सरदार पटेल का चीनी चेहरा? यदि सोशल मीडिया पर विश्वास किया जाए, तो ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की पहली तस्वीरों से पता चलता है कि सरदार पटेल के चेहरा चीन के लोगों के तरह दीखता है। 2989 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही दुनिया की इस सबसे बड़ी मूर्ति का 31 अक्टूबर को उद्घाटन होना है। मूर्ति निर्माण में चीन की भागीदारी को “मेड इन चाइना” कहकर राहुल गांधी ने खूब आलोचना की है। एक कदम आगे बढ़कर कांग्रेस समर्थकों ने अब दावा किया है कि यह चीन के लोगों की तरह ही दीखता है।

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यह ट्वीट अब डिलीट कर दिया गया है, लेकिन यही तस्वीर और मिलता-जुलता संदेश फेसबुक पर भी वायरल है।

सच क्या है?

मूर्ति का चेहरा अक्टूबर 2017 में ही गुजरात में आया था और यह इन दिनों वायरल तस्वीर जैसा नहीं दिखता है।

मूर्तियों को अंतिम रूप दिए जाने की तस्वीरों में भी दिखता है कि इसमें सरदार पटेल का चेहरा चीन के लोगों जैसा नहीं है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर के गूगल रिवर्स सर्च से खुलासा हुआ कि ‘चीनी सरदार पटेल’ के रूप में प्रचारित तस्वीर पुरानी ‘स्टॉक इमेज‘ में से ली गई है। गेट्टी इमेजेज पर यह निम्नलिखित विवरण के साथ उपलब्ध है: “भारत की प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय मूर्तिकार जशुबेन शिल्पी, अहमदाबाद से 30 किलोमीटर दूर गांधीनगर के पास अपनी कार्यशाला में पूर्व भारतीय गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री स्वर्गीय सरदार वल्लभभाई पटेल की कांस्य प्रतिमा को अंतिम रूप दे रही हैं। भारत के लौह पुरुष के नाम से जाने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को अहमदाबाद में हुआ था।” फोटो के क्रेडिट लाइन में सैम पनथकी/एएफपी/गेट्टी इमेजेज लिखा है।

चीन के लोगों जैसा दिखने के संदेश के साथ प्रसरित की जा रही पटेल की मूर्ति की तस्वीर, वास्तव में उनकी एक अलग, 2008 में जशुबेन शिल्पी द्वारा बनाई गई मूर्ति की तस्वीर है। अपनी कांस्य मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध रहीं, शिल्पी का 2013 में निधन हो गया।

वर्गीकरण करना कठिन

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