BJYM मेंबर का ग़लत दावा : पश्चिम बंगाल में बिहारी परिवार पर बांग्लादेशियों ने नहीं किया हमला

ट्विटर और फ़ेसबुक यूज़र्स ने 2 मिनट का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें एक महिला रोते हुए शिकायत कर रही है कि पुलिस उसके भाई को ले गई जिसके बाद पड़ोसी ने उसके घर में तोड़-फोड़ की. महिला ने दावा किया कि उन्होंने उसके घर के गेट और खिड़कियां तोड़ डाले. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वो बिहार से हैं. वह पूरे वीडियो के दौरान रोती रहती है.

भाजपा की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिजात मिश्रा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ये बिहार की युवती, सिलीगुड़ी बंगाल में रहती हैं लेकिन ममता बानो के बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठियों ने इनके घर पर हमला कर दिया इनकी क्या हालत की आप देखिए बिहारी होने की सजा #मरता_हिन्दू_जलता_बंगाल”. मिश्रा के ट्वीट को 11,000 बार रिट्वीट किया गया और वायरल वीडियो 2.5 लाख से ज़्यादा बार देखा गया. (ट्वीट का आर्काइव)

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस वीडियो को अभिजात मिश्रा के कैप्शन से ही शेयर किया है.

सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट ने दावे को किया खारिज

वीडियो देखकर ही शक होता है कि इसमें कोई साम्प्रदायिक एंगल नहीं है. वीडियो में कहीं भी महिला ये नहीं कहती कि उसे और उसके परिवार पर अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी शरणार्थियों ने हमला किया है. पूरे वीडियो में वो कहती है, “मेरे छोटे भाई को पुलिस स्टेशन उठा के ले गयी, बिना कुछ बताए कि उसने क्या किया है. यहां के लोग बहुत बुरा करते हैं हमारे साथ, इसलिए कि हमारे पापा नहीं हैं. मेरी मम्मी कैंसर पेशेंट हैं. ये हमेशा ही ऐसा करते हैं. हम कुछ नहीं करते. ये हमसे लड़ता और परेशान करता है. इसने हमारा घर तोड़ दिया, गेट तोड़ दिया और खिड़की विड़की सब तोड़ दीं. सब बर्बाद कर दिया. (फोन रिंग बजती है) प्लीज़ हेल्प, मैं क्या करूं. उसने मेरी मां को भी मारा है. उनके हाथ से खून निकल रहा है. मैं उन्हें हॉस्पिटल भी नहीं ले जा सकती क्योंकि हमारे बाहर कदम रखते ही वो हमला करता है. कोई कुछ नहीं कर रहा है, सब तमाशा देख रहे हैं. वो कह रहे हैं ये बिहारी है इसको भगाओ. हम बिहारियों को रहने नहीं देंगे. हमने अपने पैसे से यहां ज़मीन खरीदी है. हम बिहारी हैं क्या इसलिए हमें बंगाल में जमीन खरीदने का हक नहीं है. क्या बंगाली ही खरीद सकते हैं?

वीडियो देखकर लगता है कि मामला धर्म का नहीं बल्कि क्षेत्रवाद का है.

14 मई को सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के फ़ेसबुक पेज पर एक पोस्ट किया गया जिसमें कहा गया कि इस कहानी में कोई कम्युनल एंगल नहीं है. पोस्ट के मुताबिक, “साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अभिजात मिश्रा के खिलाफ झूठा प्रोपेगैंडा फैलाने और मामले को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए केस दर्ज किया गया है.” पोस्ट में जानकारी दी गई कि वीडियो में दिख रही महिला अनुराधा पांडे है और 12 मई को उनके परिवार पर रूबी दास ने हमला किया था.  इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे कि फ़ैमिली पर हमला अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी शरणार्थियों ने किया है, पूरी तरह गलत है. सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट ने आगे बताया कि इस मामले की शिकायत न्यू जलपाईगुड़ी पुलिस स्टेशन पर लिखाई गई थी.

One lady named Anuradha Pandey @ Anu of Ward no 35 under NJP PS posted one Video in her FB page alleging that she & her…

Posted by Siliguri Police Commissionerate on Thursday, 14 May 2020

पश्चिम बंगाल पुलिस ने 14 मई को वायरल वीडियो और कमिश्नरेट के फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट #FakeNewsAlert के साथ ट्वीट किया.

घटना पर सिलीगुड़ी टाइम्स में रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी जिसमें लिखा है, “सिलीगुड़ी के भक्तिनगर इलाके में दो परिवारों के बीच कूड़ा फेंकने को लेकर विवाद हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक घटना में दोनों परिवार के के सदस्यों को चोट आई है.” आर्टिकल के मुताबिक अनुराधा पांडे ने दावा किया कि उनके पड़ोसियों ने उनके घर के पास कूड़ा फेंका, विरोध करने पर उनके परिवार से मारपीट की और घर में तोड़-फोड़ की.

हमारे फैक्ट चेक से पहले Facto News ने 15 मई को इसे रिपोर्ट किया है.

साम्प्रदायिक एंगल के साथ वायरल वीडियो शेयर किया गया जिसे सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट और पश्चिम बंगाल पुलिस ने ख़ारिज किया.

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