“चायना मे गैर मुस्लिम भी जुम्मा मे नमाज पढ़ रहे है, ये है अल्लाह की कुदरत, अल्लाह से बढ़कर कोई बादशाह नही”, इस मेसेज के साथ सोशल मीडिया में एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. वीडियो में लोगों को नमाज़ पढ़ते हुए और रोड की दूसरी तरफ खड़े अन्य कुछ लोग इसे रिकॉर्ड करते हुए देखे जा सकते हैं. दावा किया जा रहा है कि चीन में गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कोरोना वायरस से बचने के लिए जुम्मे की नमाज़ पढ़ना शुरू कर दिया है. एक फ़ेसबुक यूज़र ने इस वीडियो को इसी मेसेज के साथ पोस्ट किया है. (आर्काइव किया हुआ पोस्ट)

चायना मे नमाज पढ़ने पर, अजान देने पर, कुरआन पढ़ने पर, पाबंदी के साथ सजा भी थी, अल्लाह ने अज़ाब लाया तो गैर मुस्लिम भी आज़ जुम्मा मे नमाज पढ़ रहे है, ये है अल्लाह की कुदरत , अल्लाह से बढ़कर कोई बादशाह नही ,
Non Muslims Chinese attend Jumma Namaz ,,they don’t know which side Stand for Namaz.

Posted by Wasim Rehmani Tenu on Friday, 7 February 2020

ट्विटर पर Desi bhai#VSGT (Shaheenbagh wale) नामक एक यूज़र ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “Non Muslims Chinese attend Jumma Namaz ,,they don’t know which side Stand for Namaz. Religion does not say to hate?” (अनुवाद – गैर मुस्लिम चाइनीज़ ने जुम्मे की नमाज़ अता की, उन्हें नहीं पता कि नमाज़ के लिए कौन सी दिशा होती है. धर्म नफ़रत नहीं जानता है?) (आर्काइव किया हुआ ट्वीट)

ऑल्ट न्यूज़ के ऑफ़िशियल ऐप पर भी इस वीडियो की पड़ताल करने के लिए कई लोगों ने रिक्वेस्ट की.

फ़ैक्ट चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ये वायरल वीडियो साल 2019 के जून महीने का है. 11 फरवरी, 2020 की ‘factcrescendo’ की एक रिपोर्ट में मैक मोहम्मद नामक एक यूज़र की प्रोफ़ाइल पर एक वीडियो मिला. ये फ़ेसबुक लाइव था. ये फ़ेसबुक लाइव 5 जून, 2019 को किया गया था. मोहम्मद के लाइव वीडियो में 1 मिनट 15 सेकंड पर आपको वही देखने को मिलेगा जो कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है. यानी वायरल वीडियो मोहम्मद के फ़ेसबुक लाइव का ही एक हिस्सा है. वीडियो को शेयर करते हुए मोहम्मद ने लिखा है कि ये चीन के यीवू (Yiwu) शहर का है, जिसमें ईद की नमाज़ अता करने के दौरान इसे रिकॉर्ड किया गया था.

Eid prayer in China, Yiwu, Zhejing province

Posted by Mak Mohamed on Tuesday, 4 June 2019

आगे मोहम्मद की टाइमलाइन को खंगालने पर हमने पाया कि उन्होंने मुजीब नामक एक यूज़र की पोस्ट को 5 जून को शेयर किया था. इस पोस्ट में नमाज़ अता करने के कई अन्य वीडियो और तस्वीरें भी शेयर की गई थी.

Posted by Mak Mohamed on Tuesday, 4 June 2019

इसके अलावा, 5 जून, 2019 के दिन रमज़ान ईद/ईद-उल-फ़ितर का त्योहार था. इसी दिन ये फ़ेसबुक लाइव किया गया था.

हमने गूगल पर मौजूद यीवू मस्जिद की तस्वीर और वायरल वीडियो की फ़्रेम की तुलना की. दोनों के बीच की समनताओं को आप नीचे देख सकते है.

 

इस प्रकार, चीन के यीवू मस्जिद के बाहर तक़रीबन 8 महीने पहले ईद की नमाज़ पढ़ने का वीडियो, चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए गैर मुस्लिमों द्वारा नमाज़ पढ़ने के रूप में सोशल मीडिया पर शेयर किया गया. इस वीडियो का कोरोना वायरस से कोई लेना देना नहीं है.

इसी दावे से वायरल और पोस्ट्स

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ये वीडियो अलग-अलग भाषा में समान दावे वाले मेसेज से वायरल है. फ़ेसबुक पर एक यूज़र ने 8 फ़रवरी को अंग्रेज़ी भाषा के एक मेसेज के साथ ये वीडियो पोस्ट किया था – “Non Muslims Chinese attend Jumma Namaz ,,they don’t know which side Stand for Namaz” (अनुवाद – गैर मुस्लिम चाइनीज़ ने जुम्मे की नमाज़ अता की, उन्हें नहीं पता कि नमाज़ के लिए कौनसी दिशा होती है.)

उपरोक्त मेसेज के साथ ये वीडियो फ़ेसबुक और ट्विटर पर वायरल है.

ये वीडियो ट्विटर और फेसबुक पर एक गुजराती मेसेज के साथ भी शेयर किया गया है – “ચીન મે અલ્લાહકા કરીશમા મુસલીમ બહુમત ઈલાકોમે કોરોના વાઈરસ કા કોઈઅશરનહીદીખતા ઈસા પ્રભાવીતહોકે ચીન કે નોન મુસલીમ આજ જુમ્મા કી નમાજ પઠને કે લીયે હજારો કી તાદાતમે જમાહોકર જુમ્માકી નમાજ આદાકરતેહુવે ચીની અવામ યે હે હમારે ઈસ્લામ કી તાકાત ચીન મે એક દૌર થા જો મુસલીમો કો મસ્જીદોમે નમાઝ નહી પઠનેદીયા જાતાથા આજ ચીન કા પ્રેસીડન્ટ જીંમ્પીગ ખુદ નમાઝ અદાકરહા હૈ .👏”

फ़ेसबुक पर ‘BBT News Ghaziabad’ नामक एक पेज ने इस वीडियो को ये कहते हुए पोस्ट किया – “चीन में नमाज़ पढ़ना हुआ आम, कोरोना वायरस की आफत के बाद याद आया खुदा” (आर्काइव)

यूट्यूब पर ‘जासूस 007’ नामक एक वेरिफ़ाइड चैनल ने भी वायरल वीडियो को इसी दावे के साथ अपलोड किया था. इस वीडियो को यूट्यूब पर काफी यूज़र्स ने इसी दावे के साथ अपलोड किया है. (यूट्यूब वीडियो का आर्काइव किया हुआ लिंक)

ऐसा कोई भी मेसेज जो कि ये दावा करता है कि चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए नमाज़ पढ़ी गई, ग़लत है और ऐसा कोई भी सोशल मीडिया पोस्ट ग़लत जानकारी फैला रहा है. ऐसे मेसेजेज़ को फैलाने से बचें.

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