19 मार्च को न्यूज़ एजेंसी एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) ने एक ख़बर पब्लिश की. इस आर्टिकल की हेडलाइन थी, “सऊदी अरब ने आदमियों पर पाकिस्तानी महिला से शादी करने पर रोक लगा दी है, बाकी 3 देशों पर भी : रिपोर्ट”. इस रिपोर्ट को पब्लिश होने के 19 घंटों के बाद हटा दिया गया था लेकिन तब तक कई और मीडिया संगठन ये ख़बर शेयर कर चुके थे.

NDTV, टाइम्स नाउ, द ट्रिब्यून, लाइवमिंट, द इकॉनमिक टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स, द न्यू इंडियन एक्स्प्रेस, ज़ी हिंदुस्तान, द कश्मीर मॉनिटर, बिग न्यूज़ नेटवर्क, साक्षी पोस्ट, बांग्लादेश के द फ़ाइनेंशियल एक्स्प्रेस और गल्फ़ न्यूज़ ने ख़बर छापी कि सऊदी अरब के पुरुष पाकिस्तान, चाड, बांग्लादेश और म्यांमार की महिलाओं से शादी नहीं कर सकते.

ज़ी न्यूज़ ने हेडलाइन में लिखा ‘सऊदी का नया कानून’.

इनमें से कई मीडिया संगठनों ने अपनी रिपोर्ट डिलीट कर दी है.

प्रोपगेंडा आउटलेट ऑप इंडिया और क्रियेटली ने भी इस दावे पर ख़बर पब्लिश की थी. ‘@KreatelyMedia‘ ने ट्वीट किया, “सऊदी अरब ने पुरषों को पाकिस्तानी महिला से शादी नहीं करने का ऑर्डर इश्यू किया है.” पहले भी कई बार क्रियेटली झूठे दावे शेयर करता रहा है.

फ़ैक्ट-चेक : पुरानी खबर

ANI ने 7 साल पुरानी खबर हाल की बताते हुए शेयर की. ये खबर अगस्त 2014 में पाकिस्तान के मीडिया संगठन डॉन ने पब्लिश की थी. सऊदी अरब में शादी के कानून में हुए बदलाव की खबर BBC और इंडिया टुडे ने भी दी थी.

इंडिया टुडे ने बताया था कि सऊदी अरब की सरकार ने कोई ऑफ़िशियल बयान जारी नहीं किया है. जबकि BBC ने सऊदी के अखबार मक्का (Makkah) और पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट डॉन की रिपोर्ट के आधार पर अपनी रिपोर्ट पब्लिश की थी. रीडर्स यहां ध्यान दें कि मक्का ने बाद में अपना ये आर्टिकल डिलीट कर दिया था.

2014 में पाकिस्तान ट्रिब्यून ने सऊदी अरब के शादी के कानून की आलोचना करते हुए एक सम्पादकीय पब्लिश किया था. ऑल्ट न्यूज़ स्वतंत्र रूप से 2014 के इस आर्टिकल की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. हमने इस दावे की सच्चाई जानने के लिए सऊदी अरब के रॉयल कॉनस्युलेट जनरल और द मिनिस्ट्री ऑफ़ जस्टिस से संपर्क किया है. उनकी ओर से जवाब आने पर इस आर्टिकल को अपडेट किया जाएगा. इसके अलावा, सऊदी अरब की सरकारी वेबसाइट चेक करने पर हमें किसी देश की महिलाओं से शादी करने पर प्रतिबंध लगाने की कोई जानकारी नहीं मिली.

ANI की डिलीट की जा चुकी रिपोर्ट का कुछ हिस्सा साल 2014 की डॉन की रिपोर्ट से काफ़ी मिलता-जुलता है. लेकिन फ़िर भी ANI ने इस ख़बर के पुराने होने की बात अपनी रिपोर्ट में नहीं बताई.

गौर करें कि ऑप इंडिया ने अपने आर्टिकल में एडिटर नोट जोड़ा, “ये स्टोरी साल 2014 की है जिसे हाल में रिपोर्ट किया गया है और ANI और टाइम्स नाउ ने इसे वायरल किया है.” ये आर्टिकल उनकी वेबसाइट पर अभी भी मौजूद है.

ANI ने ट्विटर पर इस दावे के वायरल होने के बाद ये खबर पब्लिश की

ऑल्ट न्यूज़ ने ध्यान दिया कि ANI की स्टोरी कुछ ट्विटर यूज़र्स द्वारा इस दावे को शेयर करने के बाद पब्लिश की गई. तारिक फ़तह, राकेश थैया और कर्नल विनोद.एस ने साल 2014 का डॉन का आर्टिकल शेयर करते हुए ये दावा ट्वीट किया है.

पाकिस्तान को मिल रही वैक्सीन्स से लेकर कांग्रेस के Covid-19 वैक्सीन को लेकर ग़लत दावे तक फ़ैक्ट-चेक्स :