सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें वायरल हो रही हैं. पहली तस्वीर एक सीआरपीएफ अधिकारी की है जिन्होंने हेलमेट और वर्दी पहन रखी है. साथ ही अधिकारी के हाथ में एक लाठी है. दूसरी तस्वीर एक सीआरपीएफ कमांडो की है जिन्होंने एडवांस्ड मिलिट्री टैक्टिकल गियर पहन रखा है. दोनों तस्वीरों को एक साथ रखकर ये दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी के कार्यकाल के दौरान भारतीय सेना के जवानों को दिए जाने वाले गियर में काफी सुधार हुआ है.

ये तस्वीरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर वायरल हैं.

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भ्रामक दावा

पहली तस्वीर

हमने देखा कि पहली तस्वीर में स्टॉक फ़ोटो एजेंसी Alamy का लोगो दिखाई दे रहा है. इसे ध्यान में रखते हुए हमने गूगल पर एक कीवर्ड सर्च किया जिससे Alamy पर हमें असली तस्वीर मिली. ये तस्वीर कश्मीर के सीआरपीएफ जवान की है. इसे 2012 में लिया गया था.

दूसरी तस्वीर

दूसरी तस्वीर का हमने रिवर्स इमेज सर्च किया जिसमें कमांडो ने एडवांस्ड मिलिट्री टैक्टिकल गियर पहन रखा है. हमें स्टॉक फ़ोटो एजेंसी गेटी इमेजेज़ पर असली तस्वीर मिली. वेबसाइट के मुताबिक, इस तस्वीर को 2021 गणतंत्र दिवस समारोह से ठीक पहले लिया गया था.

गेटी पर आगे देखने पर हमें इस कमांडो की कुछ और तस्वीरें मिलीं. तस्वीर को ज़ूम करने पर, हम देख सकते हैं कि कमांडो की बांह पर लगे बैज पर कुछ लिखा है. बैज पर लिखा है, “वैली QAT”, जो वैली क्विक एक्शन टीम (QAT) का शॉर्ट नाम है. ये सीआरपीएफ की एक एंटी-टेररिस्ट यूनिट है जो मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में काम करती है.

ऑल्ट न्यूज़ ने सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क किया जो QAT से परिचित हैं. उन्होंने हमसे नाम उज़ागर नहीं करने की रिक्वेस्ट की. अधिकारी के मुताबिक CRPF की खाकी वर्दी रेगुलर वर्दी है और CRPF के अंदर आने वाली घाटी QAT करीब एक दशक से चल रही है. फर्क सिर्फ इतना है कि वैली QAT कमांडो उच्च स्तर पर प्रशिक्षित (ट्रेन्ड) हैं. उन्होंने ये भी कहा कि उपकरणों के टुकड़ों को अपग्रेड करने की प्रक्रिया निरंतर जारी है.

ऑल्ट न्यूज़ ने CRPF की हाल ही की पासिंग आउट परेड देखी. अधिकारी ने बताया कि इस परेड के दौरान पहनी गई वर्दी वही खाकी वर्दी है जो 2012 की तस्वीर में दिख रही है, जिनमें कुछ और भी सामान जुड़ गए हैं.

कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर ये दिखाने के लिए दो तस्वीरें एक साथ शेयर की गईं कि हाल के कुछ सालों में CRPF गियर में बड़े पैमाने पर अपग्रेड किया गया. ये दावा भ्रामक है. पहली तस्वीर असल में 2012 की है और दूसरी तस्वीर 2021 की है. दूसरी तस्वीर वैली QAT कमांडो की है जो CRPF के अंतर्गत आनेवाला एक विशिष्ट विंग है.

पहले भी भारतीय सेना से संबंधित ऐसे ही कई दावे किए गए हैं जहां मीडिया आउटलेट्स ने भी मौजूदा सरकार की उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया है. अहमदाबाद मिरर और ANI ने पिछले साल भ्रामक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें दावा किया गया था कि भारतीय सेना ने पहली बार पीएम मोदी के शासन में वर्दी सिलने के लिए होममेड फैब्रिक का इस्तेमाल किया.

ग़लत
दावा:
पीएम मोदी के कार्यकाल में CRPF की वर्दी को बड़े पैमाने पर अपग्रेड किया गया.

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