द टेलीग्राफ द्वारा गलत रिपोर्टिंग: स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी की मर्दानगी का ज़िक्र नहीं किया

द टेलीग्राफ  द्वारा 5 जनवरी, 2019 को प्रकाशित एक लेख की हेडलाइन थी, स्मृति ने राहुल की मर्दानगी पर सवाल उठाए” – (अनुवादित)। लेख में दावा किया गया है कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के ‘पुरुषार्थ’ (‘मर्दानगी’) पर सवाल उठाते हुए इसकी तुलना भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से की। लेख में, स्मृति ईरानी के हवाले से कहा गया है, “भाजपा अध्यक्ष ने अपनी  पुरुषार्थ से अपना पद अर्जित किया, राहुल को उनकी माँ का आशीर्वाद की वजह से पद मिला है – (अनुवादित) “।

 

सियासत डेली, जो हैदराबाद का उर्दू दैनिक समाचार पत्र है, उसने रिपोर्ट किया था कि स्मृति इरानी ने ‘पुरुषार्थ’ शब्द से राहुल गाँधी की मर्दानगी पर सवाल उठाया था।

 

पुरुषार्थ से तात्पर्य मेहनत से है

कपड़ा मंत्री ने अपने बयान में कहा था, “बीजेपी के अध्यक्ष अपने पुरुषार्थ से बने है। राहुल गाँधी अपनी माता के आशीर्वाद से कांग्रेस के अध्यक्ष बने है।”.

टेलीग्राफ ने पुरुषार्थ ’शब्द का अनुवाद मर्दानगी किया है, जबकि उपयुक्त अनुवाद होना चाहिए था,“ भाजपा अध्यक्ष ने अपने मेहनत / परिश्रम के माध्यम से अपना पद अर्जित किया, राहुल गाँधी अपनी माता के आशीर्वाद से कांग्रेस के अध्यक्ष बने है। ”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मौकों पर ‘पुरुषार्थ’ शब्द का इस्तेमाल किया है। हाल ही में कार निकोबार में दिए गए एक भाषण में, मोदी ने इस शब्द का उपयोग यह बताने के लिए किया था कि कार निकोबार के लोगों की कड़ी मेहनत / प्रयासों से 2004 के सूनामी में नष्ट हुआ  द्वीप आज दुबारा विकसित हो गया है।

हिंदू धर्म में ‘पुरुषार्थ’

इस शब्द का हिंदू धर्म में एक दार्शनिक अर्थ भी है। हिंदू धर्म में, ‘पुरुषार्थ का शाब्दिक अर्थ है’ मानव लक्ष्य की वस्तु ‘या’ मानव उद्देश्य ‘। यह दो शब्दों से बना संस्कृत में एक संयुक्त शब्द है: मानव, जो एक तर्कसंगत प्राणी और उद्देश्य, जिसका अर्थ एक उद्देश्य या एक लक्ष्य से है। वेदों के अनुसार, चार तरह के पुरुषार्थ होते हैं (मानव जीवन के उद्देश्य) – धर्म (धार्मिकता / नैतिक मूल्य), अर्थ (धन), काम (इच्छा / प्रेम) और मोक्ष (मुक्ति / निवारण)।

लेखक रॉबिन रिनेर्ट द्वारा लिखी किताब Contemporary Hinduism (समकालीन हिंदू धर्म) के पृष्ठ 159 पर, यह उल्लेख किया गया है, “हिंदू नैतिकतावादी इन चार नतीजों पर पहुंचे हैं क्योंकि वे सभी सामान्य जरुरत हैं जो सभी मानव तलाशते हैं। सभी मनुष्य आर्थिक समृद्धि, राजनीतिक शक्ति, यौन प्रवृत्ति की संतुष्टि, और नैतिक नियमों और आदर्शों से संचालित समाज में जीने की इच्छा रखते हैं – (अनुवादित)। ”

द टेलीग्राफ ने ‘पुरुषार्थ’ का गलत अर्थ निकाला, जबकि हिंदू धर्म में इस शब्द का दार्शनिक महत्व है और स्मृति ईरानी द्वारा दिए गए बयान के संदर्भ में, इसका मतलब केवल मेहनती / परिश्रम था।

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