सिंघु बॉर्डर पर 29 जनवरी 2020 को लोगों का एक बड़ा समूह आ गया और हिंसा करने लगा. ये भीड़ पुलिस बैरिकेड तोड़कर किसानों पर पथराव करने लगी. कई ऐसे वीडियोज़ सामने आये जिसमें ये लोग किसानों के टेंट्स में तोड़-फोड़ करते दिख रहे हैं और जगह खाली करने की मांग कर रहे हैं. भीड़ का दावा था कि ये प्रदर्शन कर रहे लोग किसान नहीं हैं और उन्होंने गणतंत्र दिवस पर तिरंगे का अपमान किया था. भीड़ बार-बार कहती रही कि प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा हटा कर सिख ध्वज फहराया था. जबकि इसपर पहले ही कई फ़ैक्ट-चेक रिपोर्ट्स लिखी जा चुकी हैं कि ये दावा सही नहीं है.

कई मीडिया आउटलेट्स ने किसानों पर हमला करने वाली इस भीड़ को ‘स्थानीय लोग’ बताया.

वहीं कई मीडिया आउटलेट्स ने इन्हें ‘स्थानीय होने का दावा करने वाले लोग कहा.

हिंदी चैनलों ने भी इस हिंसक भीड़ को ‘स्थानीय लोग’ बताते हुए रिपोर्टिंग की.

भाजपा कार्यकर्ता इस भीड़ में शामिल

आज तक की ग्राउंड रिपोर्ट में सिंघु बॉर्डर पर तिरंगा थामे लोगों का एक समूह दिख रहा है. रिपोर्टर कहती है कि ये स्थानीय लोग हैं जो पहले किसान आन्दोलन का समर्थन कर रहे थे. लेकिन 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किला में हुई घटना के बाद वो प्रदर्शन के विरोध में हैं.

इस भीड़ में हरे-नीले-सफ़ेद रंग का स्वेटर पहने और तिरंगा लिए एक शख्स दिख रहा है. ये शख्स इस भीड़ में सबसे आगे पुलिस के पास खड़ा है. कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने इसकी पहचान ‘अमन डबास’ के तौर पर की है.

अमन डबास कौन है?

अमन खुद को उत्तर-पश्चिमी दिल्ली का समाजसेवी बताता है. उसके काम से जुड़ा हुआ फे़सबुक पेज है – ‘अमन कुमार सोशल वर्कर’.

पिछले साल उसके पेज पर उसकी एक तस्वीर अपलोड की गयी थी जिसमें वो पूठ खुर्द, वॉर्ड नंबर 31 के बरवाला गांव में डोर-टू-डोर सैनिटाइज़ेशन करवा रहा था.

अमन कुमार की पत्नी, अंजू कुमार उर्फ़ अंजू देवी वॉर्ड नंबर 31 की निगम पार्षद हैं.

अमन को भाजपा नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली की बैठकों में भी देखा गया है. अमन और अंजू देवी पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े नेता हुआ करते थे. 2017 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली.

अमन ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक तस्वीर शेयर की थी.

Myneta पर अंजू कुमार के बारे में लिखा है कि वो पूठ खुर्द की रहने वाली हैं. ये जगह सिंघु बॉर्डर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है. बॉर्डर पर जमा होने वाली भीड़ ने कहा कि वो स्थानीय लोग हैं जिन्हें रास्ता बन्द होने के कारण रोज़मर्रा के कामों में दिक्कत आ रही है और दुकान वाले अपनी दुकान नहीं खोल पा रहे हैं. लेकिन जो गांव सिंघु से 15 किलोमीटर दूर हो उसे सिंघु से सटा हुआ कैसे माना जा सकता है?

भीड़ में शामिल एक और भाजपा कार्यकर्ता

बॉर्डर पर इस भीड़ द्वारा की गयी हिंसा पर एक शख्स, क्रिशन डबास ने फे़सबुक पोस्ट डाला था. उसके पोस्ट डिलीट करने से पहले ऑल्ट न्यूज़ ने उसे डाउनलोड कर पोस्ट का स्क्रीनशॉट ले लिया था. भाजपा नेता संदीप सहरावत और रवीन्द्र कुमार को भी इस पोस्ट में टैग किया गया था. क्रिशन इन दोनों का करीबी मालूम पड़ता है. (पहला पोस्ट, दूसरा पोस्ट)

क्रिशन ने न्यूज़ नेशन के ब्रॉडकास्ट का एक हिस्सा पोस्ट किया था. इसमें वो खुद को सिंघु बॉर्डर पर विरोध करने वाला ‘स्थानीय’ बता रहा था.

इस वीडियो में भीड़ के साथ उसे नारे लगाते हुए सुना जा सकता है – ‘हमारा बॉर्डर खाली करो’. इसमें 12 सेकंड पर अमन डबास भी दिख रहा है. इस भीड़ के सामने दंगा विरोधी दस्ता खड़ा है. रायट गियर पहने बड़ी संख्या में पुलिस खड़ी है.

क्रिशन ने जो दूसरा वीडियो अपलोड किया था उसमें अमन पुलिस के पास खड़ी भीड़ में सबसे आगे नज़र आ रहा है. आजतक के वीडियो में भी ऐसा ही नज़र आ रहा था.

नीचे आजतक के वीडियो में क्रिशन (1:45) और अमन (0:25) दोनों को देखा जा सकता है.

पिछले साल क्रिशन ने भाजपा वेस्ट दिल्ली के पूठ खुर्द ऑफ़िस में अमन की पत्नी, वॉर्ड नंबर 31 की पार्षद अंजू कुमार के साथ तस्वीर शेयर की थी.

नीचे अमन और क्रिशन की एक हालिया तस्वीर है जिसमें दोनों भाजपा दिल्ली का बैनर थामे अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुद को स्थानीय बताकर सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध किया. ऐसे वीडियो सामने आये जिसमें बॉर्डर पर अचानक आई इस भीड़ ने किसानों पर जमकर पत्थरबाज़ी की और पुलिस मूकदर्शक बनकर देख रही थी.

वर्गीकरण करना कठिन

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