कोलकाता में चल रही हड़ताल के बीच मध्यप्रदेश में हुए डॉक्टर पर हमले का पुराना वीडियो शेयर

“দেখুন ঠিক কেন ডাক্তাররা নিরাপত্তা দাবি করছেন। দেখুন পুলিশের ভূমিকা। পরিষ্কার সিসি টিভি ফুটেজ থাকলেও কোন শাস্তি হয় না। (इसी वजह से डॉक्टर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं । देखिये इसमें पुलिस की भूमिका। साफ CCTV फुटेज के बावजूद, इस घटना में कोई दंड नहीं दिया गया।- अनुवाद)”

कोलकाता में चल रहे डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान, बंगाली भाषा में उपरोक्त संदेश सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर वायरल है। संदेश एक CCTV फुटेज के साथ साझा किया जा रहा है, जिसमें लोगों की भीड़ द्वारा एक डॉक्टर को पीटा जा रहा है। क्लिप के पहले कुछ सेकेंड में एक पुलिसकर्मी को देखा जा सकता है, हालांकि वह हिंसा को रोकने की कोशिश नहीं करता है।

দেখুন ঠিক কেন ডাক্তাররা নিরাপত্তা দাবি করছেন

দেখুন ঠিক কেন ডাক্তাররা নিরাপত্তা দাবি করছেন। দেখুন পুলিশের ভূমিকা। পরিষ্কার সিসি টিভি ফুটেজ থাকলেও কোন শাস্তি হয় না ।

Posted by CB Culture on Saturday, 15 June 2019

व्यक्तिगत उपयोगकर्ता आकाश साधु के प्रोफ़ाइल से इस क्लिप को करीब 1 लाख बार देखा जा चूका है। कुछ अन्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं, पेज और ग्रुप ने भी पिछले 24 घंटो में इसे व्यापक रूप से प्रसारित किया है।

वीडियो को एक अंग्रेजी संदेश के साथ भी साझा किया जा रहा है। ऑल्ट न्यूज़ को इस बात की पुष्टि करने के लिए कई लोगों ने संपर्क किया है कि क्या यह घटना बंगाल से संबंधित है।

यह मध्यप्रदेश की 2018 की घटना है

वीडियो को ध्यान से देखने पर ही यह साफ मालूम होता है कि वीडियो के साथ साझा किया गया दावा गलत है। यह एक CCTV फुटेज की क्लिप है, वीडियो में ऊपर बायीं तरफ कोने में तारीख ’10-24-2018′ देखा जा सकता है।

फेसबुक पर कीवर्ड्स और टाइम फ्रेम के साथ सर्च करने पर हमने पाया कि medicalreportertoday.com ने इस घटना पर 31 अक्टूबर, 2018 को एक लेख प्रकाशित किया था। लेख के मुताबिक, यह घटना भिंड के जिला अस्पताल, मध्यप्रदेश की है। मृतक के परिजनों ने एक ऑन-ड्यूटी डॉक्टर की उसके केबिन में पिटाई कर दी। medicalreportertoday.com के लेख में पिछले साल के इसी वीडियो को प्रकाशित किया है।

 

a sad incident happend ..
assault on Doctor in Bhind

Posted by Medicos United on Monday, 29 October 2018

दैनिक भास्कर ने भी इस घटना की रिपोर्ट की है। मीडिया संगठनो के मुताबिक, 40 वर्षीय एक मरीज़, सुष्मा की मौत ने इस हिंसा को उकसाया था। इस महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां पर उनकी जांच डॉ.आर.के.अग्रवाल कर रहे थे, जिन्होंने बाद में मरीज़ को ग्वालियर के अस्पताल ले जाने की बात कही। हालांकि, एम्बुलेंस के आने का इंतज़ार करते वक़्त ही उनकी की मौत हो गई। गुस्से में आकर, महिला के परिवारजनों ने डॉ.अग्रवाल पर हमला कर दिया और उनके कमरे की खिड़कियों को तोड़ डाला। लेख के मुताबिक, अस्पताल में तैनात विशेष सशस्त्र बल (SAF) के गॉर्ड ने इस पूरी घटना को देखा था लेकिन इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। दैनिक भास्कर के अनुसार, मरीज़ अनेमिया से पीड़ित थी और उसकी हीमोग्लोबिन की संख्या 3 से भी कम हो चुकी थी।

मध्य प्रदेश में हुई पुरानी घटना के वीडियो को सोशल मीडिया में बंगाली संदेश के साथ साझा किया जा रहा है, ताकि लोगों को यह दिखाया जा सके की यह हाल की घटना है और पश्चिम बंगाल से संबधित है।

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