सेकंड लगेगा; वे आपको पूरी तरह से ख़त्म कर देंगे.”

बांग्ला में उनके सटीक शब्द इस प्रकार थे: ”আমরা আছি বলে না, আপনারা সবাই ভাল আছেন। আর যদি আমরা না  থাকি, কোনও দিন সেই রকম আসে, এক সেকেন্ড লাগবে! একটা কমিউনিটি যখন জোট বাঁধে না, ঘিরে ফেললে এক সেকেন্ডে দেবে একদম বারোটা বাজিয়ে…”

बाद में भाषण में ममता बनर्जी ने एक सौहार्दपूर्ण नोट पर बात करने की कोशिश की, जिसमें कहा गया कि पूरे भारत के लोग राज्य में सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा, “बंगाल में सभी राज्यों के नागरिक बिल्कुल सुरक्षित हैं; कोई भी आपको परेशान नहीं करेगा. ये हमारा सोनार बांग्ला है.” उन्होंने लोगों से भाजपा के प्रोपगेंडा या “किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने” की कोशिश में न फंसने का आग्रह किया.

भाषण का सबंधित हिस्सा ममता बनर्जी के ऑफ़िशियल फ़ेसबुक पेज से शेयर किए गए वीडियो में 7.49.35 मिनट के बाद सुना जा सकता है:

Protest against the Bangla Birodhi BJP led SIR conspiracy to undermine democracy and strip Bengal’s legitimate citizens of their voting rights. | 8 March, 2026

বাংলা-বিরোধী কেন্দ্রীয় সরকারের SIR-এর মাধ্যমে গণতন্ত্র হত্যার প্রতিবাদে ও বাংলার বৈধ নাগরিকদের ভোটাধিকার হরণের চক্রান্তের বিরুদ্ধে ধরনা অবস্থানে | Protest against the Bangla Birodhi BJP led SIR conspiracy to undermine democracy and strip Bengal’s legitimate citizens of their voting rights. | 8 March, 2026

Posted by Mamata Banerjee on Saturday 7 March 2026

मुख्यमंत्री की टिप्पणी पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल में सांप्रदायिक हिंसा की आशंका को भड़काती हुई मालूम पड़ती है. ये सुझाव देना कि समुदायों की सुरक्षा तृणमूल के सत्ता में वापस आने पर निर्भर करती है, और एक समुदाय को “घेरने” और दूसरे को “खत्म” करने की छवि बनाकर, टिप्पणियों ने समुदायों के बीच अविश्वास को गहरा करने का जोखिम उठाया. इस तरह की बयानबाजी, विशेष रूप से एक मौजूदा मुख्यमंत्री की ओर से भड़काऊ है, और ये भी ऐसे समय में कहा गया है जब खासकर चुनाव नजदीक आने वाली है.

SIR अभ्यास पर चल रहे विवाद के संदर्भ में भी ये कमेंट्स जरूरी हैं. मतदाता सूची का पुनरीक्षण पहले से ही आरोपों में घिरा हुआ है कि अल्पसंख्यक समुदायों को विलोपन और डॉक्यूमेंटेशन आवश्यकताओं के माध्यम से असमान रूप से प्रभावित किया जा रहा है. उस संदर्भ में ममता बनर्जी का भाषण – चिंताओं को शांत करने के बजाय – सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कहानी को पुष्ट करता है.

सांप्रदायिक प्रतिशोध के एक काल्पनिक परिदृश्य का आह्वान करके, मुख्यमंत्री ने ये आशंका भी बढ़ा दी कि राजनीतिक परिणामों के आधार पर अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक निशाना बन सकते हैं. उनकी कमेंट्स डर के माध्यम से मतदाताओं को संगठित करने के एक स्पष्ट प्रयास की तरह लग रही थीं, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि तृणमूल अब सत्ता में नहीं रही तो सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है.

सांप्रदायिक ब्लैकमेलिंग: बीजेपी

मुख्यमंत्री की ये टिप्पणी उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों सहित अलग-अलग हलकों से तीखी आलोचना का कारण बनी. भाजपा के दार्जिलिंग सांसद राजू बिस्ता ने इसे “पूर्ण सांप्रदायिक ब्लैकमेल” कहा.

उन्होंने X पर लिखा, “TMC ने पश्चिम बंगाल के लिए यही हासिल किया है, एक समुदाय को दूसरों के खिलाफ खेलकर और पूरे राज्य को बंधक बनाकर रखा है. यही कारण है कि TMC को उखाड़ फेंकने की जरूरत है.”

भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक X पोस्ट में कहा, “छिपी हुई धमकियों के दिन चले गए” और ममता बनर्जी की “समाज का ध्रुवीकरण करने की हताशा उनकी टिप्पणियों में स्पष्ट है.”

CPI (एम) के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी टिप्पणी के लिए FIR की मांग की, सलीम ने कहा कि इसका मकसद “एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काना और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना” था.

CPI (एम) पश्चिम बंगाल ने भी अपने X हैंडल से एक वीडियो शेयर किया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धबेब भट्टाचार्जी की बंगाल में सांप्रदायिक सद्भाव पर जोर देने वाली टिप्पणियों के खिलाफ ममता बनर्जी की टिप्पणियों की तुलना की गई है.

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी टिप्पणियों की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि बंगाल की मुख्यमंत्री सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति में लिप्त हैं.

पश्चिम बंगाल कांग्रेस प्रमुख शुभंकर सरकार ने बहुलवादी देश में टिप्पणियों को “अस्वीकार्य” और “असंसदीय” बताया और कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की टिप्पणियों से दुख हुआ है. ममता बनर्जी को भारतीय संविधान के प्रावधानों की याद दिलाते हुए, सरकार ने उनसे ये बताने का आग्रह किया कि उनके अनुसार कौन सा समुदाय दूसरे समुदाय को ख़त्म कर देगा.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने SIR के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के संबंध में अपील की समीक्षा के लिए ट्रिब्यूनल की स्थापना का आदेश दिया. इस निर्णय के बाद TMC सुप्रीमो ने अपना धरना ख़त्म कर दिया, जो 11 मार्च को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया था.

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