राजनीति

आपसी विवाद के कारण हुए हमले के विडियो को कर्नाटक में हिन्दू पर हमला बताकर फैलाया गया

“कर्नाटक में हिन्दू कार्यकताओं को मारा जा रहा है… केंद्र मौन क्यों???” फेसबुक पर फ़ैल रहे विडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग एक दुकान के सामने एक व्यक्ति को बुरी तरीके से पीट रहे हैं। वह व्यक्ति जिसे पिटा जा रहा है उसके शरीर से खून बह रहा है, फिर भी ये लोग उसे बेरहमी से पीटते जा रहे हैं। यह वीडियो 9 जून, 2018 को ग्रेट नरेन्द्र मोदी और क्रांतिकारी पेज से पोस्ट किया गया है। इन पेजों ने यह दावा किया है कि कर्नाटक में हिन्दुओं पर हमला किया जा रहा है। इस वीडियो को अब तक 16 हजार से ज्यादा बार देखा गया है और 600 से ज्यादा बार शेयर किया गया है।

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सच क्या है?

ऑल्ट न्यूज़ ने इस वीडियो की पड़ताल के लिए InViD सॉफ्टवेयर से कई फ्रेम में तोड़कर गूगल रिवर्स सर्च किया पर हमें कोई सन्दर्भ नहीं मिला। इस वीडियो को बहुत करीब से देखने पर पता चला कि ये लोग तमिल भाषा में बोल रहे हैं और पोस्ट किये गए दावे भी यह बता रहे हैं कि यह कर्नाटक का वीडियो है। हालांकि, हमने यह देखा कि कुछ दो पहिये वाहन इस वीडियो में दिख रहे है जिसके नंबर प्लेट्स ‘KA’ से शुरू होता है जो यह साबित करता है कि यह घटना कर्नाटक की ही है। एक बाइक के नंबर प्लेट पर KA-04 लिखा है और RTO कोड 04 उत्तरी बैंगलोर से संबंधित है।

बेंगलोर जगह को ध्यान में रखते हुए हमने कुछ खास शब्दों को गूगल पर सर्च किया। हमने पाया कि यह घटना 4 जून को न्यूज़ 18 कन्नड़ और बीटीवी कन्नड़ ने कवर की थी।

बीटीवी रिपोर्ट के अनुसार यह हमला व्यक्तिगत विवाद के कारण हुआ था। इस घटना का मुख्य अपराधी कार्थी का विवाह सूर्या की बहन से हुआ था। सूर्या ने अपने दोस्त मनोज को सूचित किया कि कार्थी उसकी बहन को परेशान कर रहा था। हमले से एक दिन पहले मनोज ने कार्थी से मुलाकात की और उसे उसकी पत्नी का ख्याल रखने के लिए चेतावनी दी। अगले दिन कार्थी ने अपने आठ दोस्तों को साथ लाकर चाकू और तलवारों से मनोज पर हमला कर दिया।

News 18 की रिपोर्ट में बताया गया कि यह घटना बेंगलुरू के अदुगोडी में हुई थी और इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

हम साल 2018 के दुसरे 6 महीने में पहुँच गए हैं और नकली समाचार उद्योग के लिए अभी भी कर्नाटक एक मुख्य विषय है। मई महीने में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय नकली खबरों के कई उदाहरण दिखे थे। इस राज्य के संबंध में गलत जानकारी अभी भी सोशल मीडिया के जरिये फैलाई जा रही है।

किसी वीडियो या तस्वीर के साथ भयावह कहानी बनाना और इसे संगठित तरीके से सोशल मीडिया पर शेयर करना नकली समाचार फ़ैलाने वालों की एक लोकप्रिय रणनीति है। ऐसे में कुछ पोस्ट को जाँच से प्रमाणित करना मुश्किल हो सकता है। सोशल मीडिया पर उत्तेजक प्रकृति की किसी भी जानकारी को विश्वसनीय स्रोतों से मिले बिना विश्वास नहीं करना चाहिए।

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